छत्तीसगढ़ सहित देशभर में मेडिकल स्टोर रहे बंद, ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ केमिस्टों की हड़ताल

छत्तीसगढ़ सहित देशभर में मेडिकल स्टोर रहे बंद, ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ केमिस्टों की हड़ताल
रायपुर। छत्तीसगढ़ सहित देशभर में बुधवार को 24 घंटे के लिए मेडिकल स्टोर्स बंद रहे। अखिल भारतीय दवा विक्रेता संगठन के आह्वान पर यह राष्ट्रव्यापी बंद आयोजित किया गया, जिसमें दवा विक्रेताओं ने ऑनलाइन दवा बिक्री की वैधता और मौजूदा नियमों पर गंभीर आपत्ति जताई। संगठन ने 20 मई 2026 को 24 घंटे की हड़ताल का आह्वान करते हुए कहा था कि वर्तमान में चल रही ऑनलाइन दवा बिक्री व्यवस्था कई मामलों में नियमों के विपरीत है और इससे पारंपरिक दवा व्यापार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। दवा विक्रेताओं का आरोप है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए दवाओं की बिक्री बिना पर्याप्त नियंत्रण और नियमन के हो रही है, जिसे वे पूरी तरह अवैध मानते हैं। संगठन ने सरकार से संबंधित अधिसूचनाओं को तत्काल रद्द करने और दवा बिक्री के लिए एक स्पष्ट एवं सख्त नियामक ढांचा तैयार करने की मांग की है।
छत्तीसगढ़ के दवा व्यापारियों का कहना है कि यह मुद्दा केवल व्यापारिक हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि सीधे मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य नैतिकता से जुड़ा हुआ है। उनका आरोप है कि ऑनलाइन फार्मेसी मॉडल में फार्मासिस्ट की पेशेवर भूमिका और जिम्मेदारी को कमजोर किया जा रहा है। दवा व्यापारियों के अनुसार, एंटीबायोटिक्स की अनियंत्रित ऑनलाइन बिक्री से एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस तेजी से बढ़ रहा है, जो भविष्य के लिए गंभीर जनस्वास्थ्य संकट का कारण बन सकता है। उन्होंने फर्जी और गैर-प्रमाणित ऑनलाइन मेडिकल परामर्श सेवाओं पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि ऐसे प्लेटफॉर्म मरीजों को गुमराह कर रहे हैं, जिससे गलत दवाओं के इस्तेमाल का खतरा बढ़ रहा है। इसके साथ ही आरोप लगाया गया है कि एंटीबायोटिक्स, साइकोट्रॉपिक दवाएं, ओपिऑइड्स तथा शेड्यूल एच, एच1 और एक्स श्रेणी की दवाएं बिना उचित जांच-परख के ऑनलाइन बेची जा रही हैं, जो गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकती हैं।
ऑनलाइन दवा बिक्री नियमों का उल्लंघन करती है : एआईओसीडी अध्यक्ष
एआईओसीडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेएस शिंदे ने कहा कि हाल ही में शुरू हुई ऑनलाइन दवा बिक्री नियमों का उल्लंघन करती है। उन्होंने विशेष रूप से जीएसआर 817 अधिसूचना का उल्लेख करते हुए इसे पहले से ही अनुचित बताया था। शिंदे के अनुसार, ऑनलाइन दवा बिक्री से माफिया गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की आशंका है। उन्होंने यह भी कहा कि इस व्यवस्था के लिए जिस मजबूत आईटी ढांचे की आवश्यकता है, उसका वर्तमान में अभाव है, जिससे नियमों के पालन और निगरानी में गंभीर चुनौतियां उत्पन्न हो सकती हैं।
संगठन की मुख्य तीन मांगें
जीएसआर 817 अधिसूचना को रद्द करना: एआईओसीडी का मानना है कि यह अधिसूचना ऑनलाइन दवा बिक्री को वैध बनाने के लिए पर्याप्त नहीं है और इसे तत्काल रद्द किया जाना चाहिए। नई नियामक रूपरेखा का मसौदा तैयार करना: मौजूदा अधिसूचना को रद्द करने के बाद, संगठन एक नई और मजबूत नियामक रूपरेखा के निर्माण की मांग कर रहा है, जो ऑनलाइन दवा बिक्री को नियंत्रित कर सके। ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक: सबसे महत्वपूर्ण मांग यह है कि ऑनलाइन दवा बिक्री को तुरंत बंद किया जाए। इसके अतिरिक्त, एआईओसीडी ने जीएसआर 220 अधिसूचना को भी रद्द करने की मांग की है, जिसे कोविड-19 महामारी के दौरान लागू किया गया था। संगठन का तर्क है कि महामारी के दौरान फार्मासिस्ट ही दवाइयों के एकमात्र प्रदाता थे।
छूट और मार्जिन का मुद्दा
एआईओसीडी ने ऑनलाइन दवा प्लेटफार्मों द्वारा दी जाने वाली भारी छूट पर भी चिंता व्यक्त की है। संगठन का कहना है कि या तो इन छूटों को बंद किया जाना चाहिए या दवा मूल्य नियंत्रण आदेश (डीपीसीओ) में संशोधन करके फार्मासिस्टों के लिए मार्जिन बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि वे भी उपभोक्ताओं को अधिक छूट दे सकें।
छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स ने दिया समर्थन
इस बंद को छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स ने समर्थन दिया है। ऑनलाइन फार्मेसी कंपनियों द्वारा नियमों को ताक पर रखकर किए जा रहे अनियंत्रित कारोबार और इसके कारण आम जनता के स्वास्थ्य पर मंडराते गंभीर खतरे के विरोध में प्रदेशव्यापी होलसेल और रिटेल दवा व्यापार बंद का आह्वान किया गया है। डिस्ट्रिक ड्रगिस्ट एंड केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष विनय कृपलानी एवं कंफेडरेशन ऑफ फॉर्म डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष वासुदेव जोतवानी ने संयुक्त रूप से चेम्बर प्रदेश अध्यक्ष सतीश थौरानी एवं चेम्बर पदाधिकारियों से मुलाकात कर बंद को लेकर समर्थन मांगा था, जिस पर चेंबर ने अपना समर्थन दिया है। दवा बाजार के इस बड़े संकट और जनहित के इस संवेदनशील मुद्दे को देखते हुए चेम्बर ऑफ कॉमर्स के पदाधिकारियों ने व्यापारियों की एकजुटता का परिचय देते हुए इस बंद को अपना पूर्ण और नैतिक समर्थन देने की घोषणा की।
चेम्बर कार्यकारी अध्यक्ष राधा किशन सुंदरानी ने मीडिया को बताया कि वर्तमान में ऑनलाइन फार्मेसी कंपनियों द्वारा दवाओं पर अनियंत्रित और अत्यधिक छूट दी जा रही है, जो कि व्यापारिक नियमों के खिलाफ है। कार्यकारी अध्यक्ष राजेश वासवानी ने मीडिया से कहा कि चिंताजनक बात यह है कि इन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से बाजार में नकली दवाएं धड़ल्ले से खपायी जा रही है। इतना ही नहीं, सरकार द्वारा प्रतिबंधित और अत्यधिक संवेदनशील दवाएं, जिन्हें सिर्फ डॉक्टर की लिखित सलाह (पर्चे) पर ही दिया जाना कानूनी रूप से अनिवार्य है, वे भी इन ऑनलाइन साइट्स पर बिना किसी कड़े सत्यापन के धड़ल्ले से बेची जा रही है, जिसका चेम्बर विरोध करता है और इसे रोकने के लिए प्रशासन से निर्देश देने की अपील करता है।
बैठक में उपस्थित पदाधिकारियों ने कहा है कि यह लड़ाई सिर्फ व्यापारियों के अस्तित्व की नहीं, बल्कि समाज के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए है। चेम्बर ऑफ कॉमर्स से मिला यह समर्थन इस आंदोलन को निर्णायक मोड़ पर ले जाएगा। चेम्बर ने दवा संगठनों को आश्वस्त किया है कि इस गंभीर मुद्दे पर व्यापारियों की आवाज को प्रशासन और शासन के समक्ष बेहद पुरजोर तरीके से उठाया जाएगा।



