छत्तीसगढ़

शंकराचार्य का अपमान जिला कांग्रेस ने जताया विरोध :- भाजपा सरकार पर साधा निशाना


जिला अध्यक्ष तारिणी चंद्राकर ने बताया सनातन धर्म का अपमान

धमतरी (प्रखर)प्रयागराज माघ मेले के दौरान ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ कथित दुर्व्यवहार और उन्हें नोटिस जारी किए जाने के बाद राजनीतिक विवाद गहरा गया है। जिला कांग्रेस कमेटी ने इस घटना पर कड़ी आपत्ति जताई है। पार्टी ने इसे हिंदू धर्म और उसकी परंपराओं पर सीधा हमला बताया है। जिला अध्यक्ष तारिणी चंद्राकर ने कहा की भाजपा सरकार ने आधी रात को नोटिस भेजकर न केवल एक प्रतिष्ठित धर्मगुरु का अपमान किया, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों का भी उल्लंघन किया है। आगे कहा कि ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य को नोटिस भेजकर यह कहना कि सरकार उन्हें शंकराचार्य नहीं मानती, सत्ता के घमंड की पराकाष्ठा है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इस मुद्दे पर चुप्पी को पूरा देश देख रहा है और उन्हें इसके लिए माफ नहीं करेगी।  विधायक ओंकार साहू ने कहा की शाही स्नान केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि करोड़ों सनातनियों की आस्था, परंपरा और पहचान से जुड़ा विषय है। प्रयागराज का माघ मेला और मौनी अमावस्या का शाही स्नान सदियों से सनातन परंपरा का केंद्र रहा है, जहां संत, महात्मा और अखाड़े अपनी निर्धारित मर्यादाओं के अनुसार स्नान करते हैं। ओंकार साहू ने सवाल उठाया कि अगर इतिहास में किसी विदेशी शासन ने भी इस परंपरा को नहीं छेड़ा, तो आज लोकतांत्रिक सरकार को किसने अधिकार दिया कि वह संतों को रोकने लगे। सिहावा विधायक अंबिका मरकाम ने कहा की जिस शंकराचार्य को सनातन परंपरा में सर्वोच्च सम्मान प्राप्त है, उनके शिष्यों के साथ मारपीट और दुर्व्यवहार किया जाना यह दिखाता है कि बीजेपी सरकार संत समाज को किस नजर से देखती है. इस घटनाक्रम के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंका जता चुके हैं. पिछले 36 घंटे से अनशन पर बैठे हुए हैं. इसके बावजूद सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस संवाद या समाधान की कोशिश नहीं की गई है. एक ओर भाजपा धर्म और आस्था की राजनीति करती है, दूसरी ओर जब एक शंकराचार्य अनशन पर बैठते हैं, तो सरकार बातचीत तक को तैयार नहीं होती।

Author Desk

Related Articles

Back to top button