सरकार के प्रयास और जनता के सहयोग के बल पर बस्तर में विकास का नया सूर्योदय : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

राष्ट्रपति ने तीन दिवसीय बस्तर पंडुम कार्यक्रम का शुभारंभ किया
जगदलपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज शनिवार को छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के जगदलपुर पहुंची। उन्होंने तीन दिवसीय बस्तर पंडुम कार्यक्रम का शुभारंभ किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि 4 दशक से यह क्षेत्र माओवादियों से ग्रस्त था। सबसे अधिक नुकसान युवाओं, आदिवासियों को हुआ है। भारत सरकार की निर्णायक कार्रवाई से बस्तर में वर्षों से व्याप्त असुरक्षा, भय और अविश्वास और का वातावरण अब समाप्त हुआ। माओवाद से जुड़े लोग हिंसा का रास्ता छोड़ रहे हैं, जिससे शांति लौट रही है। राष्ट्रपति ने कहा कि बड़ी संख्या में माओवादियों सरेंडर कर रहे हैं। जो सरेंडर कर रहे हैं, सरकार सुनिश्चित कर रहे हैं कि जो लोग हथियार छोड़ चुके हैं, वे लोग सामान्य जीवन जी सकें, उनके लिए अनेक विकास एवं कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही है। सरकार के प्रयास और इस क्षेत्र के लोगों के सहयोग के बल पर आज बस्तर में विकास का नया सूर्योदय हो रहा है। गांव-गांव में सडक़, बिजली और पानी की सुविधा हो रही है। वर्षों से बंद स्कूल खुल रहे हैं। और बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। यह सुखद तस्वीर है, जो देशवासियों में खुशी का संचार कर रही है। हिंसा का रास्ता छोडक़र मुख्य धारा में लौटने वालों सभी लोगों की सराहना करती हैं, उनसे अनुरोध है कि वे देश के संविधान और लोकतंत्र में पूरी आस्था रखें। जो लोग बरगला रहा हैं, उन पर विश्वास न करें।
राष्ट्रपति ने कहा कि लोकतंत्र की ताकत यह है उड़ीसा के एक छोटे से गांव की बेटी आज भारत की राष्ट्रपति के रूप में आपको संबोधित कर रही हूं। आप लोगों में मुझसे अधिक ताकत और हौसला है, सरकार आपके लिए समर्पित है। यह छत्तीसगढ़ के आदिवासियों के लिए समर्पित है। इसीलिए पढ़ाई करें, मुख्यधारा में लौटे, आगे बढ़े. जो पीछे हैं, उन्हें आगे करना सरकार की मंशा है।
जहां झंडा नहीं फहराया जाता था, अब वहां राष्ट्रीय गान गूंजता है : सीएम साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में सौभाग्य का विषय है कि राष्ट्रपति बस्तर पण्डुम का न्यौता स्वीकार कर पहुंची है। यह बस्तर के लिए आशीर्वाद है, जनजातीय समाज के साथ खुशी का पल है। बस्तर पंडुम बस्तर के कलाकारों को मंच देता है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष 47 हजार लोगों ने भाग लिया है, जिसे गिनीज वर्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ था। इस वर्ष 52 हजार लोगों ने रजिस्ट्रेशन करवाया है। उन्होंने कहा कि एक समय था, जब बस्तर नक्सलवाद का दंश झेलता था, जहां गोलियों की आवाज गूंजती थी, आज वहां स्कूल की घंटियां बजती है। जहां झंडा नहीं फहराया जाता था, अब वहां राष्ट्रीय गान गूंजता है, जो लोग कभी हथियार लेकर चलते थे, आज वो पुनर्वास कर सरकार को योजना का लाभ ले रहे हैं। बस्तर ओलंपिक और पांडुम यह बताता है कि अब बस्तर के लोग हथियार नहीं उठाना चाहते है, बस्तर पंडुम सिर्फ आयोजन नहीं, छत्तीसगढ़ की आत्मा है।
छत्तीसगढ़ के लिए गर्व, सम्मान और प्रेरणा का क्षण
सीएम साय ने इस अवसर पर सोशल मीडिया में पोस्ट कर कहा कि, छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर माननीय राष्ट्रपति महोदया का हार्दिक स्वागत, मां दंतेश्वरी की पावन, ऐतिहासिक एवं आस्था से परिपूर्ण धरती पर भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी का हृदय से स्वागत एवं अभिनंदन है। आपका यह आगमन बस्तर अंचल सहित समस्त छत्तीसगढ़ के लिए गर्व, सम्मान और प्रेरणा का क्षण है। आदिवासी संस्कृति, परंपरा और समृद्ध विरासत से सुसज्जित इस पावन क्षेत्र में आपकी गरिमामयी उपस्थिति प्रदेश के विकास, जनजातीय अस्मिता और नई संभावनाओं को और अधिक सशक्त करने का मार्ग प्रशस्त करेगी। बस्तर सहित पूरे छत्तीसगढ़ की जनता की ओर से आपका सादर अभिनंदन एवं हार्दिक स्वागत।
राज्यपाल, सीएम ने किया स्वागत
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज शनिवार को छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के जगदलपुर पहुंची। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के जगदलपुर स्थित मां दंतेश्वरी एयरपोर्ट पहुंचने पर राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और केदार कश्यप, सांसद महेश कश्यप, जगदलपुर विधायक किरण सिंह देव और महापौर संजय पांडे ने भी राष्ट्रपति का स्वागत एवं अभिवादन किया। बस्तर के आदिवासी इसे केवल राष्ट्रपति का आगमन नहीं, बल्कि अपनी बेटी या बहन के बस्तर आने के रूप में देख रहे हैं। राष्ट्रपति मुर्मू का छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में यह पहला दौरा है। इससे पहले चार राष्ट्रपति बस्तर आ चुके हैं। 25 से 26 जुलाई 2018 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद बस्तर आए थे।
क्या है बस्तर पंडुम
बस्तर पण्डुम जनजातीय समाज के तीन दिवसीय सांस्कृतिक महाकुंभ में जनजातीय जीवनशैली, मान्यताओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विरासत सहेजने और प्रदर्शित करने का पर्व है। बस्तर पण्डुम लोककला और संस्कृति और स्थानीय परंपराओं से जुड़ा उत्सव है। यह उत्सव बस्तर जनजातीय बस्तर पण्डुम जानजातीय समुदाय की पहचान, गौरव और उनकी समृद्ध परंपरा को प्रोत्साहित करने वाला एक महत्वपूर्ण मंच है। इस उत्सव के माध्यम से बस्तर अंचल की सांस्कृतिक को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू स्वयं आदिवासी समाज से आती हैं। ऐसे में आदिवासी बहुल क्षेत्र बस्तर संभाग में उनका आगमन अहम माना जा रहा है। बस्तर संभाग के आदिवासियों के बीच उनके आगमन को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है। आदिवासी उन्हें अपने बीच पाकर बेहद उत्साहित हैं। इसे आदिवासी समाज के सम्मान और गौरव का प्रतीक माना जा रहा है।



