छत्तीसगढ़

अबूझमाड़ में बदली तस्वीर: 8.75 किमी की सड़क ने खोले विकास के रास्ते, जंगलों के बीच पहुंची नई उम्मीद

अबूझमाड़ में बदली तस्वीर: 8.75 किमी की सड़क ने खोले विकास के रास्ते, जंगलों के बीच पहुंची नई उम्मीद

नारायणपुर। कभी दुर्गम रास्तों, कटे हुए गांवों और विकास की लंबी प्रतीक्षा के लिए पहचाना जाने वाला बस्तर का अबूझमाड़ अब बदलाव की नई कहानी लिख रहा है। घने जंगलों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच बनी एक सड़क ने यहां के आदिवासी ग्रामीणों के जीवन में बड़ा परिवर्तन ला दिया है। प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) के तहत नारायणपुर जिले के अतिदुर्गम क्षेत्र में डोंडरीबेड़ा कैंप से कटेर तक बनाई गई 8.75 किलोमीटर लंबी सड़क अब सिर्फ आवागमन का साधन नहीं, बल्कि उम्मीद और विकास की मजबूत कड़ी बन गई है।

जहां कभी पगडंडियां थीं, वहां अब पहुंच रही जिंदगी की रफ्तार

कुछ समय पहले तक डोंडरीबेड़ा और कटेर जैसे गांवों तक पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं था। संकरी और पथरीली पगडंडियां ही ग्रामीणों का सहारा थीं। बारिश के मौसम में रास्ते बंद हो जाते थे और गांवों का संपर्क पूरी तरह टूट जाता था। बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था। गंभीर मरीजों और गर्भवती महिलाओं को समय पर इलाज दिलाना बेहद मुश्किल होता था। वहीं किसान अपनी कृषि उपज और वनोपज को बाजार तक नहीं पहुंचा पाते थे, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था।

856 लाख रुपये की लागत से बदली गांवों की तस्वीर

प्रशासन की पहल और पीएम-जनमन योजना के तहत 856.19 लाख रुपये की लागत से इस कठिन क्षेत्र में सड़क निर्माण का काम पूरा किया गया। सड़क बनने के बाद अब गांवों तक सिर्फ वाहन नहीं, बल्कि विकास की सुविधाएं भी पहुंचने लगी हैं। पहली बार 108 एंबुलेंस, सरकारी वाहन और प्रशासनिक टीमें सीधे ग्रामीणों तक पहुंच पा रही हैं। शिक्षा व्यवस्था में भी सुधार हुआ है, क्योंकि अब शिक्षक और विद्यार्थी नियमित रूप से स्कूल पहुंच रहे हैं।

किसानों को मिला बाजार तक सीधा रास्ता

नई सड़क ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा दी है। किसान अब अपनी फसल और वनोपज को आसानी से बाजार तक ले जा पा रहे हैं। इससे उन्हें अपनी मेहनत का बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद बढ़ी है और बिचौलियों पर निर्भरता कम हुई है। इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्माण सामग्री, बिजली और पेयजल जैसी योजनाओं का काम भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।

ग्रामीणों के चेहरे पर लौटी मुस्कान
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पहले बाजार या अस्पताल जाने में पूरा दिन लग जाता था, लेकिन अब वाहन घर तक पहुंच रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई और इलाज जैसी चिंताएं कम हुई हैं। अबूझमाड़ की यह सड़क इस बात की मिसाल बन गई है कि बेहतर कनेक्टिविटी किसी भी क्षेत्र की सामाजिक और आर्थिक तस्वीर बदल सकती है। डोंडरीबेड़ा से कटेर तक बना यह मार्ग आदिवासी अंचल के लिए सिर्फ सड़क नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और नए भविष्य की ओर बढ़ता कदम है।

Author Desk

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