
रायपुर। डेढ़ महीने के भीतर प्रधानमंत्री मोदी के संभावित दूसरे दौर और गृह मंत्री अमित शाह के तीन-तीन बार छत्तीसगढ़ दौरे को लेकर तंज कसते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि दरअसल भारतीय जनता पार्टी का शीर्ष नेतृत्व भी यह मान चुका है कि भाजपा छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के मुकाबले में कहीं पर नहीं है। 15 साल वादाखिलाफी और कुशासन के बाद 2018 के चुनाव में 90 में 15 सीटों पर आने वाली भाजपा के अब तो छत्तीसगढ़ में कुल 13 ही विधायक बचे हैं। विगत 4 वर्ष में चार प्रदेश अध्यक्ष बदले।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि 2018 से के विधानसभा चुनाव के समय भी प्रधानमंत्री मोदी चार-चार बार छत्तीसगढ़ आए, 2018 के विधानसभा चुनाव परिणाम भी सर्वविदित है। 14 अप्रैल 2018 को बीजापुर 14 जून 2018 को भिलाई 22 सितंबर 2018 को जांजगीर और 9 नवंबर 2018 को प्रधानमंत्री मोदी ने जगदलपुर में चुनावी सभा ली लेकिन छत्तीसगढ़ की जनता ने भाजपा को पूरी तरह से नकार दिया। विगत 1 वर्ष के भीतर भाजपा के दर्जनों केंद्रीय मंत्री आए, विगत डेढ़ महीने के भीतर देश के गृह मंत्री अमित शाह को तीन-तीन बार छत्तीसगढ़ दौड़ लगानी पड़ी लेकिन जनता और अपने कार्यकर्ताओं के बीच भाजपा की विश्वसनीयता का संकट दिनों दिन बढ़ता ही जा रहा है। भाजपा के छत्तीसगढ़ के तीन नेताओं को दिखावे के लिये राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तो बना दिया गया है लेकिन न किसी को क्षेत्रीय प्रभार, न ही किसी को कोई कार्यकारी प्रभार मिला है। 15 साल छत्तीसगढ़ की सत्ता के शीर्ष में रहने वाले रमन सिंह को प्रभारियों ने दौरा करने से मना कर दिया। रमन राज में महत्वपूर्ण पदों पर रहने वाले बृजमोहन अग्रवाल, ननकी राम कंवर राम विचार नेताम, अजय चंद्राकर, अमर अग्रवाल, राजेश मूरत और गौरीशंकर अग्रवाल जैसे नेताओं को किसी कमेटी में स्थान नहीं दिया गया। प्रदेश की चुनाव समिति के प्रभारी भी राजस्थान के ओम माथुर और सह प्रभारी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडारिया बनाए गए। अब तो चर्चा है कि 90 विधानसभा में गुजरात महाराष्ट्र के 90 विधायकों को ठेके पर बुलाया गया है। जब सरकार में रहे तब 15 साल तक सौदान सिंह प्रभारी हुआ करते थे सत्ता जाते ही पिछले 6 साल में आधा दर्जन प्रभारी भी आ गए लेकिन स्थानीय नेता और कार्यकर्ताओं के हक का गला घोटना बंद नहीं किये। कॉरपोरेट की गुलाम भाजपा अब छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव में भी प्रभारी और पेड वर्कर के माध्यम से जा रही है। रमन राज में सरकार में रहते भी अपने कुशासन और भ्रष्टाचार का ठीकरा कार्यकर्ताओं पर फोड़ते रहे। अपने ही कार्यकर्ताओं को कमीशन खोर कहा और अब भाड़े में पार्टी को चलाने की परंपरा से छत्तीसगढ़ के भाजपा का कार्यकर्ता उपेक्षा और तिरस्कार से कुंठित हैं।



