छत्तीसगढ़

हिंछापुर बना कच्ची शराब का गढ़, 32 घरों में धड़ल्ले से चल रहा अवैध कारोबार


खुलेआम बिक रही महुआ शराब, ग्रामीणों ने पुलिस-आबकारी पर संरक्षण का लगाया आरोप


धमतरी। नगरी ब्लॉक का ग्राम हिंछापुर इन दिनों अवैध महुआ शराब के कारोबार का बड़ा केंद्र बन गया है। हालात ऐसे हैं कि गांव को कच्ची शराब बनाने और बेचने वालों का मजबूत किला कहा जाने लगा है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायत के बावजूद पुलिस और आबकारी विभाग द्वारा ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है, जिससे अवैध कारोबारियों के हौसले बुलंद हैं।
ग्रामीणों के अनुसार हिंछापुर के लगभग 26 घरों और समीपस्थ रामनगर के 6 घरों में बड़े पैमाने पर कच्ची महुआ शराब बनाकर बेची जा रही है। शाम ढलते ही गांव में शराबियों का जमावड़ा लगना शुरू हो जाता है और देर रात तक खरीद-फरोख्त चलती रहती है। आसपास के गांवों से भी लोग यहां कच्ची शराब लेने पहुंचते हैं।
ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि विभागीय अमला कभी-कभार छापेमारी के लिए आता जरूर है, लेकिन बस्ती तक पहुंचे बिना ही लौट जाता है। उनका आरोप है कि हाल ही में कलेक्टर और आबकारी विभाग को शिकायत के बाद टीम गांव पहुंची थी, लेकिन कथित तौर पर बिना कार्रवाई लौट गई।
सिहावा पुलिस पर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पुलिस को पूरे मामले की जानकारी है, फिर भी गश्त के दौरान वाहन केवल गांव का चक्कर लगाकर आगे बढ़ जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना लीक होने के कारण छापेमारी से पहले ही कारोबारी सतर्क हो जाते हैं।
इस तरह चलता है शराब बनाने और बेचने का सिस्टम
ग्रामीणों के मुताबिक गर्मी के मौसम में कच्ची शराब बनाने का काम अधिकतर रात में किया जाता है। महुआ को बड़े-बड़े हांडी में जमीन में गाड़कर डुबोया जाता है। कुछ जगहों पर खराब होने से बचाने के लिए एसी तक लगाए गए हैं। कई घरों में सीसीटीवी कैमरे से निगरानी भी की जाती है।
दिन में शराब को झिल्ली में भरकर रबर या धागे से बांधा जाता है और शाम होते ही बिक्री शुरू हो जाती है। कुछ लोग गांव के बाहरी हिस्सों में शराब तैयार करते हैं और घरों से बिक्री करते हैं।
बिगड़ रहा गांव का माहौल
ग्रामीणों के अनुसार हिंछापुर और रामनगर मिलाकर करीब 32 स्थानों पर कच्ची शराब का कारोबार चल रहा है। इसका असर गांव के माहौल पर साफ दिखाई देने लगा है। युवा पीढ़ी तेजी से नशे की चपेट में आ रही है। शराबियों की भीड़ से महिलाओं और बेटियों को भी रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि शराबखोरी के कारण गांव में झगड़े, विवाद और दुर्घटनाएं भी बढ़ रही हैं। अवैध कारोबार से जुड़े लोगों का खौफ इतना है कि अधिकांश लोग खुलकर विरोध करने से भी डरते हैं।
कोपेडीह से भी बदतर हुए हालात
भखारा क्षेत्र का ग्राम कोपेडीह कभी कच्ची शराब के लिए कुख्यात रहा है, लेकिन वहां पुलिस और आबकारी विभाग की लगातार कार्रवाई के बाद काफी हद तक नियंत्रण हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि नगरी मुख्यालय से करीब 6 किलोमीटर दूर स्थित हिंछापुर की स्थिति अब कोपेडीह से भी बदतर हो गई है। प्रशासन की उदासीनता के कारण यहां अवैध कारोबार लगातार मजबूत होता जा रहा है।
सांकरा में सट्टा का भी आरोप
ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत सांकरा के नंदी चौक स्थित एक खंडहरनुमा होटल में खुलेआम सट्टा लिखे जाने का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि वहां कुर्सी-टेबल लगाकर सट्टा पट्टी चलाई जा रही है, जिससे कई परिवार आर्थिक रूप से प्रभावित हो रहे हैं।
ग्रामीणों ने की कठोर कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने पुलिस अधीक्षक और जिला आबकारी अधिकारी से मांग की है कि हिंछापुर में चल रहे अवैध शराब कारोबार के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही गांव-गांव में जनजागरूकता अभियान चलाकर लोगों को शराब के दुष्परिणामों से अवगत कराया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस तरह कोपेडीह में लगातार अभियान चलाकर अवैध शराब पर अंकुश लगाने का प्रयास किया गया था, उसी तरह हिंछापुर में भी ठोस कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीण आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

Author Desk

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button