₹2000 से ऊपर UPI भुगतान पर 0.4% कमीशन के दावे पर मनोज साक्षी ने साधा निशाना
बोले—डिजिटल इंडिया के नाम पर जनता और छोटे व्यापारियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डालने की तैयारी

₹2000 से ऊपर UPI भुगतान पर 0.4% कमीशन के दावे पर मनोज साक्षी ने साधा निशाना
बोले—डिजिटल इंडिया के नाम पर जनता और छोटे व्यापारियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डालने की तैयारी
धमतरी/नगरी। ₹2000 से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किए जाने के दावे को लेकर आदिवासी कांग्रेस के जिला अध्यक्ष मनोज साक्षी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने इसे आम जनता, छोटे व्यापारियों और मध्यम वर्ग के हितों के खिलाफ बताते हुए फैसले को वापस लेने की मांग की।
मनोज साक्षी ने कहा कि डिजिटल इंडिया के तहत देशभर में यूपीआई और कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा दिया गया। लोगों को डिजिटल भुगतान के लिए प्रोत्साहित करने के बाद अब इसी व्यवस्था पर शुल्क लगाने की तैयारी की जा रही है, जिसका असर व्यापारियों के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है।
उन्होंने दावा किया कि सरकार की ओर से यह कहा जा रहा है कि प्रस्तावित शुल्क केवल ₹2000 से अधिक के भुगतान पर लागू होगा और अधिकांश उपभोक्ता इससे प्रभावित नहीं होंगे। साक्षी के अनुसार, यूपीआई लेनदेन की कुल राशि में ₹2000 से अधिक के भुगतान का हिस्सा काफी बड़ा है। ऐसे में इसका प्रभाव केवल बड़े कारोबार तक सीमित नहीं रहेगा।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि ₹3000 के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR लगता है तो ₹12, ₹50 हजार के भुगतान पर ₹200 और ₹75 हजार के भुगतान पर ₹300 तक की राशि शुल्क के रूप में जा सकती है। उनके मुताबिक, व्यापारी यदि इस अतिरिक्त लागत को ग्राहकों से वसूलते हैं तो इसका असर वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर पड़ सकता है।
मनोज साक्षी ने कहा कि महंगाई के दौर में आम उपभोक्ता और छोटे व्यापारी पहले से ही आर्थिक दबाव झेल रहे हैं। ऐसे समय में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क का प्रावधान उनकी परेशानी बढ़ा सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करने और प्रस्तावित व्यवस्था को वापस लेने की मांग की।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी व्यापारियों और आम नागरिकों के हितों से जुड़े इस मुद्दे को लेकर आवाज उठाएगी तथा जरूरत पड़ने पर सड़क से लेकर सदन तक विरोध दर्ज कराया जाएगा।



