छत्तीसगढ़

आदिवासियों की ज्वलंत समस्याओं को लेकर केंद्रीय राज्य मंत्री को सौंपा ज्ञापन


रायपुर। अनुसूचित जनजाति शासकीय सेवक विकास संघ छत्तीसगढ़ ने आदिवासी समाज से जुड़ी विभिन्न ज्वलंत समस्याओं के निराकरण की मांग को लेकर भारत सरकार के केंद्रीय राज्य मंत्री (जनजातीय कार्य) दुर्गा दास उइके से न्यू सर्किट हाउस रायपुर में भेंट कर ज्ञापन सौंपा। संघ के प्रतिनिधिमंडल ने आदिवासी समाज के हितों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर मंत्री का ध्यान आकर्षित करते हुए शीघ्र कार्रवाई की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल में अनुसूचित जनजाति आयोग के सचिव पवन नेताम, संघ के प्रदेश अध्यक्ष आर.एन. ध्रुव, गोंडवाना गोंड महासभा के राष्ट्रीय सचिव कमलेश मंडावी, प्रदेश संयुक्त सचिव एस.पी. ध्रुव, आदिवासी समन्वय मंच भारत के डमरूधर मांझी सहित कई सामाजिक एवं संगठनात्मक पदाधिकारी उपस्थित रहे।
ज्ञापन में प्रमुख रूप से पदोन्नति में आरक्षण लागू करने, छात्रवृत्ति में आय सीमा समाप्त करने, फर्जी जाति प्रमाण पत्र धारकों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने, आदिवासी बाहुल्य जिलों में स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने, बैकलॉग पदों पर विशेष भर्ती अभियान चलाने तथा कबीरधाम जिले के आदिवासी शिक्षकों के स्थानांतरण आदेश को निरस्त करने जैसी मांगें शामिल थीं।
संघ ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों एवं संवैधानिक प्रावधानों के बावजूद पदोन्नति में आरक्षण का समुचित पालन नहीं किया जा रहा है, जिससे अनुसूचित जनजाति वर्ग के कर्मचारियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं छात्रवृत्ति के लिए निर्धारित आय सीमा के कारण अनेक आदिवासी विद्यार्थी उच्च शिक्षा से वंचित हो रहे हैं।
ज्ञापन में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के मामलों पर भी चिंता व्यक्त करते हुए दोषियों के खिलाफ एफआईआर, सेवा से बर्खास्तगी, लाभों की वसूली तथा लंबित मामलों के त्वरित निराकरण की मांग की गई। इसके अलावा राज्य के विभिन्न विभागों में अनुसूचित जनजाति वर्ग के रिक्त बैकलॉग पदों को भरने के लिए विशेष भर्ती अभियान चलाने का आग्रह किया गया।
प्रतिनिधिमंडल ने कबीरधाम जिले के 10 आदिवासी शिक्षकों के स्थानांतरण को नियम विरुद्ध बताते हुए उसे निरस्त करने की मांग भी रखी।
केंद्रीय राज्य मंत्री दुर्गा दास उइके ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुनते हुए सभी मांगों पर सकारात्मक विचार कर आवश्यक एवं उचित कार्रवाई कराने का आश्वासन दिया। इससे आदिवासी समाज एवं संगठन के पदाधिकारियों में आशा की नई किरण जगी है।

Author Desk

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