मातृ दिवस समारोह में सेवा भाव की मिसाल, वास्तविक सम्मान की हकदार माताओं को सम्मानित कर भावुक हुए पं. राजेश शर्मा

धमतरी: मातृ दिवस के अवसर पर आयोजित नारी शक्ति वंदन सम्मान समारोह के सफलतापूर्वक संपन्न होने के बाद एक ऐसा भावुक दृश्य सामने आया, जिसने पूरे आयोजन को यादगार बना दिया। मंचीय कार्यक्रम, सम्मान और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच एक ओर वे माताएं खड़ी थीं, जिन्होंने पूरे कार्यक्रम की सफलता के लिए सुबह से लेकर समापन तक निस्वार्थ भाव से सेवा दी। किसी ने भोजन व्यवस्था संभाली, किसी ने परोसदारी की, तो किसी ने साफ-सफाई और अतिथियों के स्वागत में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
ये वे मातृ शक्तियां थीं, जिनका जीवन रोज कमाने और रोज खाने की संघर्षमयी दिनचर्या में बीतता है। उन्हें यह भी जानकारी नहीं थी कि मातृ दिवस उनके जैसे त्याग, सेवा और ममता की प्रतिमूर्ति माताओं के सम्मान का दिन है। वे चुपचाप एक किनारे खड़ी होकर कार्यक्रम को देख रही थीं।
इसी दौरान समाजसेवा और मानवीय संवेदनाओं के लिए पहचाने जाने वाले पं. राजेश शर्मा की नजर उन माताओं पर पड़ी। उन्होंने बिना देर किए तुरंत उनके बीच पहुंचकर सभी को आत्मीयता से गले लगाया। यह दृश्य वहां उपस्थित लोगों के लिए अत्यंत भावुक कर देने वाला था। इसके बाद उन्होंने मातृ दिवस के महत्व को समझाते हुए कहा कि मां केवल परिवार की शक्ति नहीं, बल्कि समाज की आधारशिला होती है।
पं. राजेश शर्मा ने स्वयं सभी माताओं का तिलक-वंदन किया, उन्हें उपहार भेंट कर सम्मानित किया और कार्यक्रम की सफलता में उनके योगदान के लिए आभार व्यक्त किया। जैसे ही सम्मान का यह क्षण आया, पूरा वातावरण भावनाओं से भर उठा। कई माताओं की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। वहां मौजूद महिलाओं और लोगों की आंखें भी नम हो गईं। हर किसी के दिल से यही दुआ निकल रही थी कि बेटा हमेशा सुखी रहे और सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ता रहे।
इस अवसर पर भावुक होते हुए पं. राजेश शर्मा ने कहा कि उन्होंने सार्वजनिक जीवन में अनेक कार्यक्रम किए हैं, कई सम्मान समारोह आयोजित किए हैं, लेकिन आज जो आत्मिक शांति, संतोष और सुकून उन्हें सेवा में समर्पित माताओं के चेहरे की मुस्कान और आंखों के आंसुओं से मिला है, वह उनके जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने कहा कि आज उनका सार्वजनिक जीवन सच मायनों में धन्य हो गया।
उन्होंने आगे कहा कि समाज में वास्तविक सम्मान उन्हीं लोगों का होना चाहिए, जो बिना किसी अपेक्षा के सेवा करते हैं। ऐसी माताएं केवल परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की प्रेरणा हैं।
सम्मानित होने वाली माताओं में ग्वालिन बाई साहू, संगीता बाई, निर्मला, अनसूया, बसंती यादव, रोशनी यादव, सुशीला, देव कुमारी, सरस्वती, सुभद्रा यादव और सती बाई प्रमुख रहीं।
इस भावनात्मक क्षण के साक्षी बनने वालों में राजेंद्र शर्मा, प्रकाश शर्मा, पिंटू यादव, कुलेश सोनी, विकास शर्मा, लकी डागा, सरिता यादव, प्राची सोनी, प्राप्ति वासनी, हर्षा महेश्वरी और विशाखा सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
मातृ दिवस पर हुआ यह सम्मान समारोह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सेवा, संवेदना और संस्कारों का जीवंत उदाहरण बन गया, जिसकी चर्चा लंबे समय तक होती रहेगी।



