छत्तीसगढ़

उत्पीडऩ मामले में रतनलाल डांगी की मुश्किलें बढ़ीं, हाईकोर्ट ने जांच अधिकारियों से मांगा जवाब

बिलासपुर। निलंबित आईपीएस अधिकारी रतनलाल डांगी के खिलाफ महिला उत्पीडऩ से जुड़े मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस विभाग की ओर से जवाब प्रस्तुत नहीं किए जाने पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई। कोर्ट ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर शपथपत्र के साथ जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समयावधि में जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया, तो ऑफिसर-इन-चार्ज को अगली सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा।

याचिका के अनुसार, पीडि़ता योगा टीचर हैं। उनका आरोप है कि तत्कालीन आईजी रतनलाल डांगी ने वीडियो कॉल के जरिए उनसे योग सीखना शुरू किया और बाद में व्हाट्सऐप पर अश्लील संदेश भेजने लगे। पीडि़ता ने वीडियो कॉल के दौरान अश्लील व्यवहार और विरोध करने पर धमकी देने का भी आरोप लगाया है। उनका दावा है कि उन्हें और उनके परिवार को नुकसान पहुंचाने तथा पति के खिलाफ झूठा केस दर्ज कराने की धमकी दी गई।

पीडि़ता ने 15 अक्टूबर 2025 को डीजीपी के समक्ष शिकायत की थी, जिसके बाद आईपीएस आनंद छाबड़ा और मिलना कुर्रे को जांच अधिकारी बनाया गया। कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए उन्होंने अप्रैल 2026 में केंद्र और राज्य के गृह विभाग के अधिकारियों से भी शिकायत की और बाद में अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय व ऋषभदेव साहू के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिकाकर्ता ने जांच अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही डांगी से जुड़ी कथित अवैध संपत्तियों की जांच नहीं होने का आरोप लगाया है।

12 अगस्त 2026 की सुनवाई में हाईकोर्ट ने मामले को संवेदनशील मानते हुए जवाब मांगा था। 2 सितंबर को पुलिस विभाग की ओर से जवाब पेश नहीं होने पर कोर्ट ने नाराजगी जताई और वरिष्ठ अधिकारियों को एक सप्ताह में शपथपत्र के साथ जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए। जवाब नहीं आने पर ऑफिसर-इन-चार्ज को 29 सितंबर को कोर्ट में उपस्थित होना होगा। अगली सुनवाई भी इसी दिन होगी।

Author Desk

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