गोंडी संस्कृति, शिक्षा, वैद्यकीय ज्ञान, भाषा, आर्थिक उद्यमिता एवं व्यापार पर महासभा की राष्ट्रीय कार्यशाला संपन्न

गोंडी संस्कृति, शिक्षा, वैद्यकीय ज्ञान, भाषा, आर्थिक उद्यमिता एवं व्यापार पर महासभा की राष्ट्रीय कार्यशाला संपन्न
धमतरी – अखिल भारतीय गोंडवाना गोंड महासभा द्वारा आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला 19 जुलाई को आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, सेक्टर-24, नया रायपुर (छत्तीसगढ़) में संपन्न हुई। कार्यशाला में मध्यप्रदेश, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, महाराष्ट्र, झारखंड, ओडिशा, बिहार, उत्तर प्रदेश, नई दिल्ली तथा छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से आए सामाजिक प्रमुखों, बुद्धिजीवियों और विषय विशेषज्ञों ने समाज की रीति-नीति, संस्कृति, शिक्षा, वैद्यकीय ज्ञान, भाषा, आर्थिक उद्यमिता एवं व्यापार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रामविचार नेताम, मंत्री आदिम जाति विकास, कृषि विकास एवं किसान कल्याण, जैव प्रौद्योगिकी, मत्स्य पालन एवं पशुधन विकास, छत्तीसगढ़ शासन थे। अध्यक्षता शिशुपाल शोरी, राष्ट्रीय अध्यक्ष (सेवानिवृत्त आईएएस) एवं पूर्व विधायक कांकेर ने की। अति विशिष्ट अतिथि के रूप में फग्गन सिंह कुलस्ते, सांसद मंडला एवं अध्यक्ष, पार्लियामेंट्री कमेटी अनुसूचित जाति-जनजाति विभाग भारत सरकार, रवि नारायण नाइक, प्रदेश अध्यक्ष अखिल भारतीय गोंडवाना गोंड महासभा ओडिशा एवं कैबिनेट मंत्री ग्रामीण विकास, पंचायती राज और पेयजल, ओडिशा सरकार तथा देवेंद्र प्रताप सिंह, राज्यसभा सांसद छत्तीसगढ़ उपस्थित रहे।
विशिष्ट अतिथियों में लता उसेन्डी (विधायक), कमल मर्सकोले (विधायक बरघाट, मध्यप्रदेश), नीलकंठ टेकाम (विधायक), भूलन सिंह मरावी (विधायक), प्रणव मरपच्ची (विधायक गौरेला-पेंड्रा-मरवाही), रूपसिंह मंडावी (अध्यक्ष अनुसूचित जनजाति आयोग छत्तीसगढ़), विकास मरकाम (अध्यक्ष स्थानीय पादप बोर्ड छत्तीसगढ़), भगत सिंह नेताम (पूर्व विधायक एवं सदस्य, म.प्र. अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग), सोयम बापू राव (पूर्व सांसद एवं प्रदेश अध्यक्ष गोंड समाज तेलंगाना), लक्की राजाराव (पूर्व विधायक आंध्रप्रदेश), चंदा लिंगैया डोरा (पूर्व विधायक, पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय संयोजक, राष्ट्रीय आदिवासी समन्वय समिति तेलंगाना), कमलभान सिंह (पूर्व सांसद), अनूप नाग (पूर्व विधायक अंतागढ़), रमेश चंद्र साय (पूर्व विधायक ओडिशा), गुरुचरण नायक (पूर्व विधायक मनोहरपुर, झारखंड), लक्ष्मी ध्रुव (पूर्व विधायक सिहावा), राजाराम तोड़ेंम (पूर्व विधायक एवं पूर्व उपनेता प्रतिपक्ष मध्यप्रदेश) तथा पहलवान सिंह मरावी (पूर्व विधायक मरवाही) शामिल रहे।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के उभरते कलाकार, निर्माता, निर्देशक एवं अभिनेता अमलेश नागेश को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन महासभा के राष्ट्रीय सचिव आर.एन. ध्रुव ने किया।
महासभा ने ओडिशा के शैक्षिक पाठ्यक्रम में गोंड समाज को “मूर्ख” लिखे जाने की कड़ी निंदा करते हुए प्रस्ताव पारित किया तथा दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग करते हुए महामहिम राष्ट्रपति को पत्र भेजने का निर्णय लिया। इसके अलावा आदिवासी उद्यमियों को 10 करोड़ रुपये तक के ऋण पर गारंटी में छूट, अनुसूचित जनजाति वर्ग के प्रतिभावान विद्यार्थियों के लिए विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति, गैर-आदिवासी से विवाह करने वाली समाज की युवतियों की पैतृक संपत्ति में पिता का नाम दर्ज कराने की पहल, सभी राज्यों में गौर समाज को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने, तथा आदिवासी क्षेत्रों में स्थापित उद्योगों में विस्थापन की स्थिति में स्थानीय आदिवासियों को भागीदारी अथवा शेयरधारक बनाए जाने जैसी महत्वपूर्ण मांगों पर भी प्रस्ताव पारित किए गए। महासभा ने प्रत्येक माह देश के किसी न किसी राज्य में बैठक आयोजित करने का भी निर्णय लिया।
कार्यक्रम को पांच सत्रों में विभाजित किया गया। प्रथम सत्र में जनजातीय कला एवं शिल्प, आर्थिक उद्यमिता तथा व्यापार पर प्रो. श्रीकांत गोंड (पश्चिम बंगाल), डॉ. नारवेन केशव टेकाम (छत्तीसगढ़) एवं प्रो. के.एम. मैत्री (कर्नाटक) ने विचार रखे।
द्वितीय सत्र में गोंडवाना का इतिहास, भाषा, शिक्षा, संस्कृति, पारंपरिक रीति-रिवाज एवं साहित्य सृजन पर चर्चा हुई। इसमें हिरासन उइके, राष्ट्रीय अध्यक्ष महिला प्रभाग (बालाघाट), रघुवीर सिंह मार्को, बी.एल. कोर्राम, राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिल गोंडी साहित्य परिषद भारत, के.पी. शाह (पूर्व न्यायाधीश, कोलकाता) तथा बजरंग मांझी (ओडिशा) ने अपने विचार रखे।
तृतीय सत्र में पेसा कानून, फॉरेस्ट राइट एक्ट तथा जनजातीय समाज के संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण एवं संवर्धन पर चर्चा हुई। रूपसिंह मंडावी ने महत्वपूर्ण सुझाव दिए, जबकि विकास मरकाम ने पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान पर आधारित उपयोगी जानकारी साझा की। भोजन अवकाश के दौरान महासभा की स्थापना से अब तक की गतिविधियों पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन किया गया।
चौथे सत्र में जन मन योजना एवं धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना की जानकारी प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक नीलकंठ टेकाम ने दी। पंचम सत्र में संगठन को मजबूत बनाने, विस्तार करने तथा निष्क्रिय सदस्यों के स्थान पर नए सदस्यों के मनोनयन का प्रस्ताव पारित किया गया।
अतिथियों एवं सामाजिक प्रमुखों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष खामसिंह मांझी (ओडिशा), राष्ट्रीय महासचिव लोकेंद्र सिंह कोमर्रा, सोनऊ राम नेताम (छत्तीसगढ़), दिवाकर पेंदाम (महाराष्ट्र), हेमंत धुर्वा (ओडिशा), कोषाध्यक्ष हिम्मत सिंह आर्मो, अशोक गोंड (बिहार), राष्ट्रीय महासचिव महिला प्रभाग कांति नाग (छत्तीसगढ़), वेदवती मंडावी, कमला नेताम, स्वर्ण वरकड़े (महाराष्ट्र), अमरेंद्र प्रताप गोंड (उत्तर प्रदेश), चंदन मर्सकोले (मध्यप्रदेश), प्रदेश संरक्षक बी.पी.एस. नेताम (सेवानिवृत्त आईएएस), प्रदेश उपाध्यक्ष चंद्रिका प्रसाद ठाकुर, अंबिका प्रसाद शांडिल्य, बलदाऊ सिंह ध्रुव, प्रांतीय कोषाध्यक्ष फूलसिंह नेताम, भुनेश्वर सिदार, प्रदेश अध्यक्ष महिला प्रभाग बसंता ठाकुर, प्रदेश अध्यक्ष युवा प्रभाग चेमसिंह मरकाम, प्रदेश महासचिव युवा प्रभाग मिथिलेश कुंजाम, मीडिया प्रभारी रोहित कुमार मरकाम, एम.आर. ठाकुर तथा कुंदन सिंह ठाकुर विशेष रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रस्तुत गोंडी पारंपरिक नृत्य ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का मन मोह लिया।



