सीएसएमसीएल भ्रष्टाचार मामला : अनवर ढेबर को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत, रहना होगा छत्तीसगढ़ से बाहर

रायपुर। सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (सीएसएमसीएल) से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में अनवर ढेबर को अंतरिम ज़मानत दे दी है। हालांकि, जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने अभियोजन पक्ष की उस मांग को मान लिया जिसमें कहा गया था कि जमानत के दौरान ढेबर को छत्तीसगढ़ से बाहर रहना चाहिए, क्योंकि गवाहों को प्रभावित करने की आशंका थी। कोर्ट ने ढेबर को यह भी निर्देश दिया है कि वे अधिकारियों को अपने रहने की जगह (राज्य के बाहर) का पता और अपना कॉन्टैक्ट नंबर बताएं।
चीफ़ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने ढेबर को ज़मानत की शर्त के तौर पर छत्तीसगढ़ से बाहर रहने और ट्रायल के दौरान कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया। ढेबर की ओर से सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी पेश हुए, जबकि छत्तीसगढ़ की ओर से सीनियर एडवोकेट महेश जेठमलानी पेश हुए।
हाई कोर्ट ने खारिज कर दी थी याचिका
इससे पहले छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने 13 मई को ढेबर की ज़मानत अजऱ्ी खारिज कर दी थी और कहा था कि आरोपों से राज्य सरकार के कॉर्पोरेशन में गहरी जड़ें जमा चुके और व्यवस्थित भ्रष्टाचार नेटवर्क का संकेत मिलता है। हाई कोर्ट ने माना कि पब्लिक फंड से जुड़े आर्थिक अपराधों को ज़्यादा गंभीरता से लिया जाना चाहिए। हाई कोर्ट ने कहा था कि गहरी साजि़शों और बड़े पैमाने पर जनता के पैसे के नुकसान वाले आर्थिक अपराध गंभीर अपराध हैं जो पूरे देश की अर्थव्यवस्था पर असर डालते हैं।
भ्रष्टाचार के मामले में दर्ज हुए थे केस
कोर्ट ने गौर किया कि जांच के दौरान इक_ा किए गए सबूतों से प्रथम दृष्टया पता चलता है कि मैनपावर सप्लाई एजेंसियों को अपने वैध बिलों और बकाया राशि की मंज़ूरी पाने के लिए कथित तौर पर अवैध कमीशन देने के लिए मजबूर किया जाता था। यह मामला इकोनॉमिक ऑफेंस विंग/एंटी-करप्शन ब्यूरो ने इंडियन पीनल कोड और प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के प्रावधानों के तहत दर्ज किया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, सीएसएमसीएल के भीतर कथित तौर पर एक व्यवस्थित तंत्र काम करता था जिसमें मैनपावर एजेंसियों को बिल मंज़ूरी के लिए कमीशन देने के लिए मजबूर किया जाता था और इससे मिलने वाली रकम कथित तौर पर बिचौलियों के ज़रिए पहुंचाई जाती थी।



