कश्मीरी पंडितों को धमकी भरा पत्र जारी, पीएम पैकेज कर्मचारियों ने मांगी सुरक्षा

श्रीनगर। विस्थापित कश्मीरी पंडितों को कथित तौर पर निशाना बनाने की धमकी वाला एक पत्र सामने आने के बाद सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल के लेटरहेड पर जारी इस पत्र में कश्मीरी पंडितों के नाम-पते और वाहनों के नंबर सहित अन्य जानकारियां दर्ज होने का दावा किया गया है। पत्र में संबंधित लोगों को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई है।
धमकी भरे पत्र के सामने आने के बाद ऑल पीएम पैकेज इंप्लाइज फोरम कश्मीर ने जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर प्रधानमंत्री पैकेज के तहत घाटी में तैनात कर्मचारियों की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, यूएलसी के आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा से संबंध होने का दावा किया जाता है।
‘न डरेंगे, न भागेंगे’
श्रीनगर में तैनात कश्मीरी पंडित कर्मचारी सुरेंद्र कौल ने मीडिया से कहा कि वे अब डरकर कश्मीर नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि कश्मीर उनकी जन्मभूमि है और वे यहीं रहकर अपना काम करेंगे। बताया जा रहा है कि अगस्त के पहले सप्ताह में भी इसी तरह का एक धमकी भरा पत्र सामने आया था। अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे नए पत्र में कश्मीरी पंडितों के पते, वाहन नंबर और फोन नंबर तक साझा किए जाने का दावा किया जा रहा है। कश्मीरी पंडित सामाजिक कार्यकर्ता राकेश हांडू ने कहा कि सोशल मीडिया पर लगातार धमकी भरे पत्र सामने आ रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई और प्रभावित कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
राकेश हांडू ने सरकार के सुरक्षा संबंधी दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि 5 अगस्त 2019 के बाद घाटी में शांति और बदलाव की बात कही जाती रही है, लेकिन धमकी भरे पत्र सामने आने से जमीनी स्थिति को लेकर चिंता बनी हुई है। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों को पहचान उजागर कर धमकाने की घटनाओं पर तत्काल कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि आतंकी हिंसा में बहुसंख्यक समुदाय के स्थानीय नागरिकों और पुलिसकर्मियों ने भी जान गंवाई है। ऐसे में आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ सभी समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है।



