छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ विधानसभा : सेवा ग्राम परियोजना पर विधानसभा में तीखी बहस, 129 करोड़ खर्च पर सरकार से जवाब तलब

छत्तीसगढ़ विधानसभा : सेवा ग्राम परियोजना पर विधानसभा में तीखी बहस, 129 करोड़ खर्च पर सरकार से जवाब तलब

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के चौथे दिन नया रायपुर में निर्माणाधीन सेवा ग्राम परियोजना को लेकर सदन में जोरदार बहस हुई। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने परियोजना पर हुए खर्च और उसकी उपयोगिता को लेकर सरकार से कई सवाल पूछे। विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि परियोजना में बिना पर्याप्त सेटअप और उपयोगिता सुनिश्चित किए 129 करोड़ रुपये कैसे खर्च कर दिए गए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस तरह का खर्च बिजनेस रूल के तहत अनुमत है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी एक व्यक्ति की इच्छा पूर्ति के लिए 200 करोड़ रुपये तक खर्च नहीं किए जा सकते। साथ ही उन्होंने पूछा कि यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी।

जवाब में उद्योग मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि सेवा ग्राम परियोजना का काम पिछली सरकार के कार्यकाल में शुरू हुआ था। उन्होंने आश्वस्त किया कि परियोजना से जुड़े सभी नियमों और प्रक्रियाओं की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। मंत्री ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि बिजनेस रूल का उल्लंघन न हो और सेवा ग्राम का संचालन प्रभावी एवं जनहितकारी तरीके से किया जाए।

इस दौरान सदन में अजय चंद्राकर और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। हालांकि बाद में अजय चंद्राकर ने अपने व्यवहार पर खेद व्यक्त किया, जिस पर भूपेश बघेल ने उनका धन्यवाद करते हुए विषय को आगे बढ़ाया। सेवा ग्राम परियोजना को लेकर हुई इस बहस ने सदन का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।

 

मन की बात बनाम मंत्री का जवाब: ताम्रपत्र की भाषा को लेकर सदन में विवाद

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान ज्ञान भारतम अभियान के तहत प्राचीन पांडुलिपियों और ऐतिहासिक ताम्रपत्रों के सत्यापन का मुद्दा सदन में गूंजा। कांग्रेस विधायक राघवेंद्र सिंह ने प्रश्नकाल के दौरान मल्हार से प्राप्त ऐतिहासिक बालार्जुन ताम्रपत्र को लेकर सरकार से सवाल किया।
राघवेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने रेडियो कार्यक्रम मन की बात में इस ऐतिहासिक ताम्रपत्र को ब्राह्मी और पाली भाषा में लिखा हुआ बताया था, जबकि सदन में विभागीय मंत्री ने इसे ब्राह्मी और संस्कृत भाषा में लिखा होना बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की बात पर देश भरोसा करता है, ऐसे में मंत्री का जवाब भ्रम पैदा करने वाला है।

कांग्रेस विधायक ने आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारियों ने गलत तथ्य प्रस्तुत कर मंत्री से गलत जवाब दिलवाया है। उन्होंने मांग की कि सदन को गुमराह करने वाले अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए। इस पर संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने सदन को आश्वस्त करते हुए कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि जानकारी तैयार करने में किसी अधिकारी की लापरवाही या त्रुटि सामने आती है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

यह है पूरा मामला :
संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने राघवेंद्र सिंह के सवाल के जवाब में बताया कि ज्ञान भारतम् अभियान के तहत छत्तीसगढ़ से मोबाइल ऐप के जरिए कुल 1,24,422 पांडुलिपियों को पंजीकृत किया गया था। इनमें से 12,040 पांडुलिपियां ज्ञानभारतम केंद्र नई दिल्ली द्वारा सत्यापित की जा चुकी हैं, जबकि 1,12,382 पांडुलिपियां तकनीकी या अन्य कारणों से अस्वीकृत कर दी गई हैं। विवाद की मुख्य वजह बिलासपुर जिले के मस्तूरी क्षेत्र के ऐतिहासिक स्थल मल्हार से प्राप्त प्रसिद्ध बालार्जुन ताम्रपट्टिका बनी। मंत्री ने अपने जवाब में बताया कि इसकी खोज वर्ष 1987 में हुई थी, इसकी लिपि पेटिकाशीर्ष ब्राह्मी और भाषा संस्कृत है। वर्तमान में यह ऐतिहासिक अभिलेख मल्हार निवासी संजीव पाण्डेय के आधिपत्य में सुरक्षित है। इसी भाषा और लिपि के रिकॉर्ड पर कांग्रेस विधायक ने प्रधानमंत्री के वक्तव्य का हवाला देकर अधिकारियों को कटघरे में खड़ा कर दिया।

Author Desk

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