छत्तीसगढ़

अशासकीय विद्यालय संचालक संघ की वृहद प्रदेश स्तरीय बैठक संपन्न, शिक्षा मंत्री से शीघ्र होगी प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात


रायपुर(प्रखर) छत्तीसगढ़ राज्य अशासकीय विद्यालय संचालक संघ की वृहद प्रदेश स्तरीय समीक्षा बैठक 28 फरवरी 2026, शनिवार को रायपुर स्थित होटल आदित्य में आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश के 15 जिलों से आए संगठन के पदाधिकारियों एवं प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक का शुभारंभ भारत माता एवं सरस्वती माता के तैलचित्र पर पूजन-अर्चन एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।
बैठक की अध्यक्षता संगठन के प्रदेश अध्यक्ष सुबोध राठी ने की। उन्होंने विगत एक वर्ष के दौरान संगठन द्वारा निजी विद्यालयों के हितों के संरक्षण एवं विभिन्न समस्याओं के निराकरण के लिए किए गए प्रयासों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आरटीई के तहत अध्ययनरत विद्यार्थियों की प्रतिपूर्ति राशि, जो पूर्व में दो-तीन वर्षों की देरी से मिलती थी, उसे इस वर्ष पहली बार दीपावली पूर्व भुगतान कराया गया। इसे संगठन की बड़ी उपलब्धि बताया गया।
प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी बताया कि आरटीई प्रतिपूर्ति राशि में वृद्धि के संबंध में शासन से सतत संवाद जारी है। संगठन की मांग है कि प्राथमिक स्तर पर 15,000 रुपये, माध्यमिक स्तर पर 20,000 रुपये तथा उच्च माध्यमिक स्तर पर 25,000 रुपये प्रतिपूर्ति राशि निर्धारित की जाए। उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई और शैक्षणिक खर्चों को देखते हुए वर्तमान राशि अपर्याप्त है।
शैक्षणिक गुणवत्ता के मुद्दे पर भी विस्तार से चर्चा की गई। संगठन ने बताया कि प्राथमिक एवं माध्यमिक स्तर पर बोर्ड परीक्षा की मांग वर्षों से की जा रही थी, जो अब पूरी हो चुकी है और कक्षा 5वीं एवं 8वीं बोर्ड घोषित हो गई है। संगठन ने इन परीक्षाओं में पास-फेल पद्धति लागू करने की मांग भी दोहराई, ताकि विद्यार्थियों में प्रतिस्पर्धात्मक भावना और शैक्षणिक अनुशासन विकसित हो सके।
बैठक में आरटीई प्रवेश प्रक्रिया से जुड़े प्रावधानों पर भी गंभीर विचार-विमर्श हुआ। संगठन ने मांग रखी कि आरटीई के तहत प्रवेश की प्रारंभिक कक्षा नर्सरी या केजी-1 ही होनी चाहिए तथा बाद के वर्षों में किसी अन्य कक्षा में सीधे प्रवेश की अनुमति न दी जाए। नई शिक्षा नीति के अनुरूप नर्सरी को प्रारंभिक कक्षा मानते हुए यही व्यवस्था लागू करने की बात कही गई। कक्षा पहली में सीधे प्रवेश से विद्यार्थियों के बीच प्रतिस्पर्धात्मक असंतुलन और ड्रॉपआउट की संभावना बढ़ने की बात भी रखी गई।
दूरी मानदंड (1 किमी एवं 3 किमी) में केवल मूल निवासियों को पात्रता देने तथा निवास प्रमाण पत्र के एफिडेविट को अमान्य करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। साथ ही, प्रवेश प्रक्रिया में ई-केवाईसी एवं आधार आईडी की अनिवार्यता सुनिश्चित करने की मांग की गई, ताकि फर्जी प्रवेश और बाद में उत्पन्न होने वाली ड्रॉपआउट की स्थिति रोकी जा सके।
माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा हाई एवं हायर सेकेंडरी बोर्ड परीक्षा शुल्क में प्रति दिवस 1000 रुपये विलंब शुल्क की वृद्धि को अनावश्यक बताते हुए तत्काल निरस्त करने की मांग की गई। संगठन ने सत्र 2022 के पूर्व की व्यवस्था लागू करने का आग्रह किया, जिसमें 15 दिवस का विलंब शुल्क 1000 रुपये निर्धारित था।
शासकीय विद्यालयों में टीसी (स्थानांतरण प्रमाण पत्र) संबंधी प्रक्रिया पर भी आपत्ति दर्ज की गई। संगठन ने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर पालकों को टीसी दिए बिना विद्यार्थियों का नाम सीधे अन्य शासकीय विद्यालयों में स्थानांतरित कर दिया जाता है, जो नियम विरुद्ध है। पालकों को अपनी इच्छानुसार किसी भी विद्यालय में बच्चों को प्रवेश दिलाने की स्वतंत्रता देने और बिना टीसी किसी भी विद्यालय में प्रवेश पर रोक लगाने की मांग की गई।
पाठ्य पुस्तक वितरण में विगत वर्ष हुई अनियमितताओं पर भी बैठक में चिंता व्यक्त की गई। बताया गया कि समय पर पुस्तकें उपलब्ध नहीं होने के कारण हजारों विद्यार्थियों को बिना पुस्तक के पढ़ाई करनी पड़ी। संगठन ने मांग की कि नए शैक्षणिक सत्र प्रारंभ होने से पूर्व संकुल स्तर पर सभी विद्यालयों को पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएं। यदि पाठ्य पुस्तक निगम समय पर वितरण में सक्षम न हो, तो खुले बाजार से पुस्तक क्रय की वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जाए।
बैठक में सचिव मनोज पाण्डेय, उपाध्यक्ष अजय कुमार दुबे, जितेंद्र तिवारी, विशंभर साहू, सहसचिव अक्षय कुमार दुबे, पारखदास मानिकपुरी, कोषाध्यक्ष विनोद कुमार पाण्डेय सहित विभिन्न जिलों के पदाधिकारी उपस्थित रहे। जांजगीर-चांपा जिले के सचिव आलोक शुक्ला ने कार्यक्रम का संचालन किया। धमतरी जिले से संरक्षक अशोक देशमुख, अध्यक्ष तरुण भांडे, कोषाध्यक्ष बसंत गजेंद्र, सचिव गजेंद्र पटेल सहित अनेक पदाधिकारी शामिल हुए।
बैठक के अंत में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि संगठन का प्रतिनिधिमंडल शीघ्र ही प्रदेश के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव से भेंट कर उपरोक्त सभी मांगों पर विस्तार से चर्चा करेगा। बैठक में रायपुर, धमतरी, बालोद, बलौदाबाजार, सारंगढ़, कोरबा, जांजगीर-चांपा, कोरिया, सूरजपुर, कवर्धा, बेमेतरा, मुंगेली, कांकेर और गरियाबंद सहित 15 जिलों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
संगठन ने स्पष्ट किया कि निजी विद्यालय शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग हैं और विद्यार्थियों के हित में शासन एवं संगठन के बीच सकारात्मक संवाद जारी रहना आवश्यक है।

Author Desk

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