सुखसागर वृद्धजन सदन की कल रखी जायेगी नींव

समाजसेवा का पर्याय बनते रीतुराज पवार: सेवा, समर्पण और संवेदनशीलता की मिसाल
धमतरी। शहर के युवा समाजसेवी रीतुराज पवार आज सेवा और समर्पण के पर्याय के रूप में पहचाने जा रहे हैं। उन्होंने अपने कार्यों के माध्यम से यह साबित किया है कि सच्ची सेवा वही है, जो बिना किसी स्वार्थ के जरूरतमंदों तक पहुंचे। रीतुराज पवार द्वारा संचालित फाउंडेशन लगातार समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए कार्य कर रहा है।
रीतुराज पवार की समाजसेवा की यात्रा वर्षों पहले शुरू हुई, जो आज एक व्यापक रूप ले चुकी है। विशेष रूप से कोरोना काल के दौरान जब लोग अपने घरों से बाहर निकलने से भी डर रहे थे, उस कठिन समय में उन्होंने निःशुल्क टिफिन सेवा शुरू कर जरूरतमंदों, मरीजों और उनके परिजनों तक भोजन पहुंचाने का कार्य किया। इसके साथ ही उन्होंने एम्बुलेंस सेवा उपलब्ध कराकर गंभीर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
शिक्षा के क्षेत्र में भी रीतुराज पवार का योगदान सराहनीय है। वे हर वर्ष गरीब एवं जरूरतमंद बच्चों के लिए निःशुल्क पुस्तक, कॉपी और पेन की व्यवस्था करते हैं, जिससे बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने में किसी प्रकार की बाधा न आए। उनका मानना है कि शिक्षा ही समाज को आगे बढ़ाने का सबसे सशक्त माध्यम है।
वर्तमान में रीतुराज पवार द्वारा “सुखसागर वृद्धजन सदन” की स्थापना की जा रही है, जिसका उद्देश्य बेसहारा, बेघर और असहाय वृद्धजनों को सुरक्षित आश्रय प्रदान करना है। इस पहल के तहत बुजुर्गों को रहने, भोजन, स्वास्थ्य और देखभाल जैसी सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। यह परियोजना उनके सेवा भाव और सामाजिक जिम्मेदारी का एक और महत्वपूर्ण उदाहरण है।
इस महत्वपूर्ण परियोजना का भूमिपूजन कार्यक्रम 24 अप्रैल को प्रातः 10 बजे आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम आचार्य पंडित श्रीहित आकाश जी महाराज के सानिध्य में छत्रपति शिवाजी महाराज मंगल भवन के सामने संपन्न होगा।
रीतुराज पवार का व्यक्तित्व सादगी, संवेदनशीलता और कर्मठता का प्रतीक है। वे समाज के हर वर्ग की समस्याओं को समझकर समाधान के लिए प्रयासरत रहते हैं। उनके कार्य न केवल लोगों की मदद कर रहे हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव की प्रेरणा भी दे रहे हैं।
निस्वार्थ सेवा और जनकल्याण के प्रति उनका समर्पण उन्हें धमतरी ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में एक प्रेरणास्रोत बना रहा है।



