धमतरी में भाजपा नेता महेंद्र खण्डेलवाल का पशु प्रेम बना मिसाल, रोजाना गाय और कुत्ते को अपने हाथों से खिलाते हैं भोजन

धमतरी(प्रखर) शहर में इन दिनों भाजपा नेता महेंद्र खण्डेलवाल का पशु प्रेम आमजन के बीच विशेष चर्चा का विषय बना हुआ है। व्यस्त राजनीतिक और सामाजिक जीवन के बावजूद उनके भीतर जीव-जंतुओं के प्रति जो करुणा, संवेदनशीलता और आत्मीयता है, वह लोगों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बनती जा रही है। स्थानीय बाजार क्षेत्र में प्रतिदिन देखने को मिलने वाला एक भावनात्मक दृश्य अब शहर की पहचान बनता जा रहा है।
बताया जाता है कि प्रतिदिन सुबह लगभग 11 बजे एक गाय नियमित रूप से उनकी दुकान तक पहुंचती है। आश्चर्य की बात यह है कि वह सीधे दुकान के ऊपर तक आ जाती है और तब तक वहीं खड़ी रहती है, जब तक महेंद्र खण्डेलवाल स्वयं बाहर आकर उसे अपने हाथों से रोटी नहीं खिलाते। आसपास के दुकानदारों और ग्राहकों के अनुसार, यह क्रम कई दिनों से लगातार चल रहा है। गाय मानो समय की पाबंद हो—न तय समय से पहले आती है, न बाद में। जैसे ही महेंद्र खण्डेलवाल स्नेहपूर्वक उसे रोटी खिलाते हैं, वह शांत भाव से वहां से आगे बढ़ जाती है। यह दृश्य देखने वालों के लिए किसी आत्मिक सुकून से कम नहीं होता।
दुकान के पास मौजूद व्यापारियों का कहना है कि शुरू में यह एक सामान्य घटना लगी, लेकिन जब यह सिलसिला रोज का बन गया तो लोगों ने इसे ध्यान से देखना शुरू किया। अब कई लोग जानबूझकर उस समय वहां रुक जाते हैं ताकि इस मानवीय और संवेदनशील क्षण के साक्षी बन सकें। कई ग्राहकों ने इसे “मानव और पशु के बीच विश्वास का जीवंत उदाहरण” बताया है।
इसी तरह एक कुत्ता भी रोजाना उनकी दुकान में आकर बैठ जाता है। वह बिना किसी भय या संकोच के अंदर आता है और आराम से बैठकर महेंद्र खण्डेलवाल का इंतजार करता है। जैसे ही वे उसे देखते हैं, बड़े प्रेम से बिस्किट खिलाते हैं। कुत्ता भी पूरी आत्मीयता से उनके पास बैठकर बिस्किट खाता है और कुछ देर वहीं विश्राम करने के बाद शांतिपूर्वक चला जाता है। यह दृश्य दर्शाता है कि प्रेम और अपनापन शब्दों से नहीं, व्यवहार से व्यक्त होता है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि आज के दौर में जहां लोग अपने कामकाज और भागदौड़ में इतने व्यस्त हो चुके हैं कि उन्हें अपने आसपास की छोटी-छोटी संवेदनाएं भी दिखाई नहीं देतीं, ऐसे में महेंद्र खण्डेलवाल का यह व्यवहार समाज को सकारात्मक संदेश देता है। भारतीय संस्कृति में पशु सेवा और दया को सदैव पुण्य का कार्य माना गया है। गाय की सेवा हो या किसी बेसहारा पशु को भोजन देना—यह हमारी परंपराओं और संस्कारों का हिस्सा रहा है।
कुछ वरिष्ठ नागरिकों ने बताया कि पहले घरों और बाजारों में पशुओं को भोजन देना सामान्य बात थी, लेकिन आधुनिक जीवनशैली में यह परंपरा धीरे-धीरे कम होती जा रही है। ऐसे समय में यदि कोई जनप्रतिनिधि स्वयं आगे बढ़कर इस तरह का उदाहरण प्रस्तुत करता है, तो यह समाज के लिए प्रेरणा का कार्य करता है। इससे न केवल पशुओं के प्रति संवेदनशीलता बढ़ती है, बल्कि नई पीढ़ी को भी दया और सेवा का महत्व समझ में आता है।
शहरवासियों का मानना है कि समाज में सकारात्मक बदलाव केवल बड़े अभियानों और घोषणाओं से नहीं आता, बल्कि ऐसे छोटे-छोटे मानवीय कार्य भी बड़ी प्रेरणा बन जाते हैं। महेंद्र खण्डेलवाल का यह पशु प्रेम न केवल चर्चा का विषय बना हुआ है, बल्कि लोगों को करुणा, सहानुभूति और सेवा भाव अपनाने की प्रेरणा भी दे रहा है।
धमतरी में प्रतिदिन दिखने वाला यह दृश्य अब एक संदेश बन चुका है—प्रेम की भाषा हर जीव समझता है, बस उसे सच्चे मन से निभाने की आवश्यकता है।



