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पहलगाम हमले की पहली बरसी आज, सेना ने कहा कुछ हदें कभी पार नहीं की जानी चाहिए भारत भूलता नहीं है

नई दिल्ली। पहलगाम की बायसरन घाटी में 22 अप्रैल, 2025 को हुए आतंकी हमले की आज पहली बरसी है। इस अवसर पर प्रशासन ने पूरे कश्मीर संभाग में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। धार्मिक स्थलों, पर्यटन केंद्रों और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। बायसरन हमले के बाद सुरक्षा कारणों से बंद किए गए पर्यटन स्थलों पर विशेष ध्यान दिया गया है। उस समय करीब 48 पर्यटन स्थलों को बंद किया गया था, जिनमें से अब लगभग 42 को दोबारा खोल दिया गया है।

वहीँ सेना ने मंगलवार को पहलगाम आतंकी हमले की बरसी से पहले कड़ा संदेश दिया। सेना ने कहा कि जब इंसानियत की सीमाएं पार की जाती हैं, तो उसका जवाब भी निर्णायक होता है और भारत ऐसे समय में एकजुट होकर खड़ा रहता है। एडीजीपीआई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए एक पोस्ट में लिखा, न्याय मिल गया है, भारत एकजुट है। इसके साथ एक पोस्टर भी जारी किया गया, जिस पर लिखा था, कुछ हदें कभी पार नहीं की जानी चाहिएज् भारत भूलता नहीं है।

भारत आतंकवाद के खिलाफ नहीं झुकेगा : पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले की पहली बरसी पर जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भावुक संदेश साझा करते हुए कहा कि इस हमले में जान गंवाने वाले निर्दोष नागरिकों को कभी भुलाया नहीं जा सकता। इसके साथ ही उन्होंने आतंकवाद को लेकर स्पष्ट संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ नहीं झुकेगा, आतंकियों के मंसूबे कभी कामयाब नहीं होंगे।

प्रधानमंत्री ने आगे लिखा, पिछले साल आज ही के दिन पहलगाम में हुए भयानक आतंकी हमले में जान गंवाने वाले निर्दोष लोगों को याद कर रहा हूं। उन्हें कभी भुलाया नहीं जाएगा। मेरी संवेदनाएं उन शोक संतप्त परिवारों के साथ हैं जो इस अपूरणीय क्षति का सामना कर रहे हैं। एक राष्ट्र के तौर पर, हम दुख और संकल्प में एकजुट हैं। भारत आतंकवाद के किसी भी रूप के आगे कभी नहीं झुकेगा और आतंकवादियों के नापाक मंसूबे कभी कामयाब नहीं होंगे।

पहलगाम में बना श्रद्धांजलि स्मारक
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में श्रद्धांजलि स्थल स्थापित किया गया है, जो 22 अप्रैल 2025 को बैसरन में हुए दर्दनाक आतंकी हमले में जान गंवाने वाले 26 लोगों की याद को समर्पित है। यह स्मारक उन मासूम जिंदगियों की याद दिलाता है, जिन्हें इस भयावह घटना में खो दिया गया था।

भारत की प्रतिक्रिया अब अधिक मजबूत, स्पष्ट और निर्णायक : राजनाथ सिंह
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी पहलगाम में हुए आतंकी हमले की बरसी पर जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि अर्पित की है। उन्होंने कहा कि 22 अप्रैल 2025 को हुए इस कायरतापूर्ण हमले में जिन निर्दोष लोगों ने अपनी जान गंवाई, उन्हें देश कभी नहीं भूल सकता। राजनाथ सिंह ने शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि उनके दर्द को पूरा देश साझा करता है। उन्होंने कहा कि यह घाव भारत की स्मृतियों में हमेशा ताजा रहेगा। रक्षा मंत्री ने अपने संदेश में यह भी कहा कि भारत ने दशकों से सीमा पार आतंकवाद का सामना किया है, लेकिन आज देश की प्रतिक्रिया पहले से कहीं अधिक मजबूत, स्पष्ट और निर्णायक है। उन्होंने दो टूक कहा कि भारत की एकता और नागरिकों को नुकसान पहुंचाने की किसी भी कोशिश का जवाब पूरी शक्ति और दृढ़ता के साथ दिया जाएगा। राजनाथ सिंह ने जोर देते हुए कहा कि भारत अब हर चुनौती का जवाब मजबूती से दे रहा है। आतंकवाद या देश की एकता को चुनौती देने वाली किसी भी हरकत को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

आतंकवाद मानवता का सबसे बड़ा दुश्मन : अमित शाह
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन मासूम लोगों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने इस हमले में अपनी जान गंवाई थी। उन्होंने कहा कि यह घटना आज भी हर भारतीय के दिल में गहरे दुख और पीड़ा के रूप में मौजूद है। अमित शाह ने अपने संदेश में कहा कि आतंकवाद मानवता का सबसे बड़ा दुश्मन है और इसके खिलाफ सभी को मिलकर एकजुट होकर लडऩा होगा। उन्होंने दोहराया कि भारत आतंकवाद और उसे संरक्षण देने वालों के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस नीति पर पूरी मजबूती से कायम रहेगा।

आतंकियों ने धर्म पूछकर मारी थी गोली

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में टूरिस्ट स्पॉट के तौर पर लोकप्रिय बायसरन घाटी में 22 अप्रैल 2025 को दोपहर करीब 2.30 बजे आतंकियों ने पर्यटकों पर अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं। इसमें 26 लोगों की मौत हो गई। बताया जाता है कि आतंकी सेना की वर्दी में आए थे। इस हमले में जिंदा बचे प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि आतंकियों ने पर्यटकों से पहले उनका धर्म पूछा, परिचय पत्र देखे और फिर हिंदू हो कहकर गोली मार दी।

26 मृतकों में ज्यादातर पर्यटक थे। फरवरी, 2019 में पुलवामा में हुए हमले के बाद से जम्मू-कश्मीर में यह सबसे बड़ा आतंकी हमला रहा। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि पहले इन आतंकियों ने खाने-पीने की दुकानों के आसपास हालात का जायजा लिया और फिर वहां बैठे लोगों और टट्टू की सवारी कर रहे पर्यटकों पर ताबड़तोड़ गोलीबारी शुरू कर दी। हमले को अंजाम देने के बाद आतंकी घटनास्थल से फरार हो गए थे। बाद में सुरक्षा और जांच एजेंसियों ने इन आतंकियों के भागने और इनकी लोकेशन को लेकर बड़े खुलासे किए।
इस हमले के जवाब में, भारतीय सशस्त्र बलों ने 6 और 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। अधिकारियों के अनुसार, यह एक केंद्रित, नपा-तुला और तनाव न बढ़ाने वाला सैन्य अभियान था, जिसका लक्ष्य पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर में मौजूद आतंकवादियों के अहम ठिकानों को निशाना बनाना था।

सेना ने भुज में दिखाई विध्वंसक ताकत

भुज। ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ से पहले भारतीय सेना ने अपनी ताकत और तैयारियों का दमदार प्रदर्शन किया है। सेना की एयर डिफेंस रेजिमेंट ने एल70 एयर डिफेंस गनों का प्रदर्शन किया, जो ऑपरेशन के दौरान दुश्मन के ड्रोन हमलों को नाकाम करने में बेहद अहम साबित हुई थीं। इसके साथ ही ड्रोन की ताकत दिखाई और जल एवं जमीन दोनों पर ऑपरेशन का अभ्यास किया। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना ने पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए एडवांस ड्रोन तैनात किए थे। इनका इस्तेमाल निगरानी के साथ ही टारगेट की पहचान और रियल-टाइम खुफिया जानकारी जुटाने के लिए किया गया। दुर्गम इलाकों में सेना को अपने ऑपरेशन में इन ड्रोन्स से काफी मदद मिली थी।

जल और थल दोनों पर दबदबा
भारतीय सेना ने एम्फीबियस ऑपरेशन यानी जल और थल दोनों का भी अभ्यास। इस दौरान जमीन और पानी दोनों मोर्चों पर दुश्मन पर कब्जा जमाने की रणनीति दिखाई गई। सेना के इस अभ्यास और ताकत प्रदर्शन ने यह साबित किया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सेना ने क्रीक एरिया में जमीन और पानी दोनों जगह अपना दबदबा कायम रखा।

Author Desk

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