छत्तीसगढ़

अलबेलो गुजरात’ के रंग में झूमे गरबा प्रेमी, आज छत्तीसगढ़ की माटी और संस्कृति की दिखेगी झलक

भगवा ध्वज के सानिध्य में शंखनाद, घंटियों की गूंज और मंत्रोच्चार के बीच मां भगवती की आराधना; विजेताओं को पं. राजेश शर्मा ने किया पुरस्कृत

अलबेलो गुजरात’ के रंग में झूमे गरबा प्रेमी, आज छत्तीसगढ़ की माटी और संस्कृति की दिखेगी झलक

 

आराध्य गरबा में भक्ति, परंपरा और संस्कृति का अद्भुत संगम; तीसरे दिन ‘हमर धरोहर, हमर संस्कृति’ थीम में सजेगा गरबा का मंच

 

भगवा ध्वज के सानिध्य में शंखनाद, घंटियों की गूंज और मंत्रोच्चार के बीच मां भगवती की आराधना; विजेताओं को पं. राजेश शर्मा ने किया पुरस्कृत

 

धमतरी। मां भगवती की आराधना, गुजराती संस्कृति के रंग और पारंपरिक गरबा की मनमोहक प्रस्तुतियां… आराध्य गरबा के दूसरे दिन पूरा आयोजन स्थल भक्ति और उत्साह के रंगों में सराबोर नजर आया। ‘अलबेलो गुजरात’ थीम पर मल्टीकलर परिधानों में सजे गरबा प्रेमियों ने जब मां अंबे की आराधना करते हुए एक साथ कदम थिरकाए, तो पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा। संगीत की मधुर धुनों पर घूमते कदम, मां की जयकार और श्रद्धालुओं का उत्साह आयोजन को यादगार बना गया।

आराध्य गरबा में भगवा ध्वज के सानिध्य में शंखनाद, घंटियों की गूंज और मंत्रोच्चार के बीच मां भगवती अंबे की आराधना की गई। भगवा प्रणाम और ‘जय श्रीराम’ के जयघोष के साथ उपस्थित लोगों का अभिवादन किया गया। भक्ति और भारतीय संस्कृति के इस अनूठे संगम ने गरबा महोत्सव को विशिष्ट पहचान दी।

 

आयोजन के दूसरे दिन ‘अलबेलो गुजरात’ थीम के अनुरूप गरबा प्रेमी रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में पहुंचे। गुजराती लोकसंस्कृति की झलक प्रस्तुत करते हुए प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह और उमंग के साथ गरबा किया। आयोजन के दौरान विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विजेताओं को आयोजक एवं भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य पंडित राजेश शर्मा ने पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया।

 

आज ‘हमर धरोहर, हमर संस्कृति’ थीम में दिखेगी छत्तीसगढ़ की पहचान

आराध्य गरबा के तीसरे दिन आज ‘ग्रीन थीम’ के साथ ‘हमर धरोहर, हमर संस्कृति’ विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगी। गुजरात की रंगीन परंपराओं के बाद अब गरबा के मंच पर छत्तीसगढ़ की माटी की महक, लोकजीवन की सादगी, पारंपरिक संस्कारों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिलेगी।

 

हरे रंग को प्रकृति, हरियाली और नई ऊर्जा का प्रतीक मानते हुए इस थीम के माध्यम से लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का संदेश दिया जाएगा। आयोजन में छत्तीसगढ़ की पहचान, लोकपरंपराओं और पारिवारिक संस्कारों को उत्सव के रंगों के साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

 

इस थीम का उद्देश्य केवल परिधानों के रंगों तक सीमित नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी विरासत से परिचित कराना और छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति के प्रति गर्व की भावना जागृत करना भी है।

 

संस्कृति से जुड़ाव ही आराध्य गरबा की विशेषता : पं. राजेश शर्मा

आराध्य गरबा के आयोजक एवं भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य पंडित राजेश शर्मा ने कहा कि गरबा भारतीय संस्कृति में मां भगवती की आराधना का महोत्सव है। यह केवल नृत्य और मनोरंजन का आयोजन नहीं, बल्कि भक्ति, संस्कार, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का माध्यम है।

 

उन्होंने कहा, “हमारी संस्कृति केवल उत्सवों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी जीवनशैली, पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक एकता में बसती है।” आराध्य गरबा में प्रतिदिन निर्धारित की जाने वाली थीम के पीछे भी एक विशेष सांस्कृतिक संदेश है। ‘अलबेलो गुजरात’ के माध्यम से गुजरात की रंगीन परंपराओं को प्रस्तुत किया गया, वहीं ‘हमर धरोहर, हमर संस्कृति’ के जरिए छत्तीसगढ़ की पहचान, संस्कार और लोकपरंपराओं को सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है।

 

पं. शर्मा ने कहा कि भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता उसकी विविधता और परंपराओं में निहित है। गुजरात का गरबा हो या छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, प्रत्येक की अपनी विशिष्ट पहचान और गौरवशाली विरासत है। मां दुर्गा की आराधना के साथ विभिन्न क्षेत्रों की सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करना हमारी परंपरा की खूबसूरती है।

 

उन्होंने कहा कि मां दुर्गा की उपासना हमें शक्ति, साहस, सेवा और सद्भाव का संदेश देती है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने और परंपराओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आराध्य गरबा के माध्यम से भक्ति, संस्कृति और सामाजिक एकता को एक मंच पर लाने का प्रयास किया जा रहा है।

पं. राजेश शर्मा ने गरबा प्रेमियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि आयोजन की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब यहां आने वाले लोग मां भगवती के आशीर्वाद के साथ भक्ति, सकारात्मकता और अपनी संस्कृति के प्रति गर्व की अनुभूति लेकर लौटें।

Author Desk

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