छत्तीसगढ़

आजीविका मिशन से बदली तस्वीर: चर्रा की योगेश्वरी देवांगन बनीं महिला सशक्तिकरण की प्रेरणा


मार्केटिंग के लिए सोशल मीडिया का लिया सहारा


धमतरी (प्रखर)। दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस योजना के माध्यम से महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर उन्हें स्वरोजगार, प्रशिक्षण, वित्तीय सहयोग और बाजार से जोड़ने का अवसर मिल रहा है। इसके सकारात्मक परिणाम अब गांवों में दिखाई देने लगे हैं, जहां कई महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर समाज के लिए प्रेरणा बन रही हैं।
धमतरी जिले के विकासखंड कुरूद के ग्राम चर्रा की योगेश्वरी देवांगन भी ऐसी ही एक महिला हैं, जिन्होंने आजीविका मिशन से जुड़कर अपने जीवन की दिशा बदल दी। स्वयं सहायता समूह से जुड़ने से पहले उनका परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था और आजीविका के लिए कृषि व मजदूरी पर निर्भर था। इससे बच्चों की पढ़ाई और परिवार की जरूरतों को पूरा करना कठिन हो जाता था। लेकिन समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में बड़ा परिवर्तन आया।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से उन्होंने बैंक से ऋण प्राप्त किया और पशुपालन विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र तथा आर-सेटी से मुर्गीपालन का प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने अपने गांव में देशी मुर्गी फार्म की शुरुआत की। शुरुआत में कई चुनौतियां और सामाजिक दबाव सामने आए, लेकिन उनकी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी।
आज योगेश्वरी देवांगन का मुर्गी फार्म सफल उद्यम बन चुका है। उनके फार्म में लगभग सात प्रकार की मुर्गियों की नस्लें, बटेर, बत्तख, गिनी फाउल और टर्की पाले जा रहे हैं। इसके साथ ही अंडों से चूजे निकालने की मशीन भी लगाई गई है। उनके फार्म में तैयार होने वाले चूजे और मुर्गियां अब विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंच रहे हैं।
उन्होंने बताया कि शुरुआत में यह समझ नहीं आ रहा था कि उत्पादों को बाजार तक कैसे पहुंचाया जाए। इसके बाद उन्होंने मार्केटिंग के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया। “देवांगन देशी मुर्गी फार्म चर्रा कुरूद” नाम से यूट्यूब चैनल भी संचालित कर रही हैं, जिसके माध्यम से वे अपने उत्पादों का प्रचार-प्रसार करने के साथ-साथ अन्य महिलाओं और युवाओं को भी स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रही हैं।
योगेश्वरी देवांगन का उद्देश्य है कि उनके समूह की अधिक से अधिक महिलाएं भी स्वरोजगार से जुड़कर आत्मनिर्भर बनें। इसके लिए वे समूह की महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें भी मुर्गीपालन जैसे व्यवसाय से जोड़ने का प्रयास कर रही हैं। भविष्य में वे खरगोश पालन जैसे नए उद्यम की शुरुआत करने की भी योजना बना रही हैं।
यह सफलता कहानी दर्शाती है कि सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी अपनी मेहनत और लगन से नई पहचान बना सकती हैं और समाज में सकारात्मक बदलाव की मिसाल बन सकती हैं।

Author Desk

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