होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहा भारतीय जहाज, सुरक्षा देने स्टैंडबाय पर रखे नौसैनिक पोत

होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहा भारतीय जहाज, सुरक्षा देने स्टैंडबाय पर रखे नौसैनिक पोत
नई दिल्ली। अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच का संघर्ष अब 15वें दिन में प्रवेश कर चुका है और पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईरान के राष्ट्रपति और विदेश मंत्री एस जयशंकर की ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची की बातचीत का असर ये हुआ कि आज भारत का टैंकर स्ट्रैट ऑफ होर्मूज से सुरक्षित गुजरा। वहीं, कर्नाटक के कारवार बंदरगाह से भी राहत भरी खबर सामने आई है। मालवाहक जहाज चेंग एक्स कर्नाटक के कारवार बंदरगाह पर सुरक्षित रूप से पहुंच गया है। मिडिल ईस्ट में चल रहे संकट के बीच 3,100 टन बिटुमेन यानी तारकोल की खेप लेकर संयुक्त अरब अमीरात के खोर फक्कन बंदरगाह से रवाना हुआ मालवाहक जहाज ‘चेंग एक्स’ कर्नाटक के कारवार बंदरगाह पर सुरक्षित रूप से तट पर पहुंच गया है। यह जहाज 3 मार्च को खोर फक्कन बंदरगाह से रवाना हुआ था और इसने अरब सागर के रास्ते लगभग 2 हफ्ते का सफर पूरा किया। बंदरगाह अधिकारियों के अनुसार, यह जहाज अपने साथ लगभग 3,100 मीट्रिक टन सामग्री लेकर आया था। इस जहाज ने चुनौतीपूर्ण समुद्री सीमाओं और ईरान द्वारा लगाई गई व्यापारिक पाबंदियों के बीच अपना रास्ता तय किया है।
युद्ध के चलते होर्मुज में फंसा था भारतीय जहाज
भारतीय ध्वज वाला गैस ले जा रहा जहाज ‘शिवालिक’ होर्मुज जलडमरूमध्य से बिना किसी सैन्य एस्कॉर्ट के गुजर रहा है। सूत्रों के अनुसार क्षेत्र में मौजूद भारतीय नौसेना के युद्धपोत पूरी तरह सतर्क हैं और स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। जरूरत पडऩे पर जहाज को सुरक्षा सहायता देने के लिए नौसैनिक पोत स्टैंडबाय पर रखे गए हैं। इलाके में बढ़ते तनाव के बीच यह निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था की जा रही है। इस जहाज में 34 सदस्यीय चालक दल है और यह 36 लाख घरेलू गैस सिलेंडर (एलपीजी) लेकर आ रहा था। ऐसे में जारी संघर्ष के बीच मिसाइल और ड्रोन के लगातार हमलों को देखते हुए जहाज के कप्तान वीरेंद्र विश्वकर्मा और उनके क्रू मेंबर मदद के लिए लगातार भारत सरकार से गुहार लगा रहे हैं।
बता दें कि यह टैंकर कुवैत के मीना अल अहमदी बंदरगाह से गुजरात के दीनदयाल कांडला बंदरगाह के लिए रवाना हुआ था। लेकिन 28 फरवरी से इस समुद्री मार्ग पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण जहाज आगे नहीं बढ़ सका। फिलहाल यह जहाज संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के पास मीना साकर बंदरगाह क्षेत्र में लंगर डाले खड़ा है और आगे बढऩे की बारी का इंतजार कर रहा है।
जहाज से भेजे गए संदेश में कप्तान वीरेंद्र ने बताया कि मिसाइलें और ड्रोन सीधे हमारे ऊपर उड़ रहे हैं। हर जगह सायरन बज रहे हैं और हर पल ऐसा लगता है जैसे कुछ भयानक हो सकता है। हम बस भारतीय नौसेना का सुरक्षा दल का इंतजार कर रहे हैं, ताकि सुरक्षित अपने वतन लौट सकें।
आपातकालीन स्थिति, डर और चिंता
वहीं मुंबई के दहिसर में विश्वकर्मा का परिवार डर और चिंता में जी रहा है। उनकी पत्नी निल्पा विश्वकर्मा ने बताया कि कई रातों से उन्हें नींद नहीं आ रही। उनका बेटा वेदांश (10 साल) और बेटी निर्वी (12 साल) अपने पिता के लौटने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इंटरनेट कनेक्टिविटी न होने की वजह से नियमित संपर्क नहीं हो पा रहा, जिससे चिंता और बढ़ गई है। गौरतलब है कि जहाज में केवल 60 दिनों का राशन बचा है। शिपिंग कंपनी और संबंधित मंत्रालय लगातार भारतीय नौसेना के संपर्क में हैं। कप्तान और उनके परिवार की एक ही मांग है कि भारतीय नौसेना उन्हें जल्द से जल्द सुरक्षित घर वापस लाए।
होर्मुज में फंसे भारत के कितने जहाज?
उधर, पोर्ट्स एंड शिपिंग मंत्रालय ने गुरुवार को कहा था कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में संचालित भारतीय ध्वज वाले जहाजों की संख्या 28 बनी हुई है और सभी भारतीय जहाजों व चालक दल की सुरक्षा पर लगातार नजर रखी जा रही है। इनमें से 24 भारतीय जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में मौजूद थे, जिन पर 677 भारतीय नाविक सवार थे। वहीं चार जहाज जलडमरूमध्य के पूर्वी हिस्से में थे, जिन पर 101 भारतीय नाविक मौजूद थे।



