झीरम घाटी नक्सली हमले पर आज नहीं आया फैसला, एनआईए कोर्ट ने 5 सितंबर तक फिर सुरक्षित रखा निर्णय

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले से जुड़े मामले में सोमवार, 31 अगस्त को भी फैसला नहीं आ सका। रायपुर स्थित एनआईए की विशेष अदालत में आज निर्णय सुनाया जाना था, लेकिन अदालत ने एक बार फिर फैसला सुरक्षित रखते हुए अब 5 सितंबर को निर्णय सुनाने की तारीख तय की है। करीब 13 साल से इस मामले के फैसले का इंतजार कर रहे पीडि़त परिवारों और प्रदेशवासियों की निगाहें अब 5 सितंबर पर टिक गई हैं। लंबे समय से चल रही न्यायिक प्रक्रिया के बाद अंतिम दलीलें पूरी हो चुकी हैं और अदालत अब उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अपना फैसला सुनाएगी।
101 गवाहों के बयान, कई दस्तावेजी साक्ष्य पेश
झीरम घाटी मामले में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ अभियोजन की कार्रवाई चली। सुनवाई के दौरान इनमें से एक आरोपी की मृत्यु हो चुकी है, जबकि अन्य आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में सुनवाई जारी रही। मामले में अभियोजन पक्ष ने अपने पक्ष को मजबूत करने के लिए बड़ी संख्या में साक्ष्य अदालत के सामने रखे। सुनवाई के दौरान कुल 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। इसके अलावा विभिन्न दस्तावेजी साक्ष्य भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए। गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर दोनों पक्षों की अंतिम दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रखा था। 31 अगस्त को निर्णय आने की उम्मीद थी, लेकिन अब अदालत ने इसे आगे बढ़ाते हुए 5 सितंबर की तारीख निर्धारित की है।
5 सितंबर को तय होगा आरोपियों का भविष्य
अब सभी की नजरें 5 सितंबर को आने वाले फैसले पर हैं। अदालत उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपियों के संबंध में क्या निर्णय देती है, यह उस दिन स्पष्ट होगा। मामले में कितने आरोपी दोषी ठहराए जाते हैं और कितनों को राहत मिलती है, इस पर पीडि़त परिवारों के साथ-साथ पूरे प्रदेश की नजर बनी हुई है।
25 मई 2013 को हुआ था देश को झकझोर देने वाला हमला
गौरतलब है कि 25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले की झीरम घाटी में नक्सलियों ने कांग्रेस नेताओं के काफिले पर बड़ा हमला किया था। इस हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, पूर्व मंत्री महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत कांग्रेस के कई नेताओं और सुरक्षा जवानों की मौत हुई थी। झीरम घाटी हत्याकांड को छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े और संवेदनशील नक्सली हमलों में गिना जाता है। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। घटना के करीब 13 साल बाद अदालत के फैसले को मामले की आगे की कानूनी दिशा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब 31 अगस्त के बजाय 5 सितंबर को एनआईए की विशेष अदालत के फैसले का इंतजार रहेगा।



