धमतरी के चर्चों में प्रवेश संबंधी बोर्ड पर विवाद, अजय चंद्राकर बोले प्रार्थना के लिए आवेदन कैसा?

आवेदन की इस पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह से हास्यास्पद और गैर-जरूरी
रायपुर। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में इन दिनों प्रार्थना सभाओं और मतांतरण के मुद्दों को लेकर सियासी पारा चढ़ा हुआ है, और चर्चों के बाहर लगाए गए प्रवेश संबंधी सूचना बोर्डों ने इस विवाद को और हवा दे दी है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, जिला मुख्यालय के करीब आठ चर्चों के बाहर बोर्ड लगाकर उसमें प्रवेश से संबंधित कुछ निर्देश चस्पा किए गए हैं। दूसरी ओर, क्रिश्चियन फोरम ने स्पष्ट किया है कि इन बोर्डों को लगाने का मुख्य उद्देश्य चर्च परिसर के भीतर अनुशासन और सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखना है, क्योंकि पिछले कुछ समय से प्रार्थना सभाओं को लेकर लगातार विवाद की स्थितियां बन रही थीं। इस बीच, राज्य में लागू धर्म स्वातंत्र्य कानून के बाद धमतरी जिले में प्रार्थना सभाओं या धार्मिक आयोजनों में शामिल होने के लिए अनुमति हेतु भारी संख्या में आवेदन मिलने की बात भी सामने आ रही है, और उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक पिछले डेढ़ महीने में ही लगभग 1500 आवेदन प्राप्त हुए हैं।
इस पूरे घटनाक्रम और आवेदन प्रक्रिया पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कुरुद के विधायक अजय चंद्राकर ने तीखे सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आश्चर्य जताते हुए कहा कि यदि कोई सामान्य व्यक्ति किसी प्रार्थना सभा में शामिल होना चाहता है, तो उसके लिए पहले से आवेदन देने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है। विधायक चंद्राकर ने यह भी आरोप लगाया कि मिशनरियां कथित तौर पर कानूनी शिकंजे और जांच से बचने के लिए अब इस तरह के नए हथकंडे अपना रही हैं। उन्होंने कड़े शब्दों में सवाल किया कि क्या अब देश या प्रदेश में किसी आम नागरिक को चर्च, मंदिर या मजार जैसी किसी भी धार्मिक जगह पर जाने के लिए भी प्रशासन या संस्था को लिखित आवेदन देना पड़ेगा? उन्होंने प्रार्थना सभा में जाने के लिए आवेदन की इस पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह से हास्यास्पद और गैर-जरूरी करार दिया है, जिससे आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीति के और गरमाने के पूरे आसार नजर आ रहे हैं।



