आरक्षण विधेयक बाधित करना आरक्षित वर्गो के साथ अन्याय है, माफी मांगे सरकार : दीपक बैज

रायपुर। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस की सरकार ने प्रदेश के आदिवासियों, अनुसूचित जाति और ओबीसी समुदायों को उनकी आबादी के हिसाब से हिस्सेदारी देने के लिए ही नवीन आरक्षण संशोधन विधेयक सर्व सम्मति से पारित किया था, लेकिन भाजपाइयों की दुर्भावना से छत्तीसगढ़ की 90 प्रतिशत आबादी के शिक्षा और रोजगार से जुड़ा यह महत्वपूर्ण विधेयक राजभवन में षडयंत्र पूर्वक लंबित रखा गया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की बदनीयती के चलते ही पूर्ववर्ती सरकार द्वारा पारित 76 प्रतिशत आरक्षण विधेयक विगत ढ़ाई तीन साल से अधिक समय से राजभवन में लंबित है। भाजपाइयों के षड्यंत्र के चलते ही छत्तीसगढ़ के बहुसंख्यक अबादी को उनके शिक्षा और रोजगार के अधिकार को सीधे तौर पर प्रभावित करने वाले प्रावधान के 76 प्रतिशत आरक्षण से वंचित रखा गया है। पहले की भाजपा सरकार ने प्रदेश के अनुसूचित जाति का आरक्षण घटाया था, ओबीसी को उनके हक से वंचित करने का पाप किया था, आदिवासी हितों के खिलाफ षडयंत्र रचे। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए 32 प्रतिशत आरक्षण, अनुसूचित जाति के लिए 12 प्रतिशत से बढ़ाकर उनकी आबादी के अनुरूप 13 प्रतिशत आरक्षण और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान उस नवीन आरक्षण विधेयक 2022 में किया है। सभी वर्गो के गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले ईडब्ल्यूएस के लिए भी 4 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था उस विधेयक में है। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के षडयंत्र और दुर्भावना के चलते ही राजभवन की आड़ में आरक्षण विधेयक को लंबित रखा गया है।
छत्तीसगढ़ नवीन आरक्षण विधेयक 2022 के संदर्भ में भारतीय जनता पार्टी से अपना रुख स्पष्ट करने की मांग करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि सामाजिक न्याय और आम छत्तीसगढिय़ा जनता अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग के गरीबों के हक और अधिकार से संदर्भित महत्वपूर्ण नवीन आरक्षण विधेयक 2 दिसंबर 2022 से राजभवन में अनुमोदन के लिए आज तक लंबित है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और भाजपा के आरक्षित वर्गो के नेता यह बताएं कि महामहिम से उक्त 76 प्रतिशत आरक्षण विधेयक पर शीघ्र हस्ताक्षर करने की अपील कब करेंगे?



