छत्तीसगढ़ राज्य गौ संरक्षण एवं संवर्धन समिति के अध्यक्ष सुबोध राठी ने मुख्यमंत्री से की मुलाकात

धमतरी(प्रखर) छत्तीसगढ़ राज्य गौ संरक्षण एवं संवर्धन समिति के अध्यक्ष सुबोध राठी ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मुलाकात कर प्रदेशभर की गौशालाओं की समस्याओं एवं उनके समाधान को लेकर विस्तृत चर्चा की। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपते हुए गौशालाओं को दिए जा रहे अनुदान में अधिकतम सीमा समाप्त करने सहित कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं।
सुबोध राठी ने बताया कि वर्तमान में गोसेवा आयोग द्वारा पंजीकृत गौशालाओं को प्रति गोवंश प्रतिदिन 35 रुपये की दर से अधिकतम 25 लाख रुपये तक अनुदान प्रदान किया जाता है। इस व्यवस्था के तहत लगभग 196 गोवंशों तक ही अनुदान का लाभ मिल पाता है, जबकि प्रदेश की अधिकांश गौशालाओं में 300 से अधिक गोवंशों का संरक्षण किया जा रहा है। ऐसे में सीमित अनुदान के कारण गौशाला संचालकों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है और व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से संचालित करना चुनौती बनता जा रहा है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि जिस गौशाला में जितने गोवंश हों, उसी के अनुसार पूर्ण अनुदान प्रदान किया जाए ताकि गौवंशों के पालन-पोषण, उपचार एवं सुरक्षा में किसी प्रकार की परेशानी न हो। इसके साथ ही जरूरतमंद गौशालाओं के लिए शेड निर्माण हेतु अलग से राशि उपलब्ध कराने की मांग भी रखी गई, जिससे बरसात एवं गर्मी के मौसम में गोवंशों को सुरक्षित रखा जा सके।
सुबोध राठी ने यह भी मांग की कि गौधाम योजना की तर्ज पर गौशालाओं में कार्यरत चरवाहों एवं पशु सहायकों के लिए अलग से मानदेय राशि स्वीकृत की जाए। उन्होंने कहा कि गौशालाओं में 24 घंटे निगरानी और देखरेख की आवश्यकता होती है, इसलिए प्रत्येक गौशाला में स्थायी चरवाहा आवास निर्माण के लिए 10 लाख रुपये का विशेष अनुदान दिया जाना चाहिए।
इसके अलावा उन्होंने गौशालाओं द्वारा निर्मित गोबर खाद, गोमूत्र एवं अन्य जैविक उत्पादों की शासकीय विभागों द्वारा प्राथमिकता के आधार पर खरीदी सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई। उनका कहना था कि इससे गौशालाएं आत्मनिर्भर बनेंगी और जैविक खेती को भी बढ़ावा मिलेगा।
सुबोध राठी ने कहा कि प्रदेश सरकार लगातार गौसंरक्षण की दिशा में कार्य कर रही है और यदि इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाता है तो प्रदेश की गौशालाओं को नई मजबूती मिलेगी। इससे न केवल गोवंशों की बेहतर देखभाल सुनिश्चित होगी, बल्कि गौशाला संचालकों को भी राहत मिलेगी और गौसंरक्षण अभियान को व्यापक गति प्राप्त होगी।



