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सत्ता से ऊपर सेवा का संकल्प, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा शिखर कितना भी ऊंचा हो, राह सेवा की ही रहेगी

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत वडनगर से वाराणसी जाने वाले दल के सदस्यों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संवाद किया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने सेवा, जनभागीदारी और जनकल्याण को राजनीति के केंद्र में रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि राजनीति में पद और सत्ता चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो जाए, जनसेवा का मार्ग कभी नहीं बदलना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सेवा ही हमारा मुख्य कार्य होना चाहिए। सेवा करते हुए ही सेवा का संदेश समाज तक पहुंचाना है। इसके लिए उपदेश देने की जरूरत नहीं है, बल्कि अपने आचरण और कार्यों के माध्यम से लोगों के सामने उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति लगातार सेवा के कार्यों से जुड़ा रहता है, तो समाज खुद उससे प्रेरणा लेता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारा व्यवहार और कार्य यह संदेश देने वाला होना चाहिए कि राजनीति में सत्ता महत्वपूर्ण हो सकती है, लेकिन जनसेवा का संकल्प उससे भी ऊपर है।

‘सेवा करते-करते ही सेवा का संदेश देना है’
प्रधानमंत्री ने कहा कि “सेवा करते-करते ही सेवा का संदेश देना है, कोई उपदेश नहीं देना है। हम सेवा करके ही सेवा का संदेश देंगे।” उन्होंने कहा कि सेवा का भाव केवल भाषणों या नारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे व्यवहार और दैनिक कार्यों में दिखाई देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में आने वाले लोगों की जिम्मेदारी है कि वे समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचें और उसकी जरूरतों को समझें। सेवा के कार्यों के माध्यम से समाज में विश्वास और सहयोग की भावना को मजबूत किया जा सकता है।

सत्ता से ऊपर सेवा का भाव
प्रधानमंत्री ने कहा कि राजनीतिक जीवन में व्यक्ति कितने भी बड़े पद पर पहुंच जाए, उसे अपने मूल उद्देश्य से दूर नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सत्ता और संगठन में जिम्मेदारियां बढऩे के साथ सेवा का दायरा भी बढऩा चाहिए। उन्होंने कहा कि “हमारे आचरण से ही लोगों को पता चले कि राजनीति में सत्ता कितनी ही बड़ी क्यों न हो जाए, लेकिन हमारा मार्ग सेवा का ही रहेगा।” प्रधानमंत्री ने इस दौरान सेवा के मार्ग से कभी विचलित नहीं होने का संकल्प दोहराया।

ऊंचाइयों पर पहुंचकर भी सेवा का संकल्प कायम रहे
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में व्यक्ति कितनी भी ऊंचाई हासिल कर ले, उसे सेवा के मूल भाव को हमेशा अपने साथ रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि लक्ष्य कितना भी बड़ा हो, जनसेवा का भाव उससे अलग नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि “कितने ही ऊंचे शिखर पर पहुंचेंगे, लेकिन ‘सेवा परमो धर्म:’ के भाव को लेकर ही आगे बढ़ेंगे।”

प्रधानमंत्री के साथ संवाद के दौरान ‘सेवा संकल्प अभियान’ से जुड़े सदस्यों ने भी अपने अनुभव साझा किए। इस संवाद को सेवा गतिविधियों से जुड़े कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणादायक बताया गया। प्रधानमंत्री ने सेवा कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाने और समाज के व्यापक हित में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

‘सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से सेवा और सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यों को जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ाने का संदेश दिया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि सेवा का प्रभाव तभी व्यापक होता है, जब वह व्यक्तिगत प्रयास से आगे बढक़र सामूहिक प्रयास का रूप लेता है।
वडनगर जन्मभूमि तो काशी मेरी कर्मभूमि- क्करू मोदी

पीएम मोदी ने आगे कहा कि वडनगर और वाराणसी दोनों ही पुरातन ऐतिहासिक शहर हैं। ये दोनों हजारों साल से जीवंत हैं। मेरे लिए तो एक मेरी जन्मभूमि है और दूसरी मेरी कर्मभूमि है। काशी में बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद है और वडनगर, हाटकेश्वर महादेव के आशीष की भूमि है। आप सभी इन दोनों शहरों के बीच सेवा का इतना बड़ा अभियान चला रहे हैं। अभी मुझे कुछ साथियों से बात करने का मौका भी मिला। जो वडनगर से निकले हैं और वाराणसी की तरफ बढ़ रहे हैं, आपका अनुभव सुनकर ऐसा लग रहा है कि जैसे मैं भी आपके साथ-साथ चल रहा हूं।

सेवा के भाव से करोड़ों जरूरतमंदों को मिलता है मुफ्त अनाज

प्रधानमंत्री बोले, ‘जब हम सेवाभाव से काम कर रहे हैं। जब सेवा का भाव होता है, तब करोड़ों जरूरतमंदों को मुफ्त अनाज मिलता है। जब सेवा का भाव होता है, तो आयुष्मान योजना जन्म लेती है। और इन दोनों शहरों से निकलते हुए आप लोगों ने रास्ते भर में देखा होगा कि सेवा के कामों को हमने कैसे आगे बढ़ाया है।’

युवाशक्ति की विकसित भारत में अहम भूमिका

युवाओं को संदेश देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि राजनीति अपनी जगह है, चुनाव अपनी जगह पर है, शासन व्यवस्थाएं अपनी जगह पर हैं। लेकिन हम तो राष्ट्र निर्माण के लिए निकले हुए लोग हैं, हम विकसित भारत के संकल्प को लेकर निकले हुए लोग हैं। 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में हमें युवाशक्ति की बहुत बड़ी भूमिका को एकदम से मजबूती के साथ आगे बढ़ाना है।

युवा पीढ़ी होगी विकसित भारत की बड़ी लाभार्थी

पीएम मोदी ने आगे कहा, ‘आज की युवा पीढ़ी विकसित भारत की निर्माता भी है और यही पीढ़ी एक बड़ी लाभार्थी भी होगी। इस दायित्व को निभाने के लिए भारत को जमीन पर जानना, समझना, देश की हर बारीकियों को अनुभव करना, अलग-अलग क्षेत्रों, सामाजिक वर्गों से मिलना, उनके सपनों से परिचित होना, उनकी आकांक्षाओं को समझना, उनकी बातों को जानना। ये सारी बातें बहुत जरूरी हैं और इसमें सेवा संकल्प यात्रा निश्चित रूप से आपके जीवन में अहम भूमिका निभाने वाली है।’ इसे पहले, जलवायु संकट पर बड़ा बयान देते हुए पीएम मोदी ने कहा था कि भारत दुनिया को नई राह दिखा रहा है।

Author Desk

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