छत्तीसगढ़

मत्स्य पालन हेतु सब्सिडी आधारित योजनाओं का लाभ लेवे मछुआरे- रामकृष्ण धीवर

धीवर समाज भवन कुरुद में था आयोजन

धमतरी (प्रखर) मछुआ समितियों के पदाधिकारियों का प्रशिक्षण आयोजित ज़िला सहकारी संघ धमतरी के तत्वाधान में जिले के मत्स्य सहकारी समितियों के पदाधिकारियों एवम सचिवों का प्रशिक्षण आयोजित किया जिसमे मत्स्य पालन विभाग की योजनाओं की जानकारी, लेखा एवम प्रबंधन विषयों पर जानकारी दिया गया। धीवर समाज भवन कुरूद मे आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि माननीय रामकृष्ण धीवर सदस्य राष्ट्रीय मत्स्य जीवी महासंघ नई दिल्ली, अध्यक्षता नेहरू निषाद अध्यक्ष मांझी प्रकोष्ठ, विशेष अतिथि रूपचंद धीवर जी बिलासा बाई केवटीन उपाधि से सम्मानित, प्रकाश धीवर अध्यक्ष धीवर समाज कुरूद परगना, नारायण निषाद सचिव मत्स्य महासंघ रायपुर, जयप्रकाश जी, घसियाराम जी धीवर, सुमन चन्द्राकर मत्स्य निरीक्षक उपस्थित रहे साथ ही विशेष रूप से धमतरी जिला सहकारी संघ के अध्यक्ष टेमन लाल साहू , संचालक सदस्य चेतन लाल साहू, जनक राम साहू, रामप्रसाद साहू, प्रेमलाल साहू, नंद कुमार साहू, भीमसेन तारक उपस्थित रहे। कार्यक्रम में मंचासीन अतिथियों द्वारा श्रीराम चंद्रजी एवम भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रामकृष्ण धीवर ने अपने उद्बोधन में कहा कि जिस प्रकार रूपचंद धीवर ने उत्कृष्ट कार्य करके अपना नाम कमाया है उसी प्रकार आप सभी भी मत्स्य पालन के क्षेत्र में आगे बढ़े। प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना नील क्रांति, पीएम आवास योजना एवं मत्स्य पालन हेतु सब्सिडी आधारित योजनाओं का आप सभी पूरा-पूरा लाभ उठावें। हमारा प्रयास है कि जिस प्रकार समर्थन मूल्य में कृषि उत्पादों का विक्रय हो रहा है इस प्रकार मछुआ नीति के अंतर्गत मछलियों का भी विक्रय समर्थन मूल्य में हो ताकि अधिक से अधिक लाभ लोगों को पहुंचाया जा सके। रूपचंद धीवर ने बताया कि मछली मारना ही मछुआरों का व्यवसाय था परंतु वर्तमान परिदृश्य को दृष्टिगत रखते हुए मछली पालन आधुनिक तकनीक से करने की नितांत आवश्यकता है। मछुआरों में जागरूकता लाकर कार्यक्रम चलाया जाना चाहिए ताकि मछली बीज लगाए जाने से लेकर उसके विक्रय तक सतत प्रशिक्षण प्राप्त हो और वह धरातल पर योजनाओं का लाभ ले सकें। अभी निस्तारी तालाब में भी ऑर्गेनिक पदार्थ डालकर मछलियों के लिए चारा उपलब्ध कराकर उनके उत्पादन में वृद्धि किया जा सकता है इसका उपयोग मछुआरों को करना चाहिए एवं इस हेतु सतत जानकारी प्राप्त करना चाहिए। मत्स्य निरीक्षक श्रीमती सुमन चंद्राकर ने विभागीय योजनाओं के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में गांव में समिति का कार्य क्षेत्र घट रहा है, कई कई गांव में तो दो-दो समितियां भी मछली पालन का कार्य कर रही है अतः वर्तमान समय को देखते हुए प्रगतिशील मत्स्य पालक किस प्रकार मत्स्य पालन कर रहे हैं उनको देखकर मछुआरों को सीखना चाहिए। मछली उत्पादन करने के पश्चात उसको स्थानीय ठेकेदार को विक्रय हेतु दे देते हैं जिससे पर्याप्त मात्रा में मछुआरों मछलियों का सही दाम नहीं मिल पाता है ठेकेदारों का काम भी समिति के माध्यम से स्वयं करना होगा तभी उनका उनको लाभ हो सकेगा। राज्य शासन द्वारा मत्स्य पालन हेतु तकनीकी शिक्षण प्रशिक्षण, अध्ययन भ्रमण,पंजीकृत समितियों को अनुदान, नाव /जाल जाल क्रय सहायता, फुटकर मछली विक्रय, मौसमी तालाबों में स्पान संवर्धन हेतु अनुदान दिया जाता है इस हेतु अधिक जानकारी के लिए जिले के कार्यालय में संपर्क किया जा सकता है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत मत्स्य बीज संवर्धन पोखर का निर्माण, स्वयम की भूमि में तालाब निर्माण , तालाब निर्माण में इनपुट सहायता, मोटरसाइकिल के साथ आइस बॉक्स, ऑटो रिक्शा के आइस बॉक्स, मछुआरो का 05 लाख रुपये तक का दुर्घटना बीमा आदि की योजना संचालित हो रही है जिसका अधिक से अधिक लाभ लिया जाना अपेक्षित है।
छ. ग. राज्य सहकारी संघ के प्रशिक्षक सुरेश पटेल एवम राजेश कुमार साहू ने सहकारिता मॉडल, लिखा एवं वाऊचिंग करना ऑडिट कराना एवं प्रबंधन तथा नेतृत्व विकास के बारे में जानकारी दिए। प्रशिक्षण में प्रशिक्षार्थियों का विभागीय योजनाओं से संबंधित प्रश्नों का समाधान किया गया। कार्यक्रम के अंत में मंचाशीन अतिथियों को शाल श्रीफल से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन जिला संघ प्रबंधक ए पी गुप्ता ने एवम आभार प्रदर्शन नंद कुमार साहू संचालक ने किया। प्रशिक्षण में जिले के मत्स्य सहकारी समिति के सदस्य, समिति के कर्मचारीगण, पूर्व पदाधिकारीगण उपस्थित रहे।

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