हरेली पर ज्ञान अमृत इंग्लिश स्कूल में दिखी छत्तीसगढ़ी संस्कृति और हरियाली की झलक
नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों ने पेड़-पौधे, फल-सब्जियों का रूप धारण कर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
हरेली पर ज्ञान अमृत इंग्लिश स्कूल में दिखी छत्तीसगढ़ी संस्कृति और हरियाली की झलक
नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों ने पेड़-पौधे, फल-सब्जियों का रूप धारण कर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
धमतरी। छत्तीसगढ़ के पारंपरिक लोकपर्व हरेली के अवसर पर ज्ञान अमृत इंग्लिश स्कूल धमतरी में हर्षोल्लास के साथ ग्रीन डे कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को हरेली पर्व की सांस्कृतिक महत्ता से परिचित कराने के साथ प्रकृति, पर्यावरण, हरियाली और स्वस्थ जीवन के प्रति जागरूक करना रहा।
कार्यक्रम में नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों ने हरे रंग की आकर्षक एवं रचनात्मक वेशभूषा धारण कर पेड़-पौधे, पत्तियां, फूल, फल एवं सब्जियों का स्वरूप प्रस्तुत किया। किसी बच्चे ने वृक्ष का रूप धारण किया तो किसी ने पत्तियों और फूलों से आकर्षक पोशाक तैयार की। बच्चों की इन मनमोहक प्रस्तुतियों से पूरा परिसर हरियाली के रंग में रंग गया।
विद्यार्थियों ने छत्तीसगढ़ी पारंपरिक वेशभूषा एवं आभूषणों के माध्यम से प्रदेश की लोक संस्कृति की सुंदर झलक भी प्रस्तुत की। साथ ही बांस से बने पारंपरिक साधनों पर चलने की गतिविधि में भाग लेकर ग्रामीण जीवन, लोक खेल एवं छत्तीसगढ़ की पारंपरिक संस्कृति को करीब से समझा।
विद्यालय के प्राचार्य विनोद कुमार पांडेय ने कहा कि हरेली केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर है। उन्होंने कहा कि बच्चों को केवल पुस्तकीय ज्ञान देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें अपनी संस्कृति, परंपरा, प्रकृति और पर्यावरण से जोड़ना भी शिक्षा का महत्वपूर्ण उद्देश्य है। ऐसे कार्यक्रम बच्चों में रचनात्मकता के साथ प्रकृति के प्रति प्रेम और जिम्मेदारी की भावना विकसित करते हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि जिस प्रकार बच्चों ने पेड़-पौधों, फूलों, फलों और सब्जियों का स्वरूप धारण कर प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया, उसी प्रकार वास्तविक जीवन में भी प्रकृति की रक्षा का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से जन्मदिन एवं विशेष अवसरों पर पौधे लगाने, उनकी देखभाल करने, पानी बचाने और आसपास स्वच्छता बनाए रखने का आह्वान किया।
सांस्कृतिक प्रभारी ज्ञानेश्वरी धीवर एवं वरिष्ठ शिक्षक जगदीश सोनी ने विद्यार्थियों को हरेली पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ का प्रमुख लोकपर्व है। हरियाली हमारी पहचान, किसान हमारा अभिमान, प्रकृति हमारे जीवन की आधारशिला और हरेली हमारी संस्कृति है। सावन में वर्षा के बाद खेत-खलिहान और धरती हरियाली से भर उठते हैं, तब किसान अच्छी फसल की कामना के साथ हरेली पर्व मनाते हैं। इस दिन कृषि औजारों की पूजा और पशुधन के प्रति सम्मान व्यक्त करने की परंपरा है।
उन्होंने कहा कि हरेली हमें धरती, पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों, किसानों और प्रकृति के सम्मान की सीख देती है। सभी को हरेली के अवसर पर एक पौधा लगाने और उसकी नियमित देखभाल करने के साथ छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति एवं परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प लेना चाहिए।
कार्यक्रम में जगदीश सोनी, आदित्य दुबे, ज्ञानेश्वरी धीवर, घनश्याम शर्मा, रत्नेश तिवारी, राजेंद्र साहू, भुनेश्वरी देवांगन, कल्पना माने, दिव्या सिन्हा, ममता तिवारी, ज्योति सोनी, रूमानी कुरैशी, अल्फिया शेख, मोनिका बांधे, भावना कहार, मनीषा अंकमवार, हेमलता देवांगन, प्रिया शर्मा, पायल नामदेव, मुक्ति तिवारी, दीपिका पटेल, हिमानी सोना, शीतल साहू, लता ढीमर, माया शिंदे, दुर्गेश साहू सहित विद्यालय के छात्र-छात्राएं एवं शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन ज्योति सोनी ने किया तथा आभार प्रदर्शन भुनेश्वरी देवांगन ने किया।



