रायपुर में आचार्य पदारोहण समारोह : 71 वर्षों बाद जैन परंपरा में बड़ा अध्याय, विनय कुशल मुनिजी आचार्य पदवी से अलंकृत

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित अन्य नेता हुए शामिल
रायपुर। राजधानी रायपुर में जैन समाज का आचार्य पदारोहण समारोह अत्यंत भव्य और आध्यात्मिक वातावरण में संपन्न हुआ। इस ऐतिहासिक अवसर पर देशभर से जैन समाज के श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचे और कार्यक्रम का साक्षी बने। समारोह में लगभग 71 वर्षों बाद किसी जैन मुनि को आचार्य पदवी प्रदान की गई, जिसे जैन समाज के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण माना जा रहा है। विनय कुशल मुनिजी महाराज साहब को आचार्य पदवी से अलंकृत किया गया। इस अवसर पर पूरा परिसर भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उत्साह से सराबोर नजर आया।
आचार्य पद जैन परंपरा में सर्वोच्च आध्यात्मिक पदों में से एक माना जाता है, और इस पद पर आसीन संत समाज का मार्गदर्शन करते हैं तथा धर्म और संयम के मार्ग को आगे बढ़ाते हैं। इस ऐतिहासिक क्षण को जैन समाज की आध्यात्मिक विरासत के पुनर्जागरण के रूप में भी देखा जा रहा है। जैन समाज के संतों और आयोजकों ने इस अवसर को समाज की परंपरा और संस्कृति के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण बताया। कार्यक्रम के दौरान भक्ति संगीत, धार्मिक अनुष्ठान और प्रवचनों के माध्यम से वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक बना रहा। इस भव्य समारोह में देशभर से आए अनुयायियों की भारी उपस्थिति रही। वहीं इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, सांसद बृजमोहन अग्रवाल और विधायक राजेश मुणोत सहित कई गणमान्य अतिथि भी उपस्थित रहे।
जैन समाज के लिए एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर
राजधानी रायपुर में सकल जैन संघ छत्तीसगढ़ और अखिल भारतीय खरतरगच्छ श्वेतांबर महासंघ के तत्वावधान में 16 से 18 जून तक बूढ़ा तालाब रोड स्थित इंडोर स्टेडियम में तीन दिवसीय आचार्य पदारोहण, सहस्त्रावधान एवं तपस्या महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। यह आयोजन जैन समाज के लिए एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर रहा। इस भव्य आयोजन से पूर्व मई माह में दादाबाड़ी में पत्रिका लेखन कार्यक्रम तथा गुरु भगवंतों का चतुर्विध संघ मंगल प्रवेश भी संपन्न हुआ था, जिसने पूरे माहौल को धार्मिक और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। इस अवसर पर पहली बार छत्तीसगढ़ में किसी जैन मुनि को आचार्य पदवी प्रदान की गई, जिसे जैन समाज के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। मोहनलालजी म.सा. संप्रदाय की परंपरा में 71 वर्षों बाद हुए इस आचार्य पदारोहण को लेकर समाज में विशेष उत्साह और श्रद्धा का वातावरण देखने को मिला। तीन दिवसीय महोत्सव के दौरान विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए, जिनमें अभिषेक, महापूजन, संवेदना कार्यक्रम और आचार्य पदारोहण विधि प्रमुख रहे। इसके साथ ही वृहद शांतिधारा अभिषेक, सूरीमंत्र महापूजन और आदिनाथ पंच कल्याणक पूजा का आयोजन भी किया गया। कार्यक्रम के दौरान आयोजित परमात्मा भक्ति संध्या में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और पूरा परिसर भक्ति, श्रद्धा एवं आध्यात्मिक उत्साह से गूंज उठा।
इस पूरे आयोजन को जैन समाज की परंपरा, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत के पुनर्जागरण के रूप में देखा जा रहा है, जिसने रायपुर को धार्मिक आयोजन के केंद्र के रूप में एक विशेष पहचान दिलाई है। महोत्सव में तप साधना भी आकर्षण का केंद्र रहा। तप चक्रवर्ती विराग मुनिजी म.सा. 141 उपवास की साधना पूर्ण कर चुके हैं। आयोजन समिति के संरक्षक विधायक राजेश मूणत, अध्यक्ष सुनील पारख, महासचिव अशोक कांकरिया, अशोक बराडिया और कोषाध्यक्ष बसंत झाबक सहित कई पदाधिकारी तैयारियों में जुटे रहे।



