किसानों के संकट में सरकार तत्काल मुआवजा दे : कविता योगेश बाबर
फसल क्षति का सर्वे कराकर बीमा राशि दिलाने, ऋण माफी और एग्रीस्टेक सूची में छूटे किसानों के नाम जोड़ने की उठाई मांग

किसानों के संकट में सरकार तत्काल मुआवजा दे : कविता योगेश बाबर
फसल क्षति का सर्वे कराकर बीमा राशि दिलाने, ऋण माफी और एग्रीस्टेक सूची में छूटे किसानों के नाम जोड़ने की उठाई मांग
धमतरी। चक्रवाती तूफान अर्नब के कारण किसानों की फसलों को हुए भारी नुकसान को लेकर कविता योगेश बाबर ने केंद्र और राज्य सरकार से किसानों को तत्काल राहत एवं उचित मुआवजा देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि किसान पहले से ही आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं और अब प्राकृतिक आपदा ने उनकी कमर तोड़कर रख दी है। ऐसे संकट के समय सरकार को अन्नदाताओं की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए त्वरित राहत प्रदान करनी चाहिए।
कविता बाबर ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार और राज्य की साय सरकार की किसान नीतियों के चलते किसान लगातार परेशानियों का सामना कर रहे हैं। पिछले तीन वर्षों में केंद्र सरकार द्वारा धान के समर्थन मूल्य में मात्र 380 रुपये की वृद्धि की गई है। राज्य सरकार को चाहिए कि वह अपनी चुनावी घोषणा के अनुरूप 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से किसानों को धान का भुगतान सुनिश्चित करे।
उन्होंने कहा कि चक्रवाती तूफान से किसानों की फसलों को भारी क्षति पहुंची है। शासन-प्रशासन को तत्काल प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे कराना चाहिए और नुकसान का उचित आकलन कराकर किसानों को फसल बीमा योजना का लाभ दिलाना चाहिए, ताकि आर्थिक संकट से जूझ रहे किसानों को राहत मिल सके। इसके साथ ही सहकारी समितियों एवं बैंकों से किसानों द्वारा लिए गए कृषि ऋण को माफ करने की घोषणा भी तत्काल की जानी चाहिए।
श्रीमती बाबर ने एग्रीस्टेक पंजीयन को लेकर भी सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि पिछले वर्ष जिन किसानों ने एग्रीस्टेक के तहत पंजीयन कराया था, उनमें से कई किसानों के नाम और कृषि रकबे वर्तमान सूची से गायब कर दिए गए हैं। इसके कारण किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने में परेशानी हो सकती है। सरकार को इस मामले में तत्काल सुधार करते हुए छूटे हुए किसानों के नाम और उनके रकबे को पुनः सूची में शामिल करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसान पूरे साल कड़ी मेहनत, लगन और उम्मीद के साथ अपनी फसल तैयार करता है। खेती में अपनी पूंजी और श्रम लगाने के बाद जब प्राकृतिक आपदा से फसल बर्बाद हो जाती है, तो उसके सामने परिवार के भरण-पोषण और भविष्य की चिंता खड़ी हो जाती है। आज किसान अपने भविष्य को लेकर चिंतित और असमंजस की स्थिति में है।
कविता योगेश बाबर ने सरकार से मांग की कि त्योहारी सीजन में किसानों को आर्थिक संकट से उबारने के लिए तत्काल विशेष राहत पैकेज घोषित किया जाए। फसल क्षति का निष्पक्ष सर्वे, उचित मुआवजा, फसल बीमा राशि का भुगतान, कृषि ऋण माफी तथा एग्रीस्टेक सूची में छूटे किसानों के नाम जोड़ने की कार्रवाई प्राथमिकता से की जाए। उन्होंने कहा कि अन्नदाताओं को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि इस कठिन समय में ठोस राहत और सहयोग की आवश्यकता है।



