छत्तीसगढ़ की अस्मिता, संस्कृति, स्वाभिमान और गौरव का महापर्व है राज्य स्थापना दिवस – पंडित राजेश शर्मा
अटल बिहारी वाजपेयी जी की दूरदर्शी सोच और ऐतिहासिक संकल्प से साकार हुआ छत्तीसगढ़ राज्य का सपना, अटल जी के सपनों का समृद्ध एवं विकसित छत्तीसगढ़ बनाना हम सभी का संकल्प हो – पंडित राजेश शर्मा
छत्तीसगढ़ की अस्मिता, संस्कृति, स्वाभिमान और गौरव का महापर्व है राज्य स्थापना दिवस – पंडित राजेश शर्मा
अटल बिहारी वाजपेयी जी की दूरदर्शी सोच और ऐतिहासिक संकल्प से साकार हुआ छत्तीसगढ़ राज्य का सपना, अटल जी के सपनों का समृद्ध एवं विकसित छत्तीसगढ़ बनाना हम सभी का संकल्प हो – पंडित राजेश शर्मा
अपनी माटी, अपनी संस्कृति, अपनी पहचान और अपने गौरव को नमन करते हुए प्रदेशवासियों को दी राज्य स्थापना दिवस की हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएं
धमतरी। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के पावन एवं गौरवशाली अवसर पर प्रदेश भाजपा कार्यसमिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य, धर्मप्रेमी एवं समाजसेवी पंडित राजेश शर्मा ने समस्त प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। उन्होंने कहा कि 1 नवंबर का दिन केवल एक राज्य के स्थापना दिवस का अवसर नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की अस्मिता, स्वाभिमान, सांस्कृतिक विरासत, जनभावनाओं और वर्षों के संघर्ष एवं संकल्प की गौरवशाली परिणति का प्रतीक है। यह दिन प्रत्येक छत्तीसगढ़िया के लिए अपनी माटी के प्रति प्रेम, अपनी पहचान पर गर्व और अपने प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य के लिए संकल्प लेने का विशेष अवसर है।
पंडित राजेश शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण के इतिहास में पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी का योगदान स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। अटल जी ने छत्तीसगढ़ की जनता की भावनाओं, आकांक्षाओं और पृथक राज्य की वर्षों पुरानी मांग को समझते हुए अपने दूरदर्शी नेतृत्व एवं दृढ़ इच्छाशक्ति से इस सपने को साकार किया। उनके नेतृत्व में 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ एक स्वतंत्र राज्य के रूप में अस्तित्व में आया। यह केवल प्रशासनिक पुनर्गठन नहीं था, बल्कि छत्तीसगढ़ की जनता के आत्मसम्मान, स्वाभिमान और अपनी अलग पहचान को मिला ऐतिहासिक सम्मान था। अटल जी का छत्तीसगढ़ के प्रति स्नेह और उनके द्वारा देखा गया विकसित एवं समृद्ध प्रदेश का सपना आज भी हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है।
उन्होंने कहा कि श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने तीन नए राज्यों के निर्माण के माध्यम से देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनभावनाओं का सम्मान करने का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया। छत्तीसगढ़ की जनता उनके इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए सदैव कृतज्ञ रहेगी। आज राज्य स्थापना दिवस पर हम सभी को अटल जी के योगदान का स्मरण करते हुए उनके सपनों के अनुरूप एक सशक्त, समृद्ध, आत्मनिर्भर और विकसित छत्तीसगढ़ बनाने का संकल्प लेना चाहिए।
पंडित शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ केवल भौगोलिक सीमाओं में बसा एक प्रदेश नहीं, बल्कि यह अपनी विशिष्ट संस्कृति, परंपराओं, लोकजीवन और सहज सरलता से पहचानी जाने वाली एक समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर है। यहां की पावन धरती भगवान श्रीराम के वनगमन की स्मृतियों से जुड़ी है। माता कौशल्या की जन्मभूमि, प्रभु श्रीराम के ननिहाल और छत्तीसगढ़ महतारी की पावन भूमि होने का गौरव हमारे प्रदेश को विशिष्ट पहचान प्रदान करता है। यहां के वन, नदियां, पर्वत, खनिज संपदा, प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक स्थल प्रदेश की अमूल्य धरोहर हैं।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति इसकी आत्मा है। पंथी, राउत नाचा, सुआ नृत्य, करमा, लोकगीत, लोककलाएं, हरेली, तीजा, पोला, छेरछेरा और बस्तर दशहरा जैसे पर्व एवं परंपराएं हमारी सांस्कृतिक पहचान को जीवंत बनाए रखते हैं। यहां के लोगों का सरल स्वभाव, आपसी प्रेम, भाईचारा, सद्भाव और अतिथि सत्कार की भावना छत्तीसगढ़ को देश के अन्य राज्यों से अलग पहचान दिलाती है। हमारी यही सांस्कृतिक विरासत हमारी सबसे बड़ी पूंजी और आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य धरोहर है।
उन्होंने आगे कहा कि प्रदेश की वास्तविक शक्ति यहां के अन्नदाता किसान, मेहनतकश मजदूर, प्रतिभाशाली युवा, मातृशक्ति, आदिवासी समाज और आम नागरिक हैं। इनके परिश्रम, संघर्ष और समर्पण से ही छत्तीसगढ़ निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहा है। कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, व्यापार, पर्यटन, खेल, तकनीक और आधारभूत सुविधाओं के क्षेत्र में प्रदेश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है। विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के पर्याप्त अवसर मिलें, किसानों के जीवन में खुशहाली आए और मातृशक्ति आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त बने, यही विकसित छत्तीसगढ़ की वास्तविक पहचान होगी।
पंडित राजेश शर्मा ने कहा कि आज राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर हमें अपने गौरवशाली अतीत का स्मरण करने के साथ-साथ भविष्य की चुनौतियों और संभावनाओं पर भी विचार करना चाहिए। हमारा संकल्प ऐसा छत्तीसगढ़ बनाने का होना चाहिए, जहां शिक्षा और स्वास्थ्य की बेहतर सुविधाएं हों, किसानों को उनकी मेहनत का उचित सम्मान मिले, युवाओं को अपने ही प्रदेश में आगे बढ़ने के अवसर मिलें, महिलाओं को सम्मान और सुरक्षा मिले तथा गरीब, वंचित एवं जरूरतमंद परिवारों के जीवन में खुशहाली आए।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ महतारी की पावन धरती पर सुख, शांति, समृद्धि, सामाजिक सद्भाव और भाईचारा सदैव बना रहे। हमारी आने वाली पीढ़ियां अपनी भाषा, बोली, संस्कृति, संस्कार और परंपराओं पर गर्व करें तथा आधुनिक विकास के साथ अपनी जड़ों से जुड़ी रहें। यही हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि होगी।
अंत में पंडित राजेश शर्मा ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि राज्य स्थापना दिवस के इस गौरवशाली अवसर पर हम सभी आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर प्रदेश की एकता, अखंडता और विकास के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लें। श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने जिस विश्वास और दूरदर्शिता के साथ छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण का ऐतिहासिक मार्ग प्रशस्त किया था, उस विश्वास को विकास, समृद्धि और जनकल्याण के माध्यम से नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
अपनी माटी का सम्मान, अपनी संस्कृति का अभिमान, छत्तीसगढ़ की पहचान और प्रदेश का सर्वांगीण विकास ही हमारा संकल्प है।
समस्त छत्तीसगढ़वासियों को राज्य स्थापना दिवस की हार्दिक बधाई एवं अनंत मंगलमय शुभकामनाएं।
जय छत्तीसगढ़! जय जोहार! जय छत्तीसगढ़ महतारी!



