छत्तीसगढ़

पॉक्सो मामले में शिक्षक की एफआईआर रद्द करने की याचिका हाईकोर्ट से खारिज

पॉक्सो मामले में शिक्षक की एफआईआर रद्द करने की याचिका हाईकोर्ट से खारिज

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सूरजपुर जिले के एक शासकीय विद्यालय में पदस्थ व्याख्याता की ओर से दायर एफआईआर निरस्तीकरण याचिका खारिज कर दी है। शिक्षक ने अपने खिलाफ पॉक्सो एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत दर्ज अपराध को रद्द करने की मांग की थी। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि यह प्रकरण एक नाबालिग छात्रा से जुड़े कथित यौन उत्पीडऩ का है और प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में जांच के प्रारंभिक चरण में न्यायालय हस्तक्षेप कर कानूनी प्रक्रिया को नहीं रोक सकता। मामले के अनुसार, सूरजपुर जिले के भटगांव स्थित शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में जीव विज्ञान के व्याख्याता हरकेश जायसवाल वर्ष 2008 से पदस्थ हैं। उनके खिलाफ भटगांव थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है।

झूठे आरोप लगाने का दावा
याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में कहा कि वह पिछले 17 वर्षों से सेवा दे रहे हैं तथा उनकी पत्नी भी उसी विद्यालय में व्याख्याता हैं। उनके अनुसार, सेवा अवधि के दौरान उनके खिलाफ कभी कोई शिकायत नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि विभागीय और व्यक्तिगत रंजिश के चलते एक सहकर्मी शिक्षक ने कुछ छात्रों और अभिभावकों को भडक़ाकर उनके खिलाफ झूठी शिकायत दर्ज कराई। घटना के समय वे अपने बच्चों की नीट परीक्षा की तैयारी के सिलसिले में कोटा (राजस्थान) गए हुए थे। याचिका में यह भी कहा गया कि कथित घटना 16 फरवरी 2026 की बताई गई है, जबकि इसकी शिकायत 6 अप्रैल 2026 को दर्ज कराई गई। लगभग 50 दिनों की देरी से दर्ज एफआईआर पर सवाल उठाते हुए याचिकाकर्ता ने मामले को संदिग्ध बताया। साथ ही यह भी कहा कि भरी कक्षा में इस प्रकार की घटना होना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।

शासन ने किया विरोध

राज्य शासन की ओर से डिप्टी गवर्नमेंट एडवोकेट सौम्या राय ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि मामला एक नाबालिग छात्रा से संबंधित गंभीर आरोपों का है। केवल एफआईआर दर्ज कराने में हुई देरी को आधार बनाकर मामले को खारिज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि आरोपों की सत्यता पुलिस की निष्पक्ष और विस्तृत जांच के बाद ही सामने आएगी। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिका खारिज करते हुए जांच प्रक्रिया जारी रखने की अनुमति दी।

Author Desk

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