नगरी की मिट्टी से निकला लाल बना पुलिस अधीक्षक, संघर्ष और मेहनत से रचा इतिहास
जवाहर नवोदय विद्यालय से शुरू हुआ सफर, महज 23 साल की उम्र में बने CISF सब-इंस्पेक्टर, अब पदोन्नत होकर संभाली एसपी की जिम्मेदारी
नगरी-धमतरी जिले के नगरी अंचल के लिए यह गौरव और सम्मान का ऐतिहासिक क्षण है। ग्राम नगरी के होनहार पुत्र माहेश्वर नाग पुलिस विभाग में पदोन्नत होकर पुलिस अधीक्षक (एसपी) बन गए हैं। वे नगरी अंचल से इस प्रतिष्ठित पद तक पहुंचने वाले पहले अधिकारी हैं। उनकी इस उपलब्धि से पूरे नगरी क्षेत्र, साहू समाज तथा जिलेभर में हर्ष और गर्व का वातावरण है। सोशल मीडिया से लेकर गांव-गांव तक लोग उन्हें शुभकामनाएं देते हुए उनकी सफलता को युवाओं के लिए प्रेरणा बता रहे हैं।
वर्ष 1979 में ग्राम नगरी में जन्मे माहेश्वर नाग का बचपन सामान्य ग्रामीण परिवेश में बीता, लेकिन उनकी प्रतिभा और मेहनत ने बचपन से ही उन्हें अलग पहचान दिलाई। प्राथमिक शिक्षा के दौरान ही उनकी मेधा का परिचय तब मिला, जब कक्षा पांचवीं में उनका चयन जवाहर नवोदय विद्यालय, माना कैंप में हुआ। यही वह पड़ाव था, जहां से उनके उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखी गई।
विद्यालयी शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने रायपुर के छत्तीसगढ़ कॉलेज से विज्ञान संकाय में स्नातक (बीएससी) की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने विश्वविद्यालय से एंथ्रोपोलॉजी विषय में एमएससी की उपाधि प्राप्त की। पढ़ाई के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी जारी रखी और अपने पहले ही बड़े प्रयास में उन्होंने सफलता का परचम लहराया।
महज 23 वर्ष की आयु में उन्होंने एसएससी परीक्षा उत्तीर्ण कर केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) में सब-इंस्पेक्टर के पद पर चयन प्राप्त किया। यह उपलब्धि किसी भी युवा के लिए बड़ी मानी जाती है। हैदराबाद और उदयपुर जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर अपनी सेवाएं देते हुए उन्होंने अपने कार्यकुशलता और अनुशासन का परिचय दिया।
सेवा के दौरान भी उन्होंने अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ा। वर्ष 2007 में उन्होंने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की परीक्षा उत्तीर्ण कर उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) के पद पर चयन हासिल किया। इसके बाद उनका पुलिस सेवा का सफर लगातार नई ऊंचाइयों को छूता गया।
अपने प्रशासनिक जीवन में उन्होंने एसडीओपी अंबागढ़ चौकी, सीएसपी दल्लीराजहरा, एसडीओपी भानुप्रतापपुर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) कोंडागांव, कवर्धा, एंटी करप्शन ब्यूरो रायपुर, रायगढ़, सारंगढ़ और बस्तर सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर उत्कृष्ट सेवाएं दीं। अपने सरल स्वभाव, ईमानदार कार्यशैली और प्रभावी नेतृत्व के कारण उन्होंने विभाग में अलग पहचान बनाई।
बस्तर में पदस्थापना के दौरान उन्हें पदोन्नति मिली और वर्तमान में उन्हें माना पुलिस ट्रेनिंग सेंटर में पुलिस अधीक्षक (एसपी) के रूप में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत जीवन की बड़ी सफलता है, बल्कि पूरे नगरी अंचल के लिए भी एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है।
माहेश्वर नाग की सफलता के पीछे उनके माता-पिता का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनके पिता अमृत लाल नाग तथा माता तुलसी देवी नाग ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने पुत्र को बेहतर शिक्षा और संस्कार दिए। उनके बड़े भाई रुद्रप्रताप नाग ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि माहेश्वर की मेहनत, अनुशासन और समर्पण ने पूरे परिवार और क्षेत्र का मान बढ़ाया है।
खेल, संगीत और लेखन में भी रखते हैं विशेष रुचि
प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ माहेश्वर नाग बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी हैं। उन्हें फुटबॉल खेलना, नियमित जिम जाना, गायन तथा फिल्मों की कहानी लेखन में विशेष रुचि है। यातायात जागरूकता पर उनके द्वारा बनाई गई एक लघु फिल्म को राष्ट्रीय शॉर्ट फिल्म फेयर अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है। इससे उनकी रचनात्मक सोच और सामाजिक सरोकार भी उजागर होते हैं।
युवाओं के लिए बने प्रेरणा
ग्रामीण परिवेश से निकलकर अपनी मेहनत, लगन और निरंतर संघर्ष के बल पर पुलिस अधीक्षक जैसे उच्च पद तक पहुंचने वाले माहेश्वर नाग आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन चुके हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो सीमित संसाधन भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनते।
नगरी अंचल के पहले पुलिस अधीक्षक बनने पर क्षेत्रवासियों, समाज के प्रबुद्धजनों, जनप्रतिनिधियों एवं शुभचिंतकों ने माहेश्वर नाग को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य और सफल प्रशासनिक कार्यकाल की शुभकामनाएं दी हैं।


