पाकिस्तान बॉर्डर के पास आसमान सीज : भारतीय वायुसेना का जैसलमेर-बाड़मेर सेक्टर में 17 दिवसीय मेगा युद्धाभ्यास

वायुसेना द्वारा जारी नोटम के बाद पड़ोसी मुल्क ने बुलाई आपात बैठक
नई दिल्ली/जैसलमेर। भारतीय वायुसेना पश्चिमी सीमा पर एक बड़े और व्यापक युद्ध अभ्यास की तैयारी में जुट गई है, जिसके चलते पड़ोसी देश पाकिस्तान में हडक़ंप मच गया है। वायुसेना द्वारा जारी किए गए नोटिस (नोटम) के बाद पाकिस्तान ने सीमा पर निगरानी (सर्विलांस) अचानक बढ़ा दी है और देश के वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों की एक आपात बैठक भी बुलाई गई है।
जैसलमेर-बाड़मेर और जोधपुर सेक्टर में गरजेगा आसमान
सामने आई जानकारी के अनुसार, भारतीय वायुसेना का यह बहुप्रतीक्षित 17 दिवसीय युद्धाभ्यास आगामी 21 सितंबर से 7 अक्टूबर तक चलेगा। यह सामरिक अभ्यास जैसलमेर, बाड़मेर, फलोदी और जोधपुर के रणनीतिक क्षेत्रों में स्थित हवाई क्षेत्र में होगा, जिसे 40,000 फीट की ऊंचाई तक रिजर्व किया गया है। इसके अलावा, एनएएल -बीकानेर के पास के एयरस्पेस को भी बंद कर दिया गया है। रक्षा जानकारों का मानना है कि इस अभ्यास का समय जोधपुर में प्रस्तावित बहुराष्ट्रीय वायु अभ्यास ‘तरंग शक्ति 2026’ (26 सितंबर से 12 अक्टूबर) से भी मेल खाता है, जिसमें कई मित्र देशों की वायुसेनाएं हिस्सा ले सकती हैं।
पाकिस्तान की बढ़ी धडक़नें, बुलाई इमरजेंसी मीटिंग
भारतीय वायुसेना के इस मेगा एक्सरसाइज और उसके मद्देनजर जारी नोटम ने पाकिस्तानी रक्षा मंत्रालय की नींद उड़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस युद्धाभ्यास पर गहरी नजर रखने के लिए इस्लामाबाद में उच्च स्तरीय आपात बैठक बुलाई गई है, तथा इस पूरे घटनाक्रम को पाकिस्तान के ‘चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज’ के कार्यालय के संज्ञान में भी लाया गया है। एहतियात के तौर पर भारत-पाक सीमा पर पाकिस्तानी सेना ने अपनी टोह और सर्विलांस गतिविधियों को तेज कर दिया है।
क्या है इस युद्धाभ्यास का मुख्य उद्देश्य?
भारतीय वायुसेना के इस युद्धाभ्यास का मुख्य मकसद अपनी ऑपरेशनल प्रक्रियाओं, रणनीतिक तालमेल, त्वरित तैनाती और युद्धक विमानों की मारक क्षमता को परखना है। इस युद्धाभ्यास में वायुसेना के अत्याधुनिक फाइटर जेट और फ्रंटलाइन एयरक्राफ्ट विभिन्न जटिल ऑपरेशनों को अंजाम देंगे।
क्या होता है नोटम?
युद्ध, युद्धाभ्यास या किसी अन्य सैन्य व रणनीतिक गतिविधि के दौरान संबंधित क्षेत्र के एयरस्पेस के लिए नोटम (नोटिस टू एयरमैन) जारी किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य उस निर्धारित समय और क्षेत्र में नागरिक विमानों की आवाजाही को प्रतिबंधित कर सैन्य एवं नागरिक उड़ानों की सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित करना होता है। मिसाइल परीक्षणों या रॉकेट लॉन्चिंग के समय भी इसी व्यवस्था का पालन किया जाता है।



