छत्तीसगढ़

ग्राम मुजगहन में महिलाओं ने कमरछठ के पावन पर्व पर रखा व्रत, संतान प्राप्ति सहित,संतान की लंबी आयु और परिवार की मंगल कामनाओं के लिए

माता के लिए संतान की दीर्घायु सहित मंगल कामना से बढ़कर संसार का कोई बड़ा धन नहीं होता – महाराज यशवंत गिरी गोस्वामी

धमतरी – हर साल भादो माह की षष्ठी तिथि के दिन हल षष्ठी का व्रत रखा जाता है. इसे कई जगह हलछठ और ललही छठ के नाम से जाना जाता है। वहीं छत्तीसगढ़ में कमरछठ के नाम से जाना जाता है। छत्तीसगढ़ के पारंपरिक त्यौहारों में शामिल कमरछठ का विशेष महत्व है।महिलाएं इस व्रत को संतान प्राप्ति और संतान की सुख-समृद्धि के लिए करती हैं। छत्तीसगढ़ में कमरछठ का त्यौहार पुराने समय से मनाया जा रहा है। हलषष्ठी का त्यौहार जिस पर्व को लेकर महाराज यशवंत गिरी गोस्वामी ने बताया कि कमर छठ : संतान की लंबी उम्र के लिए माताएं कमरछठ का व्रत रखती है।माताएं संतान की लंबी आयु के साथ परिवार के सुखमय जीवन के लिए व्रत रख।वहीं पूजा करने के स्थान पर सगरी खोदकर पूजन कर।कमरछठ मे छह तरह की भाजियां, पसहर चावल, काशी के फूल, महुआ के पत्ते, धान की लाई सहित पूजा कर कई छोटी-बड़ी पूजन की सामाग्री भगवान शिव को अर्पित कर , संतान के दीर्घायु जीवन की कामना की सुबह से निर्जला व्रत कर महिलाओं ने दोपहर को भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर कमरछठ की कहानी सुनी। महाराज जी यशवंत गोस्वामी ने बताया कि छत्तीसगढ़ के प्रमुख त्योहारों में से एक कमरछठ को हलछठ या हलषष्ठी भी कहा जाता है। छत्तीसगढ़ में कमरछठ का महत्व है जो संतान प्राप्ति और संतान की लंबी उम्र के लिए किया जाता है. शहर से लेकर गांव हर गली मोहल्लों में माताएं इस व्रत को उत्साह के साथ करती है।छत्तीसगढ़ तरह तरह की भाजियों के लिए प्रसिद्ध है। छत्तीसगढ़ में कमरछठ में भी भाजियों का अपना महत्व है।इस व्रत में छह तरह की ऐसी भाजियों का उपयोग किया जाता है।जिसमें हल का उपयोग ना किया हो।बाजार में भी लोग अलग-अलग तरह की छह भाजियां लेकर अपने घर पहुंंचे। जिसमें चरोटा भाजी, खट्टा भाजी, चेंच भाजी, मुनगा भाजी, कुम्हड़ा भाजी, लाल भाजी, चौलाई भाजी शामिल है।हलषष्ठी पर्व पर माताएं पूजा करने के स्थान पर सगरी खोदकर भगवान शंकर व गौरी, गणेश को पसहर चावल, भैंस का दूध, दही, घी, बेल पत्ती, कांशी, खमार, बांटी, भौरा सहित अन्य सामग्रियां अर्पित करती हैं। पूजन पश्चात माताएं घर पर बिना हल के जुते हुए अनाज पसहर चावल, छह प्रकार की भाजी को पकाकर प्रसाद के रूप में वितरण कर अपना उपवास तोड़ते हैं।वही धमतरी शहर से लगे ग्राम मुजगहन में महिलाओं ने इस व्रत को रखकर महाराज यशवंत गिरी गोस्वामी के सानिध्य में इसकी कथा सुनने के बाद पूजा पाठ कर विधि विधान से अपने व्रत का पारायण किया।
जिस आयोजन में ग्राम और मोहल्ला की महिलाएं भारी संख्या में शामिल होकर अपने बच्चों सहित घर परिवार की सुख शांति की कामना की ।

Author Desk

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