वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच आरबीआई का संतुलित दांव, रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर बरकरार

वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच आरबीआई का संतुलित दांव, रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर बरकरार
नई दिल्ली। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने आज 5 जून को अपनी मौद्रिक नीति का ऐलान कर दिया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अगुवाई वाली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने आम जनता को बड़ी राहत देते हुए इस बार भी ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। इस फैसले का सीधा मतलब यह है कि आपके होम और कार लोन की ईएमआई फिलहाल स्थिर रहेगी।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ??ने कहा कि पिछले कुछ महीनों से दुनिया भर की अर्थव्यवस्था में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिली है। मुख्य व्यापारिक रास्तों और सप्लाई चेन में रुकावटें आई हैं, बाजार में अस्थिरता बढ़ी है और कंपनियां भी कामकाज को लेकर काफी सतर्क हैं। लेकिन मैं शुरुआत में ही इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि वैश्विक स्तर पर मची इस उथल-पुथल के बीच, भारतीय अर्थव्यवस्था के बुनियादी पहलू पिछली बार की तुलना में बहुत ज्यादा मजबूत और बेहतर हैं। हमें पूरा भरोसा है कि हम इन बाहरी झटकों का सामना बेहद कम नुकसान के साथ करने में पूरी तरह सक्षम हैं।
वैश्विक अनिश्चितताओं से बढ़ी चिंता
संजय मल्होत्रा ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पर अनिश्चितता के बादल बने हुए हैं। ऊर्जा की कीमतों में तेज बढ़ोतरी और ग्लोबल सप्लाई चेन में आ रही रुकावटें आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर रही हैं। ऐसी स्थिति में दुनिया की बड़ी और विकसित अर्थव्यवस्थाओं के केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को बढ़ाने का कदम उठा सकते हैं।
शेयर बाजार में उत्साह, लेकिन बॉन्ड मार्केट सतर्क
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (्रढ्ढ) को लेकर बनी सकारात्मकता के दम पर शेयर बाजार तो तेजी से ऊपर भाग रहे हैं, लेकिन महंगाई के दोबारा बढऩे के डर और भारी कर्ज के बोझ की चिंताओं के कारण सरकारी बॉन्ड मार्केट में मंदी का माहौल है। इसके अलावा, दुनिया भर में बढ़े जोखिम और सुरक्षित निवेश (जैसे सोना या डॉलर) की मांग बढऩे के कारण फॉरेक्स मार्केट में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। इसका असर कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं की करेंसी पर भी दिख रहा है, जिनमें कमजोरी का रुख देखने को मिल रहा है।
पिछले साल मिली थी बड़ी राहत
आपको बता दें कि साल 2025 में रिजर्व बैंक ने आम आदमी को बड़ी राहत देते हुए ब्याज दरों में कुल 125 बेसिस पॉइंट की कटौती की थी। लेकिन अब वैश्विक हालात बदल चुके हैं। फरवरी 2026 और अप्रैल 2026 की बैठकों में भी ब्याज दरों को स्थिर रखा गया था।
शेयर बाजार में उछाल
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की मौद्रिक नीति समिति के ब्याज दरों पर आने वाले फैसले से ठीक पहले शेयर बाजार में जबरदस्त रौनक देखने को मिल रही है। कल की सुस्ती और उतार-चढ़ाव को पीछे छोड़ते हुए शुक्रवार, 5 जून की सुबह भारतीय शेयर बाजार ने शानदार बढ़त के साथ तूफानी शुरुआत की। बाजार खुलते ही सेंसेक्स करीब 300 अंक उछल गया और निफ्टी 23,500 के बेहद करीब पहुंच गया। आरबीआई पॉलिसी के ऐलान से ठीक पहले आए इस उछाल ने बाजार के सेंटिमेंट को पूरी तरह से तेजी के जोन में ला दिया है। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 302.58 अंक की मजबूती के साथ 74,662.59 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, निफ्टी भी 86.50 अंक की बढ़त लेकर 23,503.05 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। बाजार का शुरुआती ट्रेंड भी काफी मजबूत रहा, जहां करीब 223 शेयरों में तेजी देखी गई, जबकि केवल 95 शेयर लाल निशान पर खुले और 8 शेयरों की स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ।
अचानक विकास दर घटने और महंगाई बढऩे का डर क्यों?
इस आर्थिक दबाव का मुख्य कारण देश की सीमा के बाहर की स्थितियां हैं। आरबीआई के अनुसार, सबसे बड़ा खतरा पश्चिम एशिया में लंबे समय से चल रहा संघर्ष है, जिसके कारण वैश्विक व्यापार मार्ग और आपूर्ति शृंखलाएं बाधित हुई हैं। अप्रैल और मई के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें औसतन लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर पर रहीं, जिसने उत्पादन की लागत बढ़ा दी है। अल नीनो की स्थिति और कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून की आशंका कृषि उत्पादन को प्रभावित कर सकती है, जिससे खाद्य महंगाई का खतरा बढ़ रहा है।
महंगाई को लेकर बढ़ी चिंता
आरबीआई ने महंगाई के मोर्चे पर भी सतर्कता दिखाई है। केंद्रीय बैंक ने एफवाय27 के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया है। खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतें, पश्चिम एशिया संकट के कारण ऊर्जा लागत में उछाल और मौसम से जुड़े जोखिम महंगाई बढ़ाने वाले प्रमुख कारण बताए गए हैं। आरबीआई का अनुमान है कि तीसरी तिमाही में महंगाई 5.9 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, जो उसके निर्धारित लक्ष्य के ऊपरी स्तर के करीब है। इसके अलावा, एल नीनो और सामान्य से कमजोर मानसून की आशंका को भी केंद्रीय बैंक ने प्रमुख जोखिमों में शामिल किया है। यदि बारिश कम होती है, तो खाने-पीने वाली चीजों का उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिससे खाद्य महंगाई और बढ़ सकती है।



