आरक्षण विरोधियों पर राजद्रोह की कार्रवाई की मांग, रामदास आठवले बोले- आरक्षण संवैधानिक अधिकार

नई दिल्ली। आरक्षण को लेकर देश में जारी बहस के बीच केंद्रीय मंत्री एवं रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) के प्रमुख रामदास आठवले ने आरक्षण का विरोध करने वालों और इसे खत्म करने की मांग करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि आरक्षण संविधान प्रदत्त अधिकार है और इसका विरोध संविधान का विरोध है। आठवले ने रविवार को जारी एक बयान में कहा कि आरक्षण के खिलाफ होने वाले प्रदर्शनों और सोशल मीडिया पर आरक्षण व्यवस्था को खत्म करने या उसमें बदलाव की मांग को लेकर चल रहे अभियानों ने इस मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है। उन्होंने कहा कि आरक्षण खत्म करने की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती।
आरक्षण विरोधियों पर राजद्रोह की कार्रवाई की मांग
रामदास आठवले ने कहा कि आरक्षण का विरोध संविधान का विरोध है। उन्होंने आरक्षण विरोधी रुख अपनाने वालों के खिलाफ राजद्रोह के तहत कड़ी कार्रवाई किए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि आरक्षण को समाप्त नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह संविधान द्वारा दिया गया अधिकार है।
चिराग पासवान ने भी जताया विरोध
जातिगत आरक्षण को लेकर चल रही बहस के बीच केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी आरक्षण को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने अपना पुराना वीडियो साझा करते हुए कहा कि उन्होंने 10 फरवरी 2020 को संसद में भी स्पष्ट किया था कि आरक्षण किसी को दी गई खैरात नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकार है। चिराग पासवान ने कहा कि उनकी और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की सोच इस मुद्दे पर स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि आरक्षण समाप्त करने की बात तो दूर, आरक्षण की समीक्षा भी उन्हें स्वीकार्य नहीं है।
जंतर-मंतर पर आरक्षण को लेकर प्रदर्शन
दिल्ली के जंतर-मंतर पर यूजीसी रिफॉर्म में आरक्षण से जुड़े प्रावधानों के विरोध में प्रदर्शन भी हुआ। प्रदर्शनकारियों ने नए यूजीसी सुधारों में आरक्षण संबंधी प्रावधानों पर आपत्ति जताते हुए सरकार और यूजीसी से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग जंतर-मंतर पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की। प्रदर्शन को देखते हुए इलाके में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रही।



