छत्तीसगढ़

समय और समझ आज दोनों जिसके पास है, वहीं असली भाग्यशाली है: साध्वी शुभंकरा श्रीजी

रायपुर। एमजी रोड स्थित जैन दादाबाड़ी प्रांगण में चल रहे मनोहरमय चातुर्मास 2023 की प्रवचन श्रृंखला के दौरान नवकार जपेश्वरी साध्वी शुभंकरा श्रीजी ने कहा कि आज समय और समझ दोनों जिसके पास है, असल मायने में वही भाग्यशाली है। समय रहते जिस व्यक्ति में समझ आ गई, वह परम पद को भी प्राप्त कर सकता है। जिसने अपना समय खोकर समझ पाया है, वह बहुत ही दुर्भाग्यशाली होगा क्योंकि अब उसके पास अपनी समझ को अपनाने का समय नहीं होगा। समझ को परखने में समय लगता है जो अब उस व्यक्ति के पास नहीं है। अनुभवों से हम सीखते है और अनुभवी बनने के लिए समय लगता है। कम उम्र में ही संसार की माया को समझना ही असल समझदार बनना है।

साध्वीजी कहती हैं कि आज हर इंद्रियों के लिए अलग-अलग डॉक्टर होते है। पहले ऐसा नहीं होता था, एक ही डॉक्टर सभी समस्याओं को देखकर दवाई देता था। कई बार बहुत समय तक बीमारी ठीक नहीं होने पर मरीज को बड़े शहरों में भेजा जाता था तो पता चलता था कि उसे गंभीर बीमारी है जिसका इलाज उस डॉक्टर के हाथ में नहीं है, जो पहले उसका इलाज कर रहा था। ऐसे में देरी होती थी और मरीज की जान पर बात बन आती थी। अब आंख के लिए, दांत के लिए, कान के लिए, पेट के लिए, हार्ट के लिए, हड्डियों के लिए सभी अंगों के लिए अलग-अलग डॉक्टर है। यह सभी डॉक्टर अपने-अपने क्षेत्र में विषेश अनुभव रखते है और समस्या लेकर आने वाले मरीजों का बहुत ही बेहतर ढंग से इलाज करते है। इन्हें समझने में विषेशज्ञ डॉक्टरों को बहुत की कम समय लगता है और इलाज भी कम समय में बेहतर हो जाता है।

साध्वीजी कहती हैं कि शब्द जड़ है और आत्मा चेतन है। यदि कोई व्यक्ति आपको अपशब्द कह देता है तो वह आप पर निर्भर करता है कि आप उसे आत्मा से चिपका लेते हो या फिर अनसुना कर आगे बढ़ जाते हो। आज तो लोग छोटी-छोटी बातों पर लड़ाई-झगड़े पर उतारू हो जाते है। आज इसी अहंकार की वजह से दुनियाभर में हिंसात्मक घटनाएं हो रही है। इसकी झलकियां आपको टीवी और अखबारों में देखने को मिल जाएगी। आपको यह अहंकार छोड़ना होगा। वैसे भी आप अगर परमात्मा की शरण में जाते है तो यह अवगुण आपके अंदर नहीं होना चाहिए। यह अवगुण लेकर अगर आप परमात्मा के दर्शन के लिए जा रहे है तो यह अनुचित होगा।

Author Desk

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