छत्तीसगढ़

शार्लेट में नाचा संस्था एनसी चैप्टर का दीपावली मिलन समारोह धूमधाम से 

अमेरिका में प्रवासी छत्तीसगढ़ियों ने उत्साह से मनाया दीपोत्सव

शार्लेट में नाचा संस्था एनसी चैप्टर का दीपावली मिलन समारोह धूमधाम से 

 

अमेरिका में प्रवासी छत्तीसगढ़ियों ने उत्साह से मनाया दीपोत्सव

 

धमतरी।सात समंदर पार अमेरिका में रह रहे प्रवासी छत्तीसगढ़ियों ने अपनी माटी की खुशबू, लोकसंस्कृति और पारंपरिक अपनत्व को जीवंत करते हुए दीपावली मिलन समारोह 2026 धूमधाम से मनाया।नाचा के एनसी चैप्टर द्वारा आयोजित इस समारोह में छत्तीसगढ़ी गीत-संगीत, नृत्य और आपसी भाईचारे की मनमोहक छटा देखने को मिली। पूरा आयोजन छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत, मातृभूमि के प्रति प्रेम और प्रवासी समुदाय की एकजुटता को समर्पित रहा।

विदेश की धरती पर आयोजित यह समारोह केवल दीपावली उत्सव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अपनी जड़ों से जुड़े रहने और नई पीढ़ी तक छत्तीसगढ़ की भाषा, परंपराओं एवं लोककला को पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम भी बना। हजारों किलोमीटर दूर रहने के बावजूद जब प्रवासी छत्तीसगढ़ी परिवार एक मंच पर जुटे, तो गीत-संगीत और खुशियों के बीच अपने गांव, घर-आंगन और अपनों की यादें ताजा हो गईं।

 

छत्तीसगढ़ी गीतों पर थिरके बच्चे, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन

कार्यक्रम की शुरुआत धमतरी निवासी अशुतोष सोनी ने अनुज शर्मा द्वारा गाए गए गीत को अपने अनूठे अंदाज में प्रस्तुत कर की। उनकी प्रस्तुति ने समारोह में उत्साह का माहौल बना दिया। इसके बाद बच्चों ने विभिन्न गीतों पर शानदार नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोह लिया। विशेष रूप से लावण्या सोनी ने ‘जय जोहार’ गीत पर आकर्षक नृत्य प्रस्तुति देकर खूब सराहना बटोरी।समारोह में बच्चों ने ‘जय जोहार’, ‘मल्हारी’, ‘ओ जाने जान’, ‘झूम ले संगवारी’, ‘हैप्पी दिवाली सुनो घरवाली’ और ‘मैं तो गया रे’ जैसे गीतों पर नृत्य प्रस्तुत किया। छत्तीसगढ़ी संगीत की मधुर धुनों पर उपस्थित लोग भी झूमते नजर आए। इन प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को मनोरंजक बनाने के साथ ही छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति और मातृभाषा के प्रति लोगों के प्रेम को भी प्रदर्शित किया।

 

सुनील सोनी, कंचन जोशी और रैपर अंकित के गीतों ने बढ़ाया उत्साह

 

समारोह में छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय गायक सुनील सोनी एवं कंचन जोशी तथा रैपर अंकित की आवाज में प्रस्तुत गीतों ने विशेष आकर्षण पैदा किया। ‘झूम ले संगवारी’ और ‘मान झूम-झूम के खिल गया’ जैसे गीतों पर बच्चों और अन्य प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक नृत्य किया।

 

विदेश में अपने प्रदेश के कलाकारों के गीतों को सुनना प्रवासी छत्तीसगढ़ियों के लिए भावनात्मक जुड़ाव का अवसर बना। गीतों की धुनों में उन्हें अपने गांव, त्योहारों, बचपन और अपनों की यादों की झलक मिली। छत्तीसगढ़ी संगीत की मिठास ने समारोह में उपस्थित परिवारों के बीच आत्मीयता और सांस्कृतिक गौरव की भावना को और मजबूत किया।

 

अमेरिका में पली-बढ़ी नई पीढ़ी का छत्तीसगढ़ी गीतों पर नृत्य करना और ‘जय जोहार’ के साथ अपनी संस्कृति से जुड़ना आयोजन के खास आकर्षणों में शामिल रहा। ऐसे आयोजन बच्चों को अपनी मातृभाषा, लोकगीतों और पारंपरिक मूल्यों से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

प्रवासी छत्तीसगढ़ियों की एकजुटता और अपनी मिट्टी के प्रति प्रेम का प्रतीक बना आयोजन

Author Desk

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