अन्नदाता संकट में, सरकार जश्न में मस्त: तारिणी चंद्राकर ने साय सरकार पर साधा निशाना
बेमौसम बारिश से फसलें बर्बाद, पटवारियों की हड़ताल से सर्वे और एग्रीस्टेक का काम ठप; किसानों की अनदेखी पर कांग्रेस ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

अन्नदाता संकट में, सरकार जश्न में मस्त: तारिणी चंद्राकर ने साय सरकार पर साधा निशाना
बेमौसम बारिश से फसलें बर्बाद, पटवारियों की हड़ताल से सर्वे और एग्रीस्टेक का काम ठप; किसानों की अनदेखी पर कांग्रेस ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
धमतरी। प्रदेश में चक्रवाती तूफान और बेमौसम बारिश से किसानों की फसलें बर्बाद होने के बीच सियासत भी गरमा गई है। जिला कांग्रेस कमेटी धमतरी की अध्यक्ष तारिणी चंद्राकर ने प्रदेश की विष्णुदेव साय सरकार पर किसानों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि एक ओर अन्नदाता अपनी बर्बाद फसलों को देखकर परेशान है, वहीं दूसरी ओर सरकार और प्रशासन राजनीतिक आयोजनों एवं राज्योत्सव के जश्न में व्यस्त हैं।
तारिणी चंद्राकर ने कहा कि धमतरी जिले सहित पूरे प्रदेश में किसान प्राकृतिक आपदा से परेशान हैं। खेतों में पानी भरने और बेमौसम बारिश से फसलों को भारी नुकसान हुआ है, लेकिन प्रभावित किसानों को राहत पहुंचाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नजर नहीं आ रही है। पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के चलते फसल नुकसान का सर्वे और एग्रीस्टेक सत्यापन का काम प्रभावित हो रहा है। इससे किसानों को धान बेचने के लिए आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने में परेशानी उठानी पड़ रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय प्रशासनिक अमला भाजपा की ‘अराजकता हटाओ रैली’ और अन्य राजनीतिक कार्यक्रमों की व्यवस्थाओं में लगा हुआ है। अधिकारियों को प्रभावित किसानों के खेतों तक पहुंचकर नुकसान का जायजा लेने की फुर्सत नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता राजनीतिक आयोजनों के बजाय संकट से जूझ रहे किसानों को राहत पहुंचाना होना चाहिए।
राज्योत्सव के जश्न पर भी उठाए सवाल
कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने राज्योत्सव के आयोजन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदेश का किसान अपनी मेहनत की फसल बर्बाद होने से चिंतित है, वहीं दूसरी ओर सरकार उत्सव और सांस्कृतिक आयोजनों में व्यस्त है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और मंत्रिमंडल के सदस्य राज्योत्सव के मंच पर कार्यक्रमों का आनंद ले रहे हैं, जबकि अन्नदाता अपनी समस्याओं के समाधान के लिए भटक रहा है। उन्होंने इसे किसानों के प्रति सरकार की असंवेदनशीलता बताया।
एग्रीस्टेक व्यवस्था से किसानों की बढ़ी परेशानी
तारिणी चंद्राकर ने कहा कि एग्रीस्टेक की नई व्यवस्था और पटवारियों की हड़ताल के कारण किसानों का सत्यापन कार्य अटक गया है। यदि समय पर यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती है तो किसानों को समर्थन मूल्य पर धान बेचने में परेशानी हो सकती है। एक तरफ बारिश से धान की गुणवत्ता प्रभावित हुई है, दूसरी तरफ तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनों ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
सरकार से की तत्काल राहत की मांग
उन्होंने सरकार से मांग की कि पटवारियों से तत्काल संवाद कर उनकी हड़ताल समाप्त कराई जाए, प्रशासनिक अधिकारियों को वीआईपी ड्यूटी से मुक्त कर प्रभावित क्षेत्रों में फसल नुकसान का सर्वे कराया जाए तथा एग्रीस्टेक सत्यापन में आ रही समस्याओं के समाधान के लिए वैकल्पिक व्यवस्था लागू की जाए, ताकि कोई भी किसान धान बेचने से वंचित न रहे।
तारिणी चंद्राकर ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने उत्सव और राजनीतिक आयोजनों से ध्यान हटाकर किसानों को तत्काल राहत नहीं दी, तो कांग्रेस पार्टी किसानों के साथ मिलकर सरकार के खिलाफ उग्र आंदोलन करेगी।


