जीवदया और सेवा भावना के प्रतीक थे स्व. रिखबचंद जी गोलछा एवं स्व. प्रणय गोलछा

पुण्य स्मृति में लगातार तीन वर्षों से संचालित हो रही चलित प्याऊ सेवा
धमतरी। कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जिनका जीवन केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरा समाज उनसे प्रेरणा प्राप्त करता है। स्वर्गीय रिखबचंद जी गोलछा एवं स्वर्गीय प्रणय गोलछा ऐसे ही प्रेरणादायी व्यक्तित्व थे, जिन्होंने अपने जीवन को सेवा, जीवदया और मानवता के कार्यों के लिए समर्पित कर दिया। उनका हमारे बीच नहीं होना केवल परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक अपूर्णीय क्षति माना जा रहा है।
उनकी सरलता, सहज मुस्कान, अपनापन और हर व्यक्ति के प्रति स्नेह आज भी लोगों के हृदय में जीवित है। उन्होंने कभी प्रसिद्धि या दिखावे की इच्छा नहीं रखी, बल्कि निस्वार्थ भाव से जरूरतमंदों की सहायता को ही अपना धर्म माना। चाहे जीवदया का कार्य हो, गरीब एवं असहाय लोगों की मदद करनी हो, या भीषण गर्मी में प्यासे लोगों तक राहत पहुँचानी हो, वे हर सेवा कार्य में सदैव अग्रणी रहे।
समाजजनों का कहना है कि स्व. रिखबचंद जी गोलछा एवं स्व. प्रणय गोलछा ने हमेशा दूसरों की पीड़ा को अपनी पीड़ा समझा। उनका मानना था कि मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य केवल स्वयं के लिए जीना नहीं, बल्कि समाज और जरूरतमंदों के लिए कुछ करना है। यही कारण था कि उन्होंने अपने जीवन में सेवा, संस्कार और करुणा की ऐसी मिसाल प्रस्तुत की, जो आज भी लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बनी हुई है।
उनकी पुण्य स्मृति में विगत तीन वर्षों से शहरभर में चलित प्याऊ सेवा निरंतर संचालित की जा रही है। इस सेवा के माध्यम से भीषण गर्मी में राहगीरों, श्रमिकों, रिक्शा चालकों एवं जरूरतमंद लोगों को शीतल जल और पेय वितरित कर उनकी प्यास बुझाने का प्रयास किया जाता है। शहर के विभिन्न क्षेत्रों में संचालित यह प्याऊ सेवा आज मानवता और सेवा का प्रतीक बन चुकी है।
परिजनों ने बताया कि यह केवल एक सेवा कार्य नहीं, बल्कि स्वर्गीय रिखबचंद जी गोलछा एवं स्वर्गीय प्रणय गोलछा द्वारा दिए गए संस्कारों और मानवता के संदेश को जीवित रखने का एक छोटा सा प्रयास है। जब-जब यह चलित प्याऊ शहर की गलियों से गुजरता है, तब-तब ऐसा महसूस होता है मानो उनकी प्रेरणा आज भी हर सेवा कार्य में साथ चल रही हो।
समाजजनों ने भावुक होकर कहा कि आज भी उनकी यादें हर व्यक्ति के मन में ताजा हैं। उनकी सहज मुस्कान, मधुर व्यवहार और सेवा के प्रति समर्पण को कभी भुलाया नहीं जा सकता। वे ऐसे व्यक्तित्व थे, जिन्होंने बिना किसी भेदभाव के हर वर्ग के लोगों के साथ आत्मीयता का संबंध बनाया। उनके पास आने वाला हर व्यक्ति सम्मान और अपनापन महसूस करता था।
उनकी पुण्यतिथि पर समाज के विभिन्न लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि सच्चे अर्थों में वही व्यक्ति अमर होते हैं, जो अपने अच्छे कर्मों और संस्कारों से लोगों के दिलों में स्थान बना लेते हैं। स्व. रिखबचंद जी गोलछा एवं स्व. प्रणय गोलछा आज भले ही हमारे बीच शारीरिक रूप से उपस्थित नहीं हैं, लेकिन उनकी प्रेरणा, उनकी सीख और उनके सेवा कार्य सदैव जीवित रहेंगे।
समाजजनों ने संकल्प लिया कि उनके द्वारा दिखाए गए सेवा और मानवता के मार्ग पर चलते हुए जरूरतमंदों की सहायता, जीवदया एवं जनसेवा के कार्य निरंतर जारी रखे जाएंगे, ताकि उनकी दी हुई सीख और उनका नाम सदैव समाज में जीवित रहे।
“जब भी कोई प्यासे को पानी पिलाएगा, किसी जरूरतमंद की सहायता करेगा या जीवों के प्रति दया का भाव रखेगा, वहाँ स्व. रिखबचंद जी गोलछा एवं स्व. प्रणय गोलछा की प्रेरणा अवश्य महसूस होगी।”



