छत्तीसगढ़

धमतरी में जैन संतों का भव्य मंगल प्रवेश, गुरुदेवों एवं मुनियों के मिलन से धर्ममय हुआ वातावरण


137वें उपवास पर विराजमान विराग मुनि जी के दर्शन हेतु उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
धमतरी- धर्म, तपस्या और संयम की पावन धारा से सराबोर धमतरी नगरी आज उस समय पूर्णतः धर्ममय हो उठी, जब व्याख्यान वाचस्पति परम पूज्य जयानंद मुनि जी महाराज साहेब के सुशिष्य रत्न, गणाधीश पन्यास प्रवर श्री विनय कुशल मुनि गणी जी एवं परम पूज्य नन्दीसेन मुनि जी महाराज साहेब का रायपुर से विहार कर धमतरी नगर में मंगल प्रवेश हुआ। वहीं दूसरी ओर परम पूज्य साध्वी रत्ना श्री दीर्घ संयमी श्री कुशल श्री जी महाराज साहेब की सुशिष्याएँ परम पूज्य जयशिशु वीरतीयशा श्री जी, परम पूज्य विनम्रयशा श्री जी तथा परम पूज्य अरिष्टलब्धि श्री जी महाराज साहेब का बालोद से विहार कर धमतरी आगमन हुआ।
नगर प्रवेश के अवसर पर जैन समाज द्वारा जैन दादाबाड़ी से भव्य स्वागत यात्रा निकाली गई। श्रद्धालुओं ने जयकारों, मंगल गीतों और पुष्पवर्षा के साथ संतों एवं साध्वियों का अभिनंदन किया। पूरे मार्ग में धर्ममय वातावरण बना रहा तथा बड़ी संख्या में समाजजन दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त करने उपस्थित रहे।
धमतरी के इतवारी बाजार स्थित जैन मंदिर में वर्तमान में परम पूज्य पन्यास प्रवर श्री वीरभद्र मुनि गणी जी (विराग मुनि जी), परम पूज्य भव्य मुनि जी महाराज साहेब, परम पूज्य सोमभद्र मुनि जी महाराज साहेब, परम पूज्य सुहस्ति भद्र मुनि जी महाराज साहेब एवं शतावधानी बालमुनि हंसभद्र जी महाराज साहेब विराजमान हैं। सभी संतों के एक साथ धमतरी में विराजमान होने से नगर का धार्मिक वातावरण और अधिक भक्तिमय हो गया है।
विशेष रूप से श्रद्धालुओं के आकर्षण एवं आस्था का केंद्र बने हुए हैं परम पूज्य पन्यास प्रवर श्री वीरभद्र मुनि गणी जी (विराग मुनि जी), जिनका आज 137वां उपवास निरंतर जारी है। उनकी कठिन तपस्या, त्याग और आत्मसंयम को देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। बड़ी संख्या में लोग उनके दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। समाजजनों ने इसे आत्मशक्ति, तप और साधना का अद्भुत उदाहरण बताया।
नगर प्रवेश के दौरान गुरुदेवों एवं मुनियों का मंगल मिलन भी हुआ, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया। संतों के इस आध्यात्मिक संगम को देखने बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। समाज के वरिष्ठजनों ने कहा कि यह अवसर धमतरी नगर के लिए अत्यंत सौभाग्य और पुण्य का विषय है।

Author Desk

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