अनिल टूटेजा आज हो सकते हैं रिहा

अनिल टूटेजा आज हो सकते हैं रिहा
रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित डीएमएफ घोटाले में पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टूटेजा को पहले उच्च न्यायालय से राहत नहीं मिली थी, लेकिन अब उच्चतम न्यायालय ने उन्हें सशर्त जमानत दे दी है। यह मामला खनन प्रभावित जिलों में विकास कार्यों के लिए आवंटित डीएमएफ फंड के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है। टुटेजा करीब 2 साल 28 दिनों तक जेल में रहने के बाद मंगलवार देर शाम रिहा हो सकते हैं।
उच्च न्यायालय की एकलपीठ ने अनिल टूटेजा की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने केस डायरी, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, व्हाट्सएप चैट और सह-आरोपियों के बयानों के आधार पर उनकी भूमिका को गंभीर माना। उच्च न्यायालय ने इसे गंभीर आर्थिक अपराध बताते हुए कहा था कि प्रभावशाली पद पर रहने के कारण गवाहों को प्रभावित करने और जांच में बाधा पहुंचाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि विचारण में देरी मात्र जमानत का आधार नहीं बन सकती, विशेषकर तब जब मामला सार्वजनिक धन के कथित दुरुपयोग और संगठित भ्रष्टाचार से जुड़ा हो।
घोटाले के आरोप और उच्च न्यायालय की टिप्पणियां
जांच एजेंसियों के अनुसार, डीएमएफ विकास कार्यों के लिए था। निविदाओं के आवंटन में कथित अनियमितताएं हुईं। आरोप है कि स्मार्ट कक्षा, लघु विज्ञान प्रयोगशाला, जल शोधन प्रणाली और फर्नीचर आपूर्ति जैसे कार्यों में चुनिंदा फर्मों को लाभ पहुंचाया गया। जांच में कमीशन के बदले काम दिलाने और करोड़ों रुपये की अवैध वसूली का दावा किया गया। राज्य पक्ष ने बताया कि टूटेजा ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर निजी पक्षों को अनुचित लाभ दिलाया। उच्च न्यायालय के आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति बागची की पीठ ने अनिल टूटेजा को सशर्त जमानत दी। अदालत ने कहा कि आरोप गंभीर हैं, पर उनका परीक्षण विचारण में होगा। पीठ ने निर्देश दिया कि टूटेजा छत्तीसगढ़ से बाहर रहेंगे, एक सप्ताह में अपने ठहरने का विवरण भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो तथा संबंधित थाना क्षेत्र को देंगे और हर सुनवाई में उपस्थित रहेंगे। जमानत बंधपत्र स्थानीय अदालत की संतुष्टि के अनुसार दाखिल किया जाएगा।



