राष्ट्रीय

पश्चिम बंगाल में भाजपा की भगवा क्रांति, तृणमूल कांग्रेस की सत्ता से बेदखली

असम में हिमंता, केरल में यूडीएफ, तमिलनाडु में टीवीके और पुडुचेरी में एनडीए का दबदबा

कोलकाता। देश पांच राज्यों के चुनावी नतीजे अब साफ हो रहे हैं। पश्चिम बंगाल की राजनीति में करीब 15 साल बाद बदलाव की आंधी चली है। रुझानों में भारतीय जनता पार्टी की भगवा क्रांति में ममता के टीएमसी का किला ढहता नजर आ रहा है। भाजपा बंगाल में पहली बार सत्ता के करीब पहुंचती नजर आ रही है, जहां वह 190 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। अगर ये रुझान नतीजों में बदलते हैं, तो यह बंगाल की सियासत में एक ऐतिहासिक मोड़ साबित होगा। पहली बार सत्ता की दहलीज पर पहुंचती भाजपा के कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह है, और कई जगहों पर जश्न का माहौल देखने को मिल रहा है—ढोल-नगाड़ों और रंगों के बीच जीत की उम्मीदें खुलकर सामने आ रही हैं। वहीँ असम में हिमंता सरकार की वापसी हो रही है। इसके साथ ही केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा को बढ़त है। तमिलनाडु में सुपरस्टार विजय ने सबको चौंका दिया है, डीएमके को सत्ता से बहार का रास्ता दिखाया गया है। पुडुचेरी की बात करें तो यहाँ भाजपा गठबंधन सरकार बनाते नजर आ रहा है।

असम में बड़ी जीत के साथ फिर से हिमंता सरकार

असम विधानसभा चुनाव के लिए 9 अप्रैल को मतदान हुआ था। राज्य की सभी 126 सीटों पर हुए इस मतदान में 85 प्रतिशत से अधिक वोटिंग दर्ज की गई। इस चुनाव में कुल 722 उम्मीदवार मैदान में थे। असम में सरकार बनाने के लिए किसी भी दल या गठबंधन को 64 सीटों का आंकड़ा हासिल करना जरूरी है। इस बार मुकाबला मुख्य रूप से दो प्रमुख गठबंधनों के बीच है। एक ओर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी का गठबंधन है, जो लगातार तीसरी बार जीत दर्ज करने की कोशिश में है। भाजपा के साथ असम गण परिषद और यूनाइटेड पीपल्स पार्टी लिबरल जैसे क्षेत्रीय दल शामिल हैं। वहीं दूसरी ओर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व वाला ‘असम सम्मिलित मोर्चा’ है, जिसमें छह दल शामिल हैं। अगर पिछले विधानसभा चुनाव (2021) की बात करें, तो भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन ने 75 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की थी। इसमें भाजपा ने 60 सीटें जीती थीं, जबकि उसके सहयोगी दलों—असम गण परिषद को 9 और यूनाइटेड पीपल्स पार्टी लिबरल को 6 सीटें मिली थीं।

तमिलनाडु : टीवीके की आंधी में उड़ीं डीएमके और एआईडीएमके

चेन्नई। तमिलनाडु में हुए विधानसभा चुनाव के लिए सुपरस्टार थलपति विजय की नई पार्टी टीवीके ने कमाल कर दिया है। इस नई पार्टी ने पुरानी और स्थापित पार्टी डीएमके और एआईडीएमके को भी पीछे छोड़ दिया है। सामने आये रुझान के मुताबिक टीवीके+ 105 सीटों पर, एआईडीएमके+ 71 सीटों पर और डीएमके+ 57 सीटों पर आगे चल रही थी। तमिलनाडु में 234 सीटों पर विधानसभा चुनाव हुए थे।

उल्लेखनीय है कि टीवीके (तमिलगा वेट्री कजगम) पार्टी की स्थापना 2 फरवरी 2024 को हुई थी। इसके संस्थापक साउथ के प्रसिद्ध अभिनेता थलपति विजय हैं। विजय ने सिर्फ एक राजनीतिक पार्टी नहीं बनाई बल्कि एक राजनीतिक आंदोलन शुरू किया, जिसका मकसद तमिलनाडु के सभी वर्गों के कल्याण के लिए काम करना और अपने लोगों की सामूहिक प्रगति और कल्याण के लिए समर्पित एक शक्ति बनना था।

केरल कांग्रेस कार्यालय में जश्न, देश से लेफ्ट पूरी तरह साफ

केरल में यूडीएफ ने जश्न शुरू कर दिया हैं। कांग्रेस कार्यालय में केक भी काटे जा रहे हैं। केरल के अभी तक के रुझानों में कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) को बढ़त मिलती दिख रही है। इसके साथ ही आजादी के बाद पहली बार ऐसा हो रहा है कि देश के किसी भी राज्य में अब लेफ्ट की सरकार नहीं रहेगी। केरल आखिरी राज्य था, जहां लेफ्ट की सरकार बची हुई थी, हालांकि अब केरल भी लेफ्ट के हाथ से छूटता नजर आ रहा है। बता दें इससे पहले भी त्रिपुरा और बंगाल से लेफ्ट साफ हो चुका है। बता दें कि केरल के अलावा पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में भी लेफ्ट की सरकार पहले रह चुकी है, लेकिन इन दोनों जगहों पर भी लेफ्ट का सफाया हो चुका है। साल 2011 में पश्चिम बंगाल में लेफ्ट की सरकार एक बार बाहर हुई तो फिर दोबारा वापसी नहीं कर सकी। वहीं त्रिपुरा में भी साल 2018 में लेफ्ट की सरकार को जनता ने सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया। अब केरल में भी लेफ्ट की सरकार गिरती हुई नजर आ रही है। केरल में यूडीएफ की जीत के साथ ही पूरे देश से लेफ्ट का सफाया हो जाएगा। इसका मतलब है कि देश के किसी भी राज्य में लेफ्ट की सरकार नहीं बचेगी।

ममता बोलीं कार्यकर्ताओं पर हो रहा अत्याचार

पश्चिम बंगाल की सत्ता से तृणमूल कांग्रेस की बेदखली वाले रुझानों के बाद पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया पर अपील जारी की है। अपनी पार्टी के चुनावी एजेंट्स और उम्मीदवारों से उन्होंने कहा कि वे किसी भी हाल में मतगणना स्थल न छोड़ें। उन्होंने कहा कि कल ही मैंने कहा था कि पहले दो तीन दौर में वे भाजपा को आगे और हमें पीछे दिखाएंगे, पर आखिर में हम ही जीतेंगे, इसलिए हताश न हों। उन्होंने कहा कि कई जगहों पर दो तीन दौर की गिनती होने के बाद मतगणना रोक दी गई है, जिसका कोई औचित्य नही है। केंद्रीय बलों का जोर दिखाकर तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं पर अत्याचार किया जा रहा है। कार्यालय तोड़े जा रहे हैं। एसआईआर में वे पहले ही गड़बड़ी कर चुके हैं। चुनाव आयोग अपनी मनमानी से काम कर रहा है। हमारी पुलिस बल को भी केंद्रीय बलों के अधीन काम करना पड़ रहा है।

 

भाजपा के 5 वादों से बंगाल विजय

बीजेपी ने अपने 5 वादों के जरिए बंगाल में अपनी रणनीति को अच्छी तरह जमीन पर उतारने में कामयाबी हासिल की। बीजेपी के इन वादों की काट तृणमूल कांग्रेस ढूंढ़ ही नहीं पाई और पिछले 15 सालों से सत्ता में होना भी उसके खिलाफ गया।

1. बीजेपी ने चुनाव प्रचार के दौरान बार-बार घुसपैठ के मुद्दे को उठाया

पार्टी का कहना था कि राज्य में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी और रोहिंग्या लोगों की पहचान कर उन्हें बाहर किया जाएगा। इस मुद्दे को राष्ट्रीय सुरक्षा और स्थानीय निवासियों के अधिकारों से जोडक़र प्रस्तुत किया गया। खासतौर पर सीमावर्ती क्षेत्रों में यह वादा लोगों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बना रहा।

2. जनकल्याणकारी योजनाओं का वादा
भाजपा ने आम लोगों के लिए कई नई जनकल्याणकारी योजनाओं का वादा किया। इसमें गरीबों, किसानों और महिलाओं के लिए विशेष योजनाएं शामिल थीं। पार्टी ने दावा किया कि केंद्र सरकार की योजनाओं को राज्य में सही तरीके से लागू किया जाएगा। साथ ही पार्टी ने ऐलान किया था कि अगर सूबे में बीजेपी की सरकार बनती है तो मई महीने से राज्य की हर महिला के बैंक खाते में 3000 रुपए भेजे जाएंगे।

3. कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करने का वादा
कानून-व्यवस्था का मुद्दा भी बीजेपी के प्रचार का अहम हिस्सा रहा। पार्टी ने आरोप लगाया कि राज्य में अपराध और हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं। आरजी कर मेडिकल कॉलेज के ‘रेप ऐंड मर्डर केस’ ने पश्चिम बंगाल की छवि न सिर्फ पूरे देश में खराब की, बल्कि सूबे में भी इसे लेकर भारी नाराजगी देखने को मिली। साथ ही अमित शाह ने तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की ‘गुंडागर्दी’ पर भी लगाम कसने और उन्हें ‘उल्टा लटकाकर सीधा करने’ की भी बात कही। इस मुद्दे ने खासकर शहरी और मध्यम वर्ग के मतदाताओं के बीच असर डाला।

4. भ्रष्टाचार को खत्म करने का वादा
भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई का वादा बीजेपी ने जोर-शोर से किया। पार्टी ने कहा कि सरकारी योजनाओं में हो रही गड़बडिय़ों और घोटालों पर रोक लगाई जाएगी। बीजेपी के नेताओं ने लगातार पारदर्शिता बढ़ाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने का भरोसा दिया गया।

5. उद्योग-धंधों को वापस लाने का वादा
बीजेपी ने राज्य में उद्योग और निवेश को बढ़ावा देने का भी वादा किया। पार्टी का कहना था कि बंगाल में बंद हो चुके उद्योगों को फिर से शुरू किया जाएगा और नए निवेशकों को आकर्षित किया जाएगा। बीजेपी नेताओं ने बार-बार कहा कि उद्योग धंधे आने से सूबे में नौजवानों को रोजगार मिलेगा और बेरोजगारी में कमी आएगी।

Author Desk

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