राष्ट्रीय
केरल में नए सदन की शुरुआत पर ‘वंदे मातरम’ को लेकर सियासी विवाद

विधानसभा में नहीं हुआ पूरा गायन
तिरुवनंतपुरम। केरल में नई विधानसभा में काम के पहले दिन पर वंदे मातरम के गायन को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ सरकार और राज्यपाल के कार्यालय (लोक भवन) के बीच यह पहला सीधा टकराव माना जा रहा है। राज्यपाल के नीतिगत संबोधन से पहले यह घटना सामने आई। केरल पुलिस बैंड ने वंदे मातरम का केवल शुरुआती हिस्सा बजाया। लोक भवन ने गुरुवार को पूर्वाभ्यास के दौरान पूरा राष्ट्रगीत बजाने का निर्देश दिया था। राज्य सरकार ने इस निर्देश को अस्वीकार कर दिया। सरकार ने केवल शुरुआती हिस्सा बजाने की पुरानी परंपरा का पालन किया। इसे नई यूडीएफ सरकार और राज्यपाल कार्यालय के बीच तनाव का पहला संकेत माना जा रहा है।
राजनीतिक गलियारों में इसे सरकार और लोक भवन के बीच आने वाले समय में मुश्किल संबंधों का संकेत माना जा रहा है। यह टकराव विधानसभा के पहले दिन हुआ। पिछले सप्ताह 139 विधायकों के शपथ ग्रहण और नए अध्यक्ष के चुनाव के बाद यह पहला बड़ा दिन था। 140 सदस्यीय विधानसभा में यूडीएफ के पास 102 विधायकों के साथ भारी बहुमत है। वामपंथी विपक्ष 35 सीटों पर सिमट गया है। भाजपा पहली बार तीन विधायकों के साथ केरल विधानसभा में प्रवेश कर चुकी है। इससे सदन को एक नया राजनीतिक स्वरूप मिला है।
तनाव के बावजूद, राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने विधानसभा के भीतर इस मुद्दे को बढ़ाने से परहेज किया। उन्होंने मलयालम में नमस्कारम कहकर अपना संबोधन शुरू किया। उन्होंने वंदे मातरम विवाद या सरकार के साथ मतभेदों का कोई सीधा उल्लेख नहीं किया। हालांकि, इस घटना के पीछे के राजनीतिक संदेश को नजरअंदाज करना मुश्किल था। यूडीएफ सरकार यह संकेत देना चाहती है कि वह परंपरा और प्रोटोकॉल से जुड़े मामलों पर लोक भवन के सामने आसानी से नहीं झुकेगी। वहीं, राज्यपाल का कार्यालय भी अपने निर्देश को सार्वजनिक रूप से नजरअंदाज किए जाने के बाद चुपचाप पीछे हटने की संभावना नहीं है।



