छत्तीसगढ़

धमतरी में शराब की किल्लत से रोजाना 50 लाख रुपये का नुकसान

ब्लैक में दोगुने दाम पर बिक रही प्लेन और मसाला शराब, आबकारी विभाग को लग रहा भारी राजस्व घाटा



धमतरी (प्रखर)धमतरी जिले में इन दिनों शराब की किल्लत से स्थिति चिंताजनक बन गई है। सरकारी शराब दुकानों में पर्याप्त सप्लाई नहीं होने के कारण आबकारी विभाग को प्रतिदिन लगभग 50 लाख रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। शराब की कमी के चलते कई जगहों पर ब्लैक में शराब की बिक्री बढ़ गई है और ग्राहक मजबूरी में दोगुने दाम पर प्लेन व मसाला शराब खरीदने को विवश हैं।
जानकारी के अनुसार जिले में कुल 27 शासकीय शराब दुकानें संचालित हैं, जिनमें 2 देशी, 5 विदेशी, 1 प्रीमियम और 19 कंपोजिट शराब दुकानें शामिल हैं। इन दुकानों में प्रतिदिन लगभग 30 से 35 लाख रुपये तक की शराब बिक्री होती है, लेकिन पिछले दो महीनों से देशी, प्लेन और मसाला शराब की सप्लाई प्रभावित होने से दुकानों में शराब की भारी कमी देखी जा रही है।
ब्लैक में बढ़े दाम, मजबूरी में खरीद रहे ग्राहक
शराब नहीं मिलने के कारण कई स्थानों पर प्लेन और मसाला शराब ब्लैक में दोगुने दाम पर बेची जा रही है। जहां सरकारी दुकानों में मसाला शराब की कीमत लगभग 80 रुपये और प्लेन शराब 120 रुपये के आसपास होती है, वहीं ब्लैक में यही शराब 200 रुपये या उससे अधिक में बिक रही है। कई शराब प्रेमी मजबूरी में बार और ढाबों का रुख कर रहे हैं।
5-6 लोग मिलकर खरीद रहे बड़ी बोतल
पौवा उपलब्ध नहीं होने के कारण कई लोग मिलकर अंग्रेजी शराब की बड़ी बोतल खरीद रहे हैं और आसपास बैठकर पी रहे हैं। जानकारी के मुताबिक एक बड़ी बोतल 1200 से 1500 रुपये तक में मिल रही है। इससे छोटे दुकानदारों और ठेलों पर काम करने वाले लोगों की रोजी-रोटी पर भी असर पड़ा है।
कुछ शराब दुकानों में सन्नाटा
शराब की कमी के कारण कई दुकानों में सन्नाटे जैसी स्थिति बन गई है। जहां पहले दुकानों के बाहर ग्राहकों की भीड़ लगी रहती थी, अब वहां इक्का-दुक्का ग्राहक ही दिखाई दे रहे हैं। दूसरी ओर जैसे ही कहीं शराब आने की खबर मिलती है, लोग तुरंत वहां पहुंच जाते हैं।
शराब की कमी से रोजगार पर असर
शराब दुकानों के आसपास अंडा, आमलेट, चखना और अन्य सामान बेचकर रोजी-रोटी कमाने वाले लोगों का काम भी प्रभावित हो गया है। ग्राहकों की संख्या घटने से उनकी आय में भी कमी आई है।
प्लास्टिक बोतलों से बढ़ रहा पर्यावरण खतरा
पहले कई जगहों पर शराब कांच की बोतलों में मिलती थी, जिन्हें लौटाकर कुछ लोग अपनी आय भी बढ़ाते थे। अब प्लास्टिक की बोतलों के बढ़ते उपयोग से पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि दुकानों के आसपास बड़ी मात्रा में प्लास्टिक कचरा जमा हो रहा है।
ढाबों और बार में बढ़ी भीड़
शराब की कमी के कारण शहर के बार और ढाबों में ग्राहकों की संख्या बढ़ गई है। कई जगहों पर देर रात तक शराब परोसी जा रही है और अनाधिकृत रूप से भी शराब बिक्री की शिकायतें सामने आ रही हैं।
महुवा दारू की ओर बढ़ा रुझान
देशी मसाला और प्लेन शराब नहीं मिलने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में मिलने वाली महुआ शराब की मांग भी बढ़ने लगी है। कई लोग विकल्प के रूप में महुआ दारू का सहारा ले रहे हैं।
आबकारी विभाग का बयान
जिला आबकारी अधिकारी अनुपमा लोहरे ने बताया कि जिले की 27 दुकानों में नियमित सप्लाई नहीं होने के कारण बिक्री प्रभावित हो रही है, जिससे प्रतिदिन लगभग 50 लाख रुपये का नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य स्तर पर शराब सप्लाई की नई व्यवस्था की जा रही है और जल्द ही स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है।

Author Desk

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