छत्तीसगढ़

साहित्यकारों के सम्मान से गौरवान्वित हुआ धमतरी नगर निगम द्वारा मार्ग व परिसर नामकरण पर साहित्य समिति व सिख समाज ने जताया आभार

कवि श्री सुरजीत नवदीप के नाम से नालंदा परिसर का नामकरण भी स्वीकृत


धमतरी(प्रखर) नगर के सांस्कृतिक और साहित्यिक इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। नगर पालिक निगम धमतरी द्वारा जिले के प्रतिष्ठित साहित्यकारों के नाम पर मार्गों तथा नालंदा परिसर का नामकरण किए जाने की घोषणा से साहित्य जगत में हर्ष और गर्व का वातावरण है। यह निर्णय धमतरी जिला हिन्दी साहित्य समिति एवं सिख समाज की दीर्घकालीन मांग का सकारात्मक और सम्मानजनक परिणाम माना जा रहा है।
नगर पालिक निगम द्वारा सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्री नारायण लाल परमार, श्री त्रिभुवन पांडे, श्री मुकीम भारती एवं श्री भगवती सेन के नाम पर मार्गों का नामकरण किया जा रहा है। वहीं हास्य-व्यंग्य के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान बनाने वाले कवि श्री सुरजीत नवदीप के नाम से नालंदा परिसर का नामकरण भी स्वीकृत किया गया है। यह निर्णय न केवल साहित्यकारों के रचनात्मक योगदान का सम्मान है, बल्कि भावी पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत भी बनेगा।
इस गरिमामय निर्णय के लिए धमतरी जिला हिन्दी साहित्य समिति एवं सिख समाज के प्रतिनिधियों ने महापौर कार्यालय पहुंचकर महापौर  रामू रोहरा के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर महापौर का शाल, श्रीफल एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ. चन्द्रशेखर चौबे ने समिति की ओर से आभार पत्र का वाचन किया। उन्होंने कहा कि किसी नगर की पहचान उसके साहित्य, संस्कृति और विचारशील परंपराओं से होती है। जिन साहित्यकारों ने अपने लेखन से समाज को दिशा दी, उनके नाम पर सार्वजनिक स्थलों का नामकरण सच्चा सम्मान है।
धमतरी जिला हिन्दी साहित्य समिति के अध्यक्ष  डुमन लाल ध्रुव ने कहा कि साहित्यकारों के नाम पर मार्गों एवं नालंदा परिसर का नामकरण ऐतिहासिक और दूरदर्शी निर्णय है। उन्होंने कहा कि इससे साहित्य को नई ऊर्जा मिलेगी और समाज में रचनात्मक सोच को प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने महापौर श्री रामू रोहरा के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय नगर निगम की साहित्य के प्रति संवेदनशील सोच को दर्शाता है।
कार्यक्रम में समिति के संरक्षक गोपाल शर्मा ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होता है और साहित्यकार समाज के प्रहरी होते हैं। नगर निगम का यह निर्णय आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देगा कि रचनात्मक योगदान देने वालों को समाज सदैव स्मरण रखता है।
गुरुसिंग महासभा के सचिव सरदार जसपाल सिंह छाबड़ा ने कहा कि सिख समाज शिक्षा, साहित्य और सेवा को सर्वोच्च स्थान देता है। नालंदा परिसर का नामकरण हास्य-व्यंग्य कवि श्री सुरजीत नवदीप के नाम पर किया जाना यह दर्शाता है कि समाज में व्यंग्य के माध्यम से सत्य कहने वाले रचनाकारों का भी उतना ही महत्व है।
महापौर  रामू रोहरा ने अपने उद्बोधन में कहा कि नगर पालिक निगम का दायित्व केवल बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि नगर की सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत को सहेजना भी है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि भविष्य में भी साहित्य, संस्कृति और शिक्षा से जुड़े कार्यों को नगर निगम का पूरा सहयोग मिलेगा।
कार्यक्रम में उपस्थित साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस निर्णय को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इससे युवाओं में साहित्य के प्रति रुचि बढ़ेगी और धमतरी की साहित्यिक पहचान और सशक्त होगी।
इस अवसर पर संरक्षक  गोपाल शर्मा, मदन मोहन खंडेलवाल, डॉ. भूपेंद्र सोनी, विनोद राव रणसिंग, नरेश चंद्र श्रोती, डॉ. चन्द्रशेखर चौबे, डॉ. सरिता दोशी, श्रीमती कामिनी कौशिक, लोकेश प्रजापति, गोपाल साहू, प्रेम शंकर चौबे, श्री मंजीत छाबड़ा, प्रीतपाल सिंह छाबड़ा, हरमिंदर सिंह छाबड़ा, रंजीत छाबड़ा, जगजीवन सिद्धू (प्रधान गुरुसिंग सभा), रजिंदर सिंह आजमानी, जसपाल सिंह देऊ, मनजोध बिंद्रा, राजू देऊ सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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