होर्मुज से निकलेंगे 34 भारतीय जहाज, किसानों और उपभोक्ताओं को मिलेगी राहत

होर्मुज से निकलेंगे 34 भारतीय जहाज, किसानों और उपभोक्ताओं को मिलेगी राहत
नई दिल्ली। होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे भारतीय जहाजों की आवाजाही जल्द सामान्य होने की उम्मीद बढ़ गई है। अब होर्मुज से जहाजों के निर्बाध आवागमन का रास्ता साफ हुआ है, जिसका असर भी दिखने लगा है। तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) लेकर भारत आ रहा भारतीय टैंकर दिशा सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुका है। इसके अलावा भारत के लिए रवाना 34 अन्य जहाजों के भी जल्द ही इस मार्ग से निकलने की संभावना है।
होर्मुज में फंसे 34 जहाजों में से 16 जहाज उर्वरक लेकर भारत आ रहे हैं। इनमें आठ जहाजों पर यूरिया, चार पर डाइ-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी), तीन पर सल्फर और एक पर अमोनिया लदा हुआ है। इन जहाजों के भारत पहुंचने से देश के करोड़ों किसानों को खेती के लिए आवश्यक उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित होने की उम्मीद है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि समझौते के बावजूद तत्काल पूरी राहत मिलने की संभावना कम है। पश्चिम एशिया में संघर्ष के दौरान कई ऊर्जा केंद्रों, रिफाइनरियों और गैस संयंत्रों को नुकसान पहुंचा है। विशेष रूप से कतर का रास लफ्फान गैस प्लांट गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है, जिससे ईंधन आपूर्ति पूरी तरह सामान्य होने में कई महीने लग सकते हैं। भारत का इस गैस प्लांट से एलपीजी आपूर्ति का दीर्घकालिक अनुबंध है। ऐसे में गैस आपूर्ति व्यवस्था को पटरी पर लौटने में अभी समय लग सकता है।



