छत्तीसगढ़

पुरुषोत्तम की सर्वथा उपयोगिता है शिव एवं गोपाल सहस्त्रनाम, व्रत, पूजन के सत्संग एवं तीर्थ हेतु : कथावाचक झम्मन शास्त्री

रायपुर। कथा वाचन के प्रथम दिवस में शक्ति छत्तीसगढ़ विप्र महिला समाज ब्राह्मण पारा रायपुर ने बढ़-चढ़कर अपनी भूमिका निभाई। अध्यक्ष प्रीति शुक्ला, संरक्षिका कुसुम शर्मा एवं महिला मंडल के अन्य महिलाओं ने सर्वप्रथम आचार्य जी का स्वागत किया तदुपरांत मानस कथा का प्रारंभ हुआ जिसमें कथावाचक आचार्य झम्मन शास्त्री ने विप्र महिला मंडल की तारीफ की और अपने श्री वचनों से प्रवचन कर भक्तजनों को अनुग्रहित किया। जिसमें आचार्य द्वारा मलमास क्या है, पुरुषोत्तम मास का महत्व क्या है, बताया गया जिसमें उन्होंने रुद्राभिषेक गोपाल सहस्त्रनाम, शिव सहस्त्रनाम, इत्यादि पूजन आराधना का विशेष महत्व समझाया। पंडित झम्मन शास्त्री जी लगभग 27 साल से ब्राह्मण पारा में कथा वाचन करते आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि सत्संग के अवसर भी भगवान की कृपा से ही प्राप्त होते हैं यहां तक कि भगवान श्रीराम स्वयं भी कथा सुना करते थे। सत्संग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए शास्त्री जी ने बताया कि संस्कृति प्रधान समाज के लिए कथा का आयोजन होना आवश्यक है क्योंकि भौतिक विकास से संस्कृति का हास देखा जा रहा है। परिवारों में एक दूसरे से दूरी बढ़ रही है।


उन्होंने कहा कि सत्संग से लौकिक और पारलौकिक उत्कर्ष प्राप्त होता है। कथा सुनना दुर्लभ कार्य है, पुण्य कार्य है तभी व्यक्ति सत्संग सुनता है। मानसिक शांति, आत्मिक शांति मिलती है। प्रेम भाव बढ़ता है। सत्संग चेतना निर्माण के लिए माध्यम है। चार वेद, चार उपवेद, 18 पुराण, 18 उपपुराण, फिर रामायण, गीता, रामचरित मानस, शिवमानस कथा, पुरुषोत्तम मास पुण्यार्चन का मास है।
साथ ही व्रत का महत्व बताते हुए उन्होंने समझाया कि व्रत किस प्रकार हमारी आंतरिक शुद्धि करता है। उपस्थित अभिभावकों को आचार्य झम्मन शास्त्री जी द्वारा प्रेरित किया गया कि वह अपने बच्चों को सूर्योदय में उठकर सूर्य को अर्घ देने के संस्कार सिखाएं। शिव मानस कथा महोत्सव के आयोजन में प्रातः 9:00 बजे से महिला मंडल ने सर्वप्रथम रुद्राभिषेक का आयोजन किया दोपहर में सब ने खूब भजन कीर्तन किए एवं शिव मानस कथा एवं आचार्य जी के प्रवचन के उपरांत आरती एवं प्रसाद वितरण द्वारा प्रथम दिवस मानस कथा महोत्सव की समाप्ति हुई।

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