अंतर्राष्ट्रीय

संघर्षविराम पर संकट गहराया: अमेरिका के ईरानी ठिकानों पर हमले, लेबनान में इस्राइली कार्रवाई तेज

‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में फिर से उत्पन्न हो सकता खतरा

वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ एक और सैन्य कार्रवाई करते हुए इसे पूरी तरह रक्षात्मक कदम बताया है। इस सप्ताह यह दूसरी बार है जब अमेरिका ने ईरानी गतिविधियों के जवाब में कार्रवाई की है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरानी सेना की ओर से संदिग्ध और आक्रामक गतिविधियां देखे जाने के बाद यह कदम उठाया गया। अमेरिकी सेना ने कार्रवाई के दौरान ईरान के चार ड्रोन मार गिराए, जबकि एक ऐसे सैन्य ठिकाने को भी निशाना बनाया गया जहां से पांचवां ड्रोन लॉन्च किए जाने की तैयारी चल रही थी।

ट्रंप का ईरान को सख्त संदेश : पसंद के मुताबिक न हुआ तो करेंगे कार्रवाई

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह मिडटर्म चुनावों के राजनीतिक दबाव की वजह से ईरान के साथ किसी समझौते में जल्दबाजी नहीं करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर चल रही बातचीत से अमेरिका की पसंद के मुताबिक समझौता नहीं हुआ, तो वॉशिंगटन फिर से सैन्य कार्रवाई करने के लिए तैयार हैं। व्हाइट हाउस में कैबिनेट बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरान को उम्मीद थी कि आने वाले मिडटर्म चुनावों का दबाव उनकी बातचीत की स्थिति को कमजोर कर देगा। ट्रंप ने कहा, ‘उन्हें लगा था कि वे मुझसे ज्यादा इंतजार करवा लेंगे, लेकिन मुझे मिडटर्म चुनावों की कोई परवाह नहीं है।’ ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अभी चर्चा में चल रही शर्तों से संतुष्ट नहीं है और अगर उसकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वह फिर से सैन्य कार्रवाई कर सकता है। ट्रंप ने कहा, ‘उम्मीद है हम इससे संतुष्ट हो जाएंगे। नहीं तो हमें काम पूरा करना पड़ेगा।’ इसके अलावा कैबिनेट बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरान को अपने उच्च स्तर पर समृद्ध यूरेनियम के भंडार को छोडऩे के बदले में किसी तरह की प्रतिबंधों से राहत नहीं मिलेगी।

इससे पहले बुधवार को व्हाइट हाउस ने ईरानी मीडिया में आई उस रिपोर्ट को खारिज कर दिया, जिसमें कथित ड्राफ्ट समझौते का जिक्र था, जिसमें कहा गया था कि अमेरिका ईरान के पास वाले इलाकों से अपनी सेना हटाएगा और ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक रोक खत्म करेगा। व्हाइट हाउस ने इसे ‘पूरी तरह मनगढ़ंत’ बताया।

अमेरिका ने दावा किया है कि उसकी यह कार्रवाई अपने सैनिकों और समुद्री सुरक्षा हितों की रक्षा के लिए की गई है। वहीं, ईरान की ओर से फिलहाल इस कार्रवाई पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में बढ़ती सैन्य गतिविधियों के चलते क्षेत्र में तनाव लगातार गहराता जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता टकराव वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा बाजार पर भी असर डाल सकता है। अधिकारियों का कहना है कि इन ड्रोन गतिविधियों से रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ क्षेत्र को खतरा उत्पन्न हो सकता था। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है और यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बन जाता है।

लेबनान के तटीय शहर टायर में इस्राइल के हमले तेज, कई इलाकों को खाली करने के आदेश

इस्राइली सेना ने गुरुवार को दक्षिणी लेबनान के टायर शहर के निवासियों को इलाका खाली करने का आदेश जारी किया। सेना ने कहा कि वह इस इलाके में ‘ईरान समर्थित समूह’ हिजबुल्ला के खिलाफ कार्रवाई करेगी। आदेश में यह भी कहा गया कि कुछ इमारतों के आसपास रहने वाले लोग इलाका छोडक़र जहरानी नदी के उत्तर की तरफ चले जाएं।

इसी बीच, लेबनान की राष्ट्रीय समाचार एजेंसी के अनुसार, दक्षिणी लेबनान के देइर आम्स गांव में हुए इस्राइली हवाई हमले में दो लोगों की मौत हो गई और एक व्यक्ति घायल हो गया। बताया गया कि यह हमला हिजबुल्ला के ठिकानों को निशाना बनाकर किया गया था।

दूसरी तरफ, हिजबुल्ला ने कहा कि उसके लड़ाकों ने दक्षिणी लेबनान के जौतार अल शर्किया में इस्राइली सेना और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। समूह ने दावा किया कि उसने बुस्तान जत्तम के पास एक इस्राइली मर्कवा टैंक पर ड्रोन हमला किया और ताललेट अल खजान तथा नदी के आसपास इस्राइली सैनिकों और वाहनों पर रॉकेट, तोप और भारी हथियारों से हमला किया।

लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि 2 मार्च से जारी इस्राइली हमलों में मरने वालों की संख्या 27 मई तक बढक़र 3,269 हो गई है, जबकि 9,840 लोग घायल हुए हैं।

Author Desk

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